लाकडाउन में समझ आया योग व व्यायाम का महत्व

लाकडाउन में समझ आया योग व व्यायाम का महत्व
Publish Date:Sat, 24 Oct 2020 06:00 AM (IST) Author: Jagran

आगरा, जागरण संवाददाता।

लाकडाउन अर्थात् तालाबंदी, इसके तहत सभी को अपने-अपने घरों में रहने की सलाह दी गई, जिसका सरकार की तरफ से कड़ाई से पालन भी करवाया जा रहा है। यह लाकडाउन एक ऐसा समय था, जिसका सामना शायद ही हमने कभी किया हो। कोरोना वायरस की वजह से यह लाकडाउन का समय हम सभी के लिए मुश्किलों से भरा रहा।

कोरोना वायरस से बचने के लिए पूरा देश अपने घरों में कैद हो गया। दुकानें, सरकारी दफ्तर, विद्यालय, व्यापार, जहां तक कि बड़ी-बड़ी दुकानें और कारोबार तक बंद हो गए। प्रत्येक व्यक्ति को परेशानियों से भरा वक्त गुजारना पड़ा। इस लाकडाउन ने विद्यार्थियों के जीवन पर भी अत्यधिक प्रभाव डाला। जिस तरह से एक सिक्के के दो पहलू होते हैं, ठीक उसी तरह से लाकडाउन का प्रभाव भी अच्छे के साथ-साथ बुरा भी पड़ा।

आफलाइन से आनलाइन दुनिया की तरफ कदम रखना विद्यार्थियों के लिए बेहद फायदेमंद रहा, जो शिक्षा हम स्कूलों व कोचिग में जाकर प्राप्त करते थे, वह कंप्यूटर, लैपटाप और मोबाइल के स्क्रीन पर सिर्फ एक क्लिक में घर बैठे उपलब्ध हो रही थी। घर पर सुरक्षित बैठकर अपने शिक्षकों से पढ़ना एक अत्यंत सराहनीय कार्य था। हमारे विद्यालय द्वारा चलाई गई आनलाइन कक्षाओं ने हमारा पाठ्यक्रम पूरा करने में बहुत योगदान दिया। स्कूल के प्रत्येक शिक्षक हमें पढ़ाने में जुटे थे, मानो उनका सिर्फ एक ही मकसद हो कि हमारा कोर्स पूरा कराना है। खासकर वह शिक्षक भी आनलाइन पढ़ाई कराने को तत्पर दिखे, जो अमूमन इसके लिए नए और अनभिज्ञ थे। लेकिन अपनी आंखों और स्वास्थ्य की चिता किए बिना उन्होंने हमारी शिक्षा से कभी कोई समझौता नहीं किया। साथ ही हमें इसके लिए प्रेरित भी करते थे।

इस लाकडाउन में हम विद्यार्थियों को खुद को पहचानने, अपनी गलतियों को जानकार उन्हें सुधारने, नई-नई चीजें खोजने, अलग-अलग किताबें पढ़ने और परिवार के साथ अच्छा समय बिताने का एक नया व सुनहरा अवसर मिला। हमें परिवार के साथ शांति से परिपूर्ण जीवन व्यतीत करने का भी मौका मिला, जो भाग-दौड़ भरी जिदगी में दूर की कौड़ी नजर आता था। लेकिन इसके विपरीत हमें एक अलग प्रकार की चुनौती का सामना भी करना पड़ा। लगातार आनलाइन कक्षाओं की वजह से हमारी आंखों व सिर में दर्द व शरीर में थकावट महसूस होने लगी। जिसका सामना लगभग हर विद्यार्थी को करना पड़ा। हमारी स्थिति एक पिजरे में कैद पक्षी की तरह हो गई थी, जो खुली व ताजा हवा नहीं ले सकता था। इस समस्या की जानकारी मैंने अपने शिक्षकों को दी, तो उन्होंने मुझे योग व व्यायाम करने के साथ खुली हवा में समय बिताने की सलाह दी, जिससे मुझे काफी लाभ हुआ। यह 100 फीसद सच है कि एक विद्यार्थी जीवन में शिक्षक का एक खास योगदान है, जिसे हम विद्यार्थियों ने वर्ष 2020 के लाकडाउन में नजदीक से महसूस किया है।

प्रखर गुप्ता, कक्षा 12, सेंट एंड्रयूज पब्लिक स्कूल।

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