आगरा में पिता के बाद मां को भी कोरोना ने छीना, बच्चों के सामने मुश्किलों का पहाड़

न्यू आगरा क्षेत्र में रहते थे दंपती पहली लहर में मिता तो दूसरी में मां की मौत। 18 वर्षीय बेटी के कंधों पर 14 साल की बहन और छह साल के भाई की जिम्मेदारी। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना में 38 बच्चों को चिन्हित किया गया है।

Tanu GuptaFri, 23 Jul 2021 02:16 PM (IST)
18 वर्षीय बेटी के कंधों पर 14 साल की बहन और छह साल के भाई की जिम्मेदारी।

आगरा, अली अब्बास। कोरोना ने तीन बच्चों के सिर से छह महीने पहले पिता का साया छीन लिया। मां के साथ तीनों बच्चे किसी तरह इस सदमे से उबरने की कोशिश कर रहे थे। अपनी पढाई को बरकरार रख भविष्य को संवारने की चुनौती से जूझ रहे थे। मां के सहारे से इस झंझावत से निकलने की उम्मीद थी। मगर, कोरोना की दूसरी लहर के प्रकोप ने उनको मां से भी जुदा किया तो बच्चों की उम्मीद डूबने लगी। भाई-बहनों को दुनिया की मुश्किलों से लड़ने के लिए अकेला कर दिया। अब 18 साल की बेटी छोटे भाई-बहन के लिए माता-पिता की भूमिका में है।

कागजी प्रक्रिया पूरी होने में समय लगने के चलते तीनों बच्चों की हर सुबह एक नई चुनौती लेकर सामने आती है। न्यू आगरा इलाके में रहने वाले परिवार के मुखिया का आरओ प्लांट था। परिवार का पालन-पोषण और तीन बच्चो की पढाई इसी आरओ प्लांट पर निर्भर थी। परिवार में पत्नी के अलावा 18 और 14 साल की बेटी व एक छह साल बेटा है। परिवार की मुश्किलें इस साल जनवरी से शुरू हुईं। जब परिवार के मुखिया में कोरोना के लक्षण दिखाई दिए। उन्हें 22 जनवरी को दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। जिसके चलते आरओ प्लांट बंद हो गया। इसके बाद मां किसी तरह से परिवार और तीन बच्चों की जिम्मेदारी उठा रही थी।

अप्रैल के आखिरी सप्ताह में मां भी कोरोना संक्रमित हो गईं। उन्हें तेज बुखार के साथ सांस लेने में दिक्कत की शिकायत हुई। बेटी ने बताया अस्पतालों में बेड और आक्सीजन नहीं मिल रही थी। किसी तरह एक अस्पताल में बेड मिली। स्वजन आक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था अपने स्तर से करते रहे। मगर, 30 अप्रैल को आक्सीजन का स्तर काफी कम पहुंचने से मां भी उनका साथ छोड़ गई।उनके बाद परिवार की जिम्मेदारी अब 18 साल की बेटी पर आ गई है। वह बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद स्नातक में प्रवेश लेने की तैयारी कर रही है। छोटी बहन नवीं और भाई दूसरी कक्षा में है।

आरओ प्लांट बंद होने के कारण खराब हो गया है। आर्थिक तंगी से जूझते बच्चों के सामने अपनी पढाई के साथ-साथ रोजी-रोटी का संकट है। इस बीच किसी ने उन्हें कोरोना में अपनों को गंवाने वाले बच्चों के लिए शुरू हुई मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना की जानकारी दी। बच्चों ने परिचितों और रिश्तेदारों के माध्यम से आवेदन जमा करा दिया। दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन के दौरान कई कमियां पूरी निकलने पर उन्हें पूरा करने में एक महीना निकल गया। बेटी ने बताया कि उसने स्कूल की फीस की रसीद दिखाईं, लेकिन कहा गया कि स्कूल से लिखवाकर लाना होगा कि वहां पढ़ते हैं।

स्कूल प्रबंधन से लिखवाने के बाद शुक्रवार को आवेदन जमा होगा। कोरोना में 100 बच्चाें ने अपनों को गंवाया कोराेना में अपनों को गंवाने वाले 100 बच्चों की सूची डीपीओ कार्यालय को मिली थी। इनमें से अभी 38 लोगोंं को चिन्हित किया जा चुका है। जिनमें से 26 के खातों में रकम पहुंच चुकी है। इनमें 60 से बच्चे अभी बाकी हैं, जिनमें कई के आवेदन किन्हीं कारणों से निरस्त हो गए थे। बाकी के आवेदनों में भौतिक सत्यापन के दौरान कमियां मिलने पर दूर कराया जा रहा है। मगर, कई परिवार ऐसे हैं कि जिनके सामने परिवार का खर्च चलाने के साथ ही बच्चों की फीस जमा कराने की भी चिंता है।

खुशखबर 26 बच्चों के खाते में पहुंची रकम

मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना में 38 बच्चों को चिन्हित किया गया है। डीएम प्रभु एन सिंह ने बताया कि गुरुवार को इनमें से 26 बच्चों के खाते में तीन महीने की रकम पहुंच गई ।चार हजार रुपये प्रति माह के हिसाब से इन बच्चों के खाते में 12-12 हजार रुपये जमा कराए गए हैं। जबकि अन्य 12 बच्चों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के लाभ की मंजूरी मिल गई है। डीएम ने बताया कि अन्य आवेदन पत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है।

महत्वपूर्ण तथ्य

-योजना का लाभ पाने वाले 26 बच्चों में 15 बालक और 11 बालिका हैं।

-माता-पिता दोनों को गंवाने वाले बच्चों की संख्या चार है।

-दस साल से कम उम्र का एक बालक है।

-जबकि 10 से 11 साल की उम्र के बीच के तीन बच्चे हैं।

-22 बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंंने काेरोना में अपने माता या पिता में किसी एक को गंवाया।

-चार बालक ऐसे हैं जिनकी उम्र दस साल से कम है।

-सात बालक ऐसे हैं जिनकी उम्र 11 से 18 साल के बीच है।

-सात बालिका दस साल से कम उम्र की हैं।चार बालिका 11 से 18 साल की उम्र की हैं।

 

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