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Samsung ने अपने 6G प्लान का श्वेत पत्र किया जारी, हाइपर कनेक्टेड एक्सपीरियंस के लिए हो जाइए तैयार

नई दिल्ली, टेक डेस्क। दक्षिण कोरियाई स्मार्टफोन निर्माता कंपनी Samsung ने नेक्स्ट जेनरेशन इंटरनेट कनेक्टिविटी 6G के श्वेत पत्र को शोकेस किया है। अभी भारत समेत दुनिया के कई देशों में 5G सेवाएं भी शुरू नहीं हुई हैं। ऐसे में Samsung 6G कनेक्टिविटी के श्वेत पत्र को पेश करके सबको चौंका दिया है। Samsung ने अपने श्वेत पत्र को 'दी नेक्स्ट हाइपर कनेक्टेड एक्सपीरियंस फॉर ऑल' के नाम से शो किया है। इसमें कंपनी ने अपने 6G विजन के बारे में बात की है कि किस तरह से ये नेक्स्ट जेनरेशन कम्युनिकेशन सिस्टम काम करेगा। व्हाइट पेपर में 6G से संबंधित टेक्नीकल और सामाजिक मेगाट्रेंड्स, नई सर्विसेज, रिक्वॉरमेंट्स, केंडिडेट टेक्नोलॉजी और स्टैंडराइजेशन के लिए एक संभावित टाइमलाइन के बारे में बताया है।

Samsung के नेक्स्ट जेनरेशन कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी 6G के जरिए यूजर्स को हाइपर कनेक्टेड एक्सपीरियंस मिल सकेगा। कंपनी ने अपने रिसर्च विंग Samsung Research के जरिए 6G के रिसर्च के लिए एडवांस R&D हब को इस साल मई में एडवांस कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर के नाम से स्थापित किया है। Samsung के एडवांस कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर के हेड Sunghyon Choi ने कहा, 'जैसा कि आप जानते हैं कि इस समय 5G नेटवर्क का व्यवसायीकरण फिलहाल शुरुआती दौर में है, ऐसे में नेक्स्ट जेनरेशन कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी 6G की तैयारी शुरू करना जल्दबाजी नहीं है क्योंकि इसे पूरी तरह से तैयार होने में 10 वर्ष तक का समय लग सकता है।'

2030 तक होगा रोल आउट

उन्होंने आगे कहा, हमने 6G टेक्नोलॉजी के लिए पहले से ही रिसर्च और डेवलपमेंट सेंटर लॉन्च किया है और हम इसमें मल्टीपल जेनरेशन के कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी को इसमें समाहित किया है, जिसमें 5G भी शामिल है। अपने श्वेत पत्र में Samsung ने बताया कि 6G टेक्नोलॉजी पर रिसर्च 2028 तक पूरी हो जाएगी। इसके बाद इसे व्यावसायिक तौर पर 2030 तक रोल आउट किया जा सकता है। इस हाइपर कनेक्टेड टेक्नोलॉजी के मुख्य यूजर्स इंसान और AI ऑपरेटेड मशीन होंगे। इन्हें कई तरह की एडवांस सर्विसेज जैसे कि एक्सटेंडेड रियलिटी (XR), हाई फिडेलिटी मोबाइल होलोग्राम और डिजिटल रिप्लिका की सुविधाएं मिलेंगी।

6G नेटवर्क के लिए टेटराहर्ट्ज (THz) बैंड की जरूरत होगी। इसे नोवल एंटिना टेक्नोलॉजी के माध्यम से एन्हांस कवरेज के जरिए पहुंचाया जाएगा। ये हाई फ्रिक्वेंसी बैंड डुप्लेक्स टेक्नोलॉजी पर काम करेगा जो कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस वायरलेस कम्युनिकेशन को सपोर्ट करेगा। 5G नेटवर्स इस समय MHz (मेगाहर्ट्ज) फ्रिक्वेंसी बैंड पर रन करता है जो कि दो तरह के हैं स्टैंड अलोन और नॉन स्टैंड अलोन।

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