ऐतिहासिक, प्राकृतिक और धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र है आगरा

विश्व पर्यटन दिवस ताजमहल के शहर में कीठम और चंबल सेंक्चुरी जैसे बड़े आकर्षण बटेश्वर समाध और गुरुद्वारा गुरु का ताल धार्मिक श्रद्धा के केंद्र

JagranSun, 26 Sep 2021 09:05 PM (IST)
ऐतिहासिक, प्राकृतिक और धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र है आगरा

आगरा, जागरण संवाददाता । दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताजमहल देश की शान है तो यहां ऐसे अनेक स्थल हैं, जहां पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं हैं। रामसर साइट घोषित हो चुका सूर सरोवर पक्षी विहार (कीठम) देसी-विदेशी पक्षियों के आश्रय स्थल के रूप में विख्यात है। राष्ट्रीय चंबल सेंक्चुरी की विविधता का जवाब नहीं, जहां दुर्लभ कछुओं से लेकर संकटग्रस्ट प्रजातियों में शामिल घड़ियाल और मगरमच्छ के साथ देसी-विदेशी पक्षियों की कई प्रजातियों को देखा जा सकता है। शिव मंदिरों की श्रृंखला के लिए प्रसिद्ध बटेश्वर भी धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र है। सूर सरोवर पक्षी विहार: सूर सरोवर पक्षी विहार वन एवं वन्य जीव विभाग द्वारा संरक्षित है। यहां बनी झील मानव निर्मित है। इसे गर्मियों में आगरा को पानी की आपूर्ति के लिए बनाया गया था। यहां करीब 80 प्रजातियों के पक्षी मिलते हैं, जो झील व जमीन पर रहते हैं। झील में करीब 60 प्रजाति की मछलियां हैं। यहां अक्टूबर से मार्च तक बार हेडेड गूज, फ्लेमिगो, पेलिकन, स्पून बिल, कूट, रेड क्रेस्टेड पोचार्ड, ग्रे क्रेस्टेड ग्रेब, ब्लैक टेल्ड गोविट, शावलर, ग्रे लेग गूज, कामन ग्रीन शेंक, कारमोरेंट, कामन सैंडपाइपर, कांगो डक, व्हिसलिग टील, ब्लैक नेक्ड स्टार्क का कलरव सुनाई देता है। पिछले वर्ष नवंबर में इसे रामसर साइट घोषित किया गया था। यहां प्राकृतिक पर्यटन के विकास की अपार संभावनाएं हैं। राष्ट्रीय चंबल सेंक्चुरी प्रोजेक्ट

कभी डाकुओं के लिए चर्चित रही चंबल का नजारा अब बदल चुका है। नदी का साफ पानी लुप्तप्राय गांगेय डाल्फिन, घड़ियाल, मगरमच्छ और कई दुर्लभ प्रजातियों के कछुओं की सुरक्षित शरणस्थली बन गया है। बाह में वर्ष 1979 में राष्ट्रीय चंबल सेंक्चुरी प्रोजेक्ट की शुरुआत कर लुप्तप्राय प्रजातियों का संरक्षण शुरू किया गया था। यहां कछुओं की लुप्तप्राय आधा दर्जन से अधिक प्रजातियां हैं, जिनमें साल, मोरपंखी, कटहेवा, पचेवा, सुंदरी, तिलकधारी, इंडियन स्टार, धमोक, चौड़ आदि प्रमुख हैं। वर्ष 2020 में यहां 1812 घड़ियाल, 702 मगरमच्छ और वर्ष 2018 में 74 गांगेय डाल्फिन गिनी गई थीं। यहां अक्टूबर से मार्च तक देसी-विदेशी प्रजाति के पक्षी डेरा डालते हैं। बटेश्वर के शिव मंदिरों की श्रृंखला

बटेश्वर में यमुना किनारे पर शिव मंदिरों की श्रृंखला देशभर में विख्यात है। यहां लगने वाला पशु मेला उत्तर भारत में प्रसिद्ध है। कार्तिक के महीने में लगने वाले मेले में दूर-दराज से लोग पशु खरीदने आते हैं। यहां उप्र सरकार द्वारा घाटों का सुंदरीकरण व विकास कराया जा रहा है। कार्तिक पूर्णिमा पर यहां स्नान को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। राधास्वामी मत के गुरु की समाध

दयालबाग के स्वामीबाग में राधास्वामी मत के प्रवर्तक परम पुरुष पूरन धनी स्वामीजी महाराज की पवित्र समाध राधास्वामी मत के अनुयायियों के साथ ही दूरदराज से आने वाले लोगों के लिए आस्था और आकर्षण का केंद्र है। सफेद संगमरमर से बनी समाध में की गई पच्चीकारी व कार्विंग का काम देखते ही बनता है। गुरुद्वारा गुरु का ताल

गुरुद्वारा गुरु का ताल सिखों के लिए श्रद्धा का बड़ा केंद्र है। सिखों के नौवें गुरु तेग बहादुर ने यहीं से गिरफ्तारी दी थी। जिस जगह उन्हें रखा गया था, वहां आज भोरा साहिब बना हुआ है। चिश्ती की दरगाह

फतेहपुर सीकरी स्थित सूफी संत शेख सलीम चिश्ती की दरगाह आस्था का केंद्र है। मुगल शहंशाह अकबर ने इसका निर्माण कराया था। यहां प्रतिदिन अकीदतमंदों की भीड़ उमड़ती है।

--------

अब पर्यटन केवल ऐतिहासिक धरोहर स्थलों तक सीमित नहीं है। उसमें नए-नए आकर्षण जोड़ने होते हैं। उप्र सरकार को सूर सरोवर पक्षी विहार व राष्ट्रीय चंबल सेंक्चुरी के प्रचार-प्रसार और पर्यटन सुविधाओं के विकास पर ध्यान देना चाहिए।

-राजीव सक्सेना, उपाध्यक्ष, टूरिज्म गिल्ड आफ आगरा आगरा कम से कम तीन दिन का डेस्टिनेशन है। ऐतिहासिक स्थलों के साथ ही सरकार को अन्य पर्यटन स्थलों पर ध्यान देना चाहिए। ऐसे स्थलों के लिए टूर पैकेज तैयार कराए जाएं, जिससे कि पर्यटक वहां जा सकें।

-राकेश चौहान, अध्यक्ष, होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.