5G स्पेक्ट्रम की अगले साल होगी नीलामी, Bharti Airtel नीलामी प्रक्रिया से बना सकती है दूरी, जानिए क्या है वजह

यह Bharti Airtel की फाइल फोटो है।

Bharti Airtel के मुताबिक अगर नीलामी के दौरान 5G की रिवर्स प्राइसिंग ज्यादा रहती है तो हमारे लिए 5G के ईकोसिस्टम को डेवलपमेंट करने के लिए पर्याप्त राशि नही होगी। ऐसी स्थिति में हम 5G नीलामी प्रक्रिया से दूर रह सकते हैं।

Publish Date:Wed, 28 Oct 2020 07:19 PM (IST) Author: Saurabh Verma

नई दिल्ली, पीटीआइ. डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन अगले साल जनवरी से मार्च के दौरान 5G स्पेक्ट्रम नीलामी की प्रक्रिया की शुरुआत कर सकता है। लेकिन अगर प्राइस को काफी ज्यादा रखा गया, तो भारती एयरटेल (Bharti Airtel) 5G स्पेक्ट्रम नीलामी की प्रक्रिया से दूरी बना सकती है। टेलीकॉम कंपनी के टॉप ऑफिशियल की तरफ से बुधवार को इसका खुलासा किया गया। 

कंपनी ने पर्याप्त राशि न होने का दिया हवाला 

Bharti Airtel के इंडिया और साउथ एशिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर गोपाल टिट्ठल ने कहा कि कंपनी स्पेक्ट्रम नीलामी की रणनीति पर काम कर रही है। साथ ही कंपनी 1000 मेगाहर्ट्ज से कम रेडियो फ्रिक्वेंसी पर काम कर रही है, जिससे बिल्डिंग के अंदर और ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क की समस्या में सुधार किया जा सके। उन्होंने कहा कि हमें मालूम चला है कि डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन अगले साल जनवरी से मार्च के दौरान नीलामी प्रक्रिया शुरू कर सकता है। अगर नीलामी के दौरान 5G की रिवर्स प्राइसिंग ज्यादा रहती है, तो हमारे लिए 5G के ईकोसिस्टम को डेवलपमेंट करने के लिए पर्याप्त राशि नही होगी। ऐसी स्थिति में हम 5G नीलामी प्रक्रिया से दूर रह सकते हैं। 

4G सर्विस के विस्तार का किया ऐलान 

ट्राई की तरफ से 3,300 से लेकर 3,600 Mhz बैंड के लिए प्रति हर्ट्ज स्पेक्ट्रम के लिए 492 रुपये कीमत का प्रस्ताव दिया गया है। 5G सर्विस के लिए रेडीवेव खरीदने के इच्छुक टेलीकॉम ऑपरेटरों को 3,300-3,600 मेगाहर्ट्ज बैंड में स्पेक्ट्रम खरीदने के लिए पैन-इंडिया आधार पर न्यूनतम 9,840 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा क्योंकि ट्राई ने सुझाव दिया है कि इसे 20 मेगाहर्ट्ज ब्लॉक आकार में नीलामी के लिए रखा जाना चाहिए।इससे पहले Bharti Airtel ने कहा गया था कि ट्राई की प्रस्तावित प्राइसिंग के हिसाब से कंपनी को एक बेहतर क्वालिटी की फ्रिक्वेंसी हासिल करने के लिए 50,000 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। कंपनी 2,300 मेगाहर्ट्ज बैंड का विस्तार कर सकती है, जिसका उपयोग मौजूदा वक्त में 4G सर्विस के लिए किया जा रहा है।

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