Make Small Strong: बेहतर सेवा से जीता ग्राहकों का विश्वास, तरक्की के रास्ते पर दौड़ पड़ी गाड़ी

Make Small Strong अरविंद ग्रुप ने ग्राहकों को बेहतर सेवा देने के साथ ही उनकी संतुष्टि का ध्यान रखा। ग्राहकों को केवल गाड़ी बेचना उद्देश्य नहीं था बल्कि उनसे जुड़े रहने के भाव से काम किया। सबसे ज्यादा ध्यान सर्विस पर दिया। ग्राहकों से फीडबैक लिया सुझावों पर अमल किया।

By Prateek GuptaEdited By: Publish:Wed, 21 Oct 2020 01:00 AM (IST) Updated:Wed, 21 Oct 2020 10:53 AM (IST)
Make Small Strong: बेहतर सेवा से जीता ग्राहकों का विश्वास, तरक्की के रास्ते पर दौड़ पड़ी गाड़ी
आगरा में बाईपास रोड स्थित अरविंद हुंडई शोरूम।

आगरा, गौरव भारद्वाज। वैसे तो व्यापार में तरक्की का कोई एक फार्मूला नहीं है, लेकिन पूरी लगन और ईमानदारी के साथ ग्राहकों को बेहतर सेवा और सुविधा दी जाए तो एक न एक दिन तरक्की मिल ही जाती है। हमने इसी फार्मूले पर काम किया। ग्राहकों को बेहतर सेवा और सुविधा दी। इससे उनका हमारे साथ एक बार जो विश्वास स्थापित हुआ, वह 43 साल बाद भी कायम है। उनके प्यार और भरोसे के बल पर ही छोटे से शोरूम से शुरू हुआ सफर आज अरविंद ग्रुप आफ कंपनीज का रूप ले सका है। यह कहना है अरविंद ग्रुप के एमडी अरविंद बंसल का।

अरविंद बंसल बताते हैं कि उनके पिता का ईंट भट्ठों का कारोबार था। मेरे सामने पुश्तैनी काम अपनाने का आसान विकल्प था। मगर, मैंने आटोमोबाइल में इंजीनियरिंग की। मन में कुछ नया करने की इच्छा थी। इसके साथ वर्ष 1977 में आगरा-दिल्ली हाइवे पर टू व्हीलर और थ्री व्हीलर के शोरूम से शुरुआत की। अच्छी सेवा के बल पर कुछ साल में शहर में पहचान बन गई। उन्होंने बताया कि बेटा मयंक बंसल वर्ष 2000 में इंग्लैंड से पढ़ाई करके लौटा। इसके बाद वर्ष 2001 में मयंक भी साथ आ गए। बेटे ने समय के साथ कदमताल करते हुए चार पहिया वाहन में डील करने की इच्छा जताई। वर्ष 2005 में हुंडई कार की डीलरशिप ले ली। जिम्मेदारी बढऩे से ग्राहकों की संतुष्टि की चुनौती बढ़ी। ऐसे में ग्राहकों को केवल गाड़ी बेचना उद्देश्य नहीं था, बल्कि उनसे जुड़े रहने के भाव से काम किया। सबसे ज्यादा ध्यान सर्विस पर दिया। ग्राहकों से फीडबैक लिया, उनके सुझावों पर अमल किया। इसका ही फल रहा कि अरविंद ग्रुप ने टाटा कार की डीलरशिप भी ले ली। अच्छी सेवा के दम पर ही पहचान मिली है।

अरविंद बंसल ने बताया कि लॉकडाउन का समय बहुत कुछ नया सिखा गया। लॉकडाउन के समय में सेल्स और सर्विस के लिए तकनीक का बेहतर इस्तेमाल किया। गूगल मीट एप के जरिए कर्मचारियों से जुड़े रहे। नई प्रोडक्ट की लांचिंग पर उसके फीचर और अन्य जानकारी के लिए ऑनलाइन ही ट्रेनिंग दिलाई। अनलाक में संक्रमण को देखते हुए कांटेक्ट लेस सर्विस पर पूरा जोर रहा। नई गाड़ी खरीदनी हो या सर्विस का टाइम लेना हो, सब कुछ वाट््सएप के जरिए हो रहा है। शोरूम, सर्विस सेंटर पर कोरोना संक्रमण से बचाव का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। लॉकडाउन के दौरान डिजीटल पेमेंट का चलन बढ़ा। हमने भी गूगल पे को अपनाया। क्यूआर कोड से लेकर एकाउंट तक के फीचर अपनाए। शारीरिक दूरी का पालन करने के लिए डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा दे रहे हैं, फिर चाहे इंश्योरेंस पालिसी के लिए हो, सर्विसिंग या फिर गाड़ी खरीदने के लिए ही क्यों न हो।

कोरोना काल में जारी रही सर्विस

कोरोना संक्रमण काल में बहुत से ग्राहक ऐसे थे जो भीड़भाड़ से बचना चाहते थे, ऐसे ग्राहकों की गाड़ी की घर से लाने और वापस छोडऩे की सुविधा शुरू की। अरविंद बंसल बताते हैं कि सर्विसिंग में मानकों का पूरा ख्याल रखा गया। क्लिक टू बाय एप लांच किया। इस एप के जरिए लोगों से जुड़े। इस एप के जरिए लोग गाड़ी के फीचर, दूसरी गाड़ी से तुलना घर बैठे कर सके। गाडिय़ों के रंग पसंद कर ऑनलाइन बुकिंग करने की सुविधा मिली तो लोगों ने घर बैठकर बुकिंग कराई। लॉकडाउन में इंश्योरेंस यूनिट ने घर बैठकर लोगों को सेवा प्रदान की। ब्रांड प्रमोशन के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्म का इस्तेमाल करते हैं। सोशल मीडिया का लाभ भी मिला है। इसके जरिए लोगों से संवाद स्थापित करना आसान है।

300 लोगों को दे रहे रोजगार

अरविंद बंसल बताते हैं कि जब पहला शोरूम खोला था, उस समय उनके यहां 17 लोग थे। धीरे-धीरे नई डीलरशिप और वर्कशाप भी खुले। ऐसे में नए कर्मचारियों की आवश्यकता हुई। अब वो 300 से ज्यादा लोगों को रोजगार प्रदान कर रहे हैं। कर्मचारियों को नई-नई तकनीक से अपडेट रखने के लिए समय-समय पर वर्कशाप की जाती है और ट्रेनिंग दिलाई जाती है।

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