50 दिन बीते, नहीं गूंजा वाह ताज

16 अप्रैल को बंद हुए थे सैलानियों के लिए स्मारक के दरवाजे स्मारकों पर आश्रित लोगों के समक्ष आर्थिक संकट

JagranFri, 04 Jun 2021 10:00 PM (IST)
50 दिन बीते, नहीं गूंजा 'वाह ताज'

आगरा, जागरण संवाददाता। मैं ताजमहल हूं। दुनिया के सात अजूबों में शुमार शहंशाह शाहजहां और मुमताज की रुहानी मोहब्बत की अनमोल निशानी। कोरोना काल में जब दुनिया त्राहिमाम कर रही है, तब उसका असहनीय दर्द मुझे भी साल रहा है। 15 माह में दूसरी बार कद्रदानों के लिए मेरे दरवाजे बंद हुए हैं। मेरे भरोसे पेट पालने वालों ने न जाने कितनी रातें भूखे सोकर गुजारी हैं। 50 दिनों से मेरे दरवाजे पर ताला लगा हुआ है। 'वाह ताज' की गूंज सुनने को मैं भी तरस रहा हूं। कद्रदानों से गुलजार रहने वाले मेरे आंगन में सन्नाटा पसरा है। धीरे-धीरे हो रहे अनलॉक ने मुझे भी उम्मीद की किरण दिखाई है। सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही मेरे दरवाजे कद्रदानों के लिए खुल जाएंगे। एक बार फिर मेरे आंगन में 'वाह ताज' गूंजेगा।

ताजमहल व अन्य स्मारकों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) ने 16 अप्रैल को सैलानियों के लिए बंद कर दिया था। शुक्रवार को स्मारकों की बंदी के 50 दिन पूरे हो गए। पिछले वर्ष 188 दिनों की रिकार्ड बंदी के बाद यह ताजमहल के इतिहास में दूसरी सबसे लंबी बंदी है। स्मारक बंद होने के साथ ही ताजनगरी में पर्यटन उद्योग पूरी तरह ठप हो गया था। एएसआइ ने 15 जून तक के लिए स्मारकों को बंद कर रखा है। 15 जून के बाद स्मारक खुलेंगे या बंद रहेंगे, यह फैसला एएसआइ का दिल्ली आफिस करेगा। बहरहाल, देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के थमने और संक्रमितों की संख्या में कमी आने के साथ ही पर्यटन संस्थाओं ने 16 जून से ताजमहल समेत अन्य स्मारकों को खोलने की मांग उठाना शुरू कर दी है।

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इससे पूर्व कब बंद रहा ताजमहल

-एएसआइ द्वारा संरक्षित स्मारक घोषित किए जाने के बाद ताजमहल पहली बार वर्ष 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान चार से 18 दिसंबर तक 15 दिन के लिए बंद रहा था।

-दूसरी बार ताजमहल सितंबर, 1978 में यमुना नदी में बाढ़ आने पर सात दिन के लिए बंद रहा था। उस समय ताजमहल के बेसमेंट में बनी कोठरियों में पानी भर गया था।

-तीसरी बार ताजमहल वर्ष 1992 में अयोध्या में विवादित ढांचे के ध्वंस के बाद दो से तीन दिन बंद रहा।

-चौथी बार ताजमहल पिछले वर्ष 17 मार्च से 20 सितंबर तक 188 दिनों के लिए रिकार्ड अवधि को बंद रहा।

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पर्यटन उद्योग एक नजर

-आगरा में पर्यटन उद्योग पर करीब पांच लाख लोग प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से आश्रित हैं।

-शहर में करीब 500 छोटे-बड़े होटल, 100 से अधिक पेइंग गेस्ट हाउस और 500 से अधिक रेस्टोरेंट हैं।

-मार्च, 2020 से विदेशी पर्यटन पूरी तरह ठप है। इंटरनेशनल फ्लाइट व टूरिस्ट वीजा सर्विस पर रोक की वजह से ऐसा हुआ है।

-कोरोना काल से पूर्व पर्यटन उद्योग का वार्षिक टर्नओवर करीब पांच हजार करोड़ रुपये का था।

-कोरोना काल में पर्यटन उद्योग को चार हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।

-हैंडीक्राफ्ट उद्योग भी पर्यटकों पर आश्रित है। इसका वार्षिक टर्नओवर करीब 2500 करोड़ रुपये का है। इसे करीब 1800 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है।

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पर्यटन उद्योग को उबारने के लिए यह किया जाए

-बिजली बिल में फिक्स्ड चार्ज खत्म किया जाए। वास्तविक खपत के आधार पर बिजली बिल लिया जाए। लोड घटाने की सुविधा मिले।

-एक्साइज ड्यूटी में सात माह की अवधि तक छूट दी जाए।

-हैंडीक्राफ्ट पर लागू 12 फीसद जीएसटी को तीन वर्ष तक माफ किया जाए। जीएसटी से पूर्व हैंडीक्राफ्ट पर कोई कर नहीं था।

-कोरोना काल में बंदी की अवधि का गृह कर और सीवर कर नहीं लिया जाए।

-स्मारकों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।

-स्मारकों में प्रवेश के लिए वैक्सीनेशन अनिवार्य हो।

-बंद चल रही घरेलू उड़ानों को पुन: शुरू किया जाए।

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देश धीरे-धीरे अनलाक हो रहा है। स्मारकों की बंदी को अब 15 जून से आगे नहीं बढ़ाना चाहिए। स्मारकों पर रोजी-रोटी को आश्रित गाइड, फोटोग्राफर, दुकानदार समेत सभी लोग बुरी तरह आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

-दीपक दान, अध्यक्ष टूरिस्ट गाइड वेलफेयर एसोसिएशन कोरोना काल में पर्यटन उद्योग सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। स्मारक खोलने के साथ सरकार को टूरिस्ट वीजा सर्विस व इंटरनेशनल फ्लाइट पर लगी रोक हटानी चाहिए। विदेशी पर्यटकों का आना शुरू हुए बगैर आगरा के पर्यटन उद्योग का भला नहीं होगा।

-राकेश चौहान, अध्यक्ष होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन कोरोना काल में सरकार ने पर्यटन उद्योग की तरफ बिल्कुल ध्यान नहीं दिया। यह देश की जीडीपी में नौ फीसद से अधिक योगदान करता है। 14 माह से अधिक समय से लोग खाली बैठे हैं। अब सरकार को पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों की सुधि लेनी चाहिए।

-राजेश शर्मा, सचिव आगरा टूरिज्म गिल्ड कोरोना काल में ताजमहल मार्च, 2020 में बंद हुआ था। सितंबर, 2020 के अंत से अप्रैल के मध्य तक यह खुला रहा, लेकिन सैलानियों की संख्या पर कैपिग लागू होने से फोटोग्राफरों को बहुत कम काम मिला। दोबारा बंदी होने से तो संकट और बढ़ गया है।

-ब्रजेश गुप्ता, उपाध्यक्ष पुरातत्व स्मारक फोटोग्राफर एसोसिएशन

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