शातिरों के लैपटाप में सैकड़ों अमेरिकी नागरिकों का डाटा, उलझी पुलिस

कितने लोगों से कर चुके ठगी अभी तक नहीं हो पाई जानकारी ईमेल से कम्युनिकेशन कर जानकारी जुटाएगी पुलिस

JagranSat, 03 Jul 2021 09:18 PM (IST)
शातिरों के लैपटाप में सैकड़ों अमेरिकी नागरिकों का डाटा, उलझी पुलिस

आगरा,जागरण संवाददाता। बीपीओ सेक्टर की कंपनी बनाकर ठगी का गैंग चला रहे शातिरों के लैपटाप में सैकड़ों अमेरिकी नागरिकों का डाटा मिला है। पुलिस इसकी जांच में उलझ गई है, इसमें स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि शातिरों ने किससे ठगी कर ली और कौन उनके निशाने पर थे। अब अमेरिकी नागरिकों से ईमेल पर कम्युनिकेशन कर पुलिस इसकी जानकारी करेगी।

न्यू आगरा क्षेत्र में गुलमोहर वाटिका कालोनी में एक घर में फर्जी कंपनी संचालित थी। पुलिस ने इसके संचालक गौरव समेत तीन को गिरफ्तार कर शनिवार को जेल भेज दिया है। ये शातिर नौकरी और लोन दिलाने के नाम पर अमेरिकी नागरिकों से ठगी करते थे। शातिरों से आठ लैपटाप और 16 मोबाइल बरामद हुए हैं। शनिवार को पुलिस ने लैपटाप की जांच की। इनमें पांच सौ से अधिक अमेरिकी नागरिकों का डाटा है। इसमें नाम, पते, कांटेक्ट नंबर के साथ ईमेल आइडी और उनके बारे में पूरी जानकारी है। पुलिस ने कई नंबरों पर कांटेक्ट करने की कोशिश की, लेकिन नहीं हो पाया। अब पुलिस एक-एक व्यक्ति को ईमेल भेजकर उससे जानकारी लेगी। उनके जवाब आने पर ही स्थिति स्पष्ट होगी। पुलिस के पास अभी तक कोई शिकायत नहीं है। शातिरों के मोबाइल की भी पुलिस जांच कर नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

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मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़ करने लगा ठगी

एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद के अनुसार गौरव ने आरबीएस कालेज से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिग की पढ़ाई की है। इसके बाद वह दिल्ली में एक प्रतिष्ठित मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करने चला गया। आठ माह वहां नौकरी की, वहीं किसी ने उसे बीपीओ सेक्टर की कंपनी बनाकर अवैध कारोबार करने की सलाह दी। वह नौकरी छोड़कर आ गया। मूलरूप से सिकंदराराऊ, हाथरस निवासी गौरव ने यहां आफिस खोल लिया। कोरेाना संक्रमण की दोनों लहरों में काम बंद रहा, अब बीस दिन से धड़ल्ले से काम चल रहा था। आशीष और वसीम उसके साथी थे। उनको गौरव 22-22 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दे रहा था। मां के खाते में ठगी की रकम

पूछताछ में गौरव तोमर ने पुलिस को बताया कि उसकी मां सीमा का केनरा बैंक में खाता है। अमेरिकी नागरिकों से ई वाउचर में आने वाली रकम को वह उसी में ट्रांसफर करता था। इसके बाद रकम को निकाल लिया जाता था। पुलिस अब आरोपित की मां के खाते की डिटेल निकलवा रही है।

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फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हैं शातिर

अमेरिकी नागरिकों से अधिकतर ई मेल से कम्युनिकेशन करते थे। कुछ लोगों से गौरव और उसके साथी फर्राटेदार अंग्रेजी में बात करते थे। ई वाउचर्स के माध्यम से कमीशन इसलिए लेते थे, जिससे उनके भारत में होने की जानकारी अमेरिकी नागरिकों को न हो।

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अमेरिका में भी एजेंट होने की आशंका

शातिरों ने पूछताछ में बताया है कि उनके संपर्क अमेरिका के कुछ कंसल्टेंट से भी हैं। पुलिस को आशंका है कि वे इन एजेंटों के माध्यम से ही अमेरिकी नागरिकों को शिकार बनाते थे। काल करने को वर्चुअल नंबर का इस्तेमाल करते थे, जिससे वे ट्रेस न हो सकें।

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