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एक और चुनौती, 30 दिन बाद कोरोना मरीज हो रहे डिस्चार्ज

एक और चुनौती, 30 दिन बाद कोरोना मरीज हो रहे डिस्चार्ज

एसएन मेडिकल कालेज के पोस्ट कोविड वार्ड में 90 मरीजों का चल रहा इलाज 5 से 25 दिन तक पोस्ट कोविड केयर में रखने के बाद मरीज किए जा रहे डिस्चार्ज

JagranMon, 10 May 2021 05:20 AM (IST)

आगरा, जागरण संवाददाता। कोरोना की दूसरी लहर ने एक और चुनौती खड़ी कर दी है। कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद मरीजों को पोस्ट कोविड केयर में 5 से 25 दिन तक रखा जा रहा है। ऐसे में 40 फीसद मरीज 30 दिन बाद डिस्चार्ज हो रहे हैं।

कोरोना की पहली लहर में 10 से 14 दिन के इलाज के बाद मरीज डिस्चार्ज होकर घर पहुंच गए। मगर, कोरोना के नए स्ट्रेन से 80 फीसद तक फेफड़ों में संक्रमण हो रहा है। कोविड हास्पिटल में 10 से 12 दिन के इलाज के बाद कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव आ रही है। मगर, आक्सीजन का स्तर 80 से 90 के बीच में है। इन मरीजों को कोविड हास्पिटल से मेडिसिन विभाग के पोस्ट कोविड केयर वार्ड में शिफ्ट किया जा रहा है। यहां मरीजों को पहले आइसीयू में रखा जाता है। 15 लीटर तक हाई फ्लो सपोर्ट पर मरीजों का इलाज चल रहा है। तबीयत में सुधार होने पर एक्यूट वार्ड और उसके बाद प्रथम तल पर बने वार्ड में मरीज शिफ्ट किए जा रहे हैं। पांच दिन से 25 दिन तक पोस्ट कोविड केयर के बाद मरीजों को आक्सीजन सपोर्ट के बिना स्तर 90 से अधिक पहुंचने पर डिस्चार्ज किया जा रहा है। पोस्ट कोविड केयर वार्ड में 90 मरीज भर्ती हैं। केस स्टडी

कोरोना संक्रमित होने पर 32 साल के नीरज को एसएन मेडिकल कालेज के कोविड हास्पिटल में भर्ती किया गया। 17 अप्रैल को निगेटिव रिपोर्ट आने पर पोस्ट कोविड केयर वार्ड में शिफ्ट किया गया। फेफड़ों में अधिक संक्रमण होने से आक्सीजन सपोर्ट पर रखना पड़ा। आक्सीजन का स्तर सामान्य आने पर रविवार को 22 दिन बाद डिस्चार्ज किया गया। इसलिए लंबा चल रहा इलाज

-नए स्ट्रेन में 80 फीसद तक फेफडे़ खराब हो रहे हैं, इन्हें सही होने में समय लग रहा है।

-सातवें दिन के बाद साइटोकाइनिन स्ट्रोर्म से कई तरह की समस्याएं हो रही हैं, इन मरीजों को निगरानी में रखा जा रहा है।

-डी डायमर का स्तर बढ़ रहा है, खून गाढ़ा होने पर हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है। पांच दिन तक खतरा ज्यादा रहता है।

-सेकेंडरी इन्फेक्शन हो रहे हैं, इससे लिवर से लेकर गुर्दा संबंधी समस्या बढ़ रही हैं।

-शुगर का स्तर नियंत्रित नहीं हो रहा है, इसके लिए इंसुलिन पर रखना पड़ रहा है और रिकवरी देर से हो रही है। दूसरी लहर में फेफड़ों में संक्रमण अधिक है, खून भी गाढ़ा हो रहा है। कई मरीज 25 दिन की पोस्ट कोविड केयर के बाद डिस्चार्ज किए गए हैं।

डा. बलबीर सिंह, अध्यक्ष, मेडिसिन विभाग, एसएन मेडिकल कालेज

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