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Independence Day 2020 भारत ने दुनिया को दी ऐसी 5 चीजें, जिन्हें जानकर हर भारतीय को होगा गर्व

Independence Day 2020 भारत ने दुनिया को दी ऐसी 5 चीजें, जिन्हें जानकर हर भारतीय को होगा गर्व
Publish Date:Sat, 15 Aug 2020 07:49 AM (IST) Author: Renu Yadav

नई दिल्ली, टेक डेस्क। Independence Day 2020: भारत आज अपना 74वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। भारत ने आजादी के इन 74 सालों में कई क्षेत्रों में तरक्की की। इनमें से एक साइंस एंड टेक्नोलॉजी फील्ड थी, जिसमें भारत ने न सिर्फ इन 74 सालों में टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में दुनिया के साथ कदमताल की, बल्कि कुछ दुनिया को ऐसे आविष्कार दिए, जिस पर हर एक भारतीय को गर्व होगा। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आज हम ऐसे ही भारत के टेक्नोलॉजी में बेहतरीन टॉप-5 आविष्कार के बारे में बता रहे हैं-

Email

दुनियाभर में आज हर किसी को कहीं न कहीं Email की जरूरत पड़ती है। यह एक तरह की लोगों की वर्चुअल आईडी होती है। लेकिन क्या आपको पता है कि इसका आविष्कार सबसे पहले दुनिया में एक भारतीय वैज्ञानिक VA Shiva Ayyadurai ने किया था, जो कि भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक थे। वो जब साल 1979 में हाई स्कूल स्टूडेंट थे, उस वक्त Shiva Ayyadurai ने ऑफिस के बीच मेल भेजने के इलेक्ट्रॉनिक वर्जन का आविष्कार कियाय था, जिसे Email कहा गया। इसके बाद साल 1982 में उनके आविष्कार का कॉपीराइड किया गया । 

Intel Pentium Chip 

दुनिया में सबसे ज्यादा फेमस और कंप्यूटर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली Intel Pentium चिप का आविष्कार एक भारतीय विनोद धाम (Vinod Dham) ने किया था। उन्हें फादर ऑफ पेंटियम चिप का जनक कहा जाता है। विनोद धाम का जन्म सन 1950 में पंजाबी-हिंदू कायस्थ परिवार में हुआ। उनके पिता आर्मी में थे, जो देश विभाजन के वक्त पाकिस्तान के रावलपिंडी से भारत आ गए थे। धाम ने दिल्ली और अमेरिका में पढ़ाई की।  

फाइबर ऑप्टिक्स

फाइबर ऑप्टिक्स के दुनिया को पूरी तरह से बदलकर रखने का काम किया है। फाइबर ऑप्टिकस आने बाद वेब, ट्रांसपोर्ट, टेलिफ़ोन संचार और मेडिकल की दुनिया में क्रांतिकारी परिवर्तन आए. नरिंदर सिंह कपानी पंजाब के मोगा में जन्मे एक भौतिक विज्ञानी थे. दुनिया भर में इन्हें ऑप्टिक्स फाइबर का जनक माना जाता है. 1955 से 1965 के बीच नरिंदर सिंह ने कई टेक्निकल पेपर लिखे. इनमें से एक पेपर 1960 में साइंटिफिक अमरीकन में प्रकाशित हुआ था. इस पेपर ने फाइबर ऑप्टिक्स को स्थापित करने में मदद की थी.

रेडियो प्रसारण

साल 1895 में सर चगदीश चंद्र बोस ने इलेक्ट्रो मैग्नेटिक वेव का प्रसारण दुनिया में पहली बार किया था। साथ ही सबसे पहले मिलीमीटर रेंज रेडियो तरंग माइक्रोवेव्स का इस्तेमाल बारूद को सुलगाने और घंटी बजाने में किया था। इसके चार साल बाद लोहा-पारा-लोहा कोहिरर टेलिफ़ोन डिटेक्टर के तौर पर आया और यह वायरलेस रेडियो प्रसारण के आविष्कार का अग्रदूत बना। लेकिन आमतौर पर  नोबेल पुरस्कार विजेता इंजीनियर गुलइलमो मार्कोनी को रेडियो प्रसारण का जनक माना जाता है। बता दें कि बोस दुनिया में वो पहले इंसान थे, जिन्होंने सॉलिड-स्टेट डॉयोड डिटेक्टर का आविष्कार किया, जिससे EM वेव का पता लगाया जा सके।  

USB पोर्ट 

यूएसबी यानी यूनिवर्सल सीरियल बस पोर्ट को आज हम रोजाना के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। मोबाइल चार्जर, लैपटॉप से लेकर तकरीबन हर एक डिवाइस यूएसबी पोर्ट के साथ आती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि USB पोर्ट के जनक एक भारतीय थे, जी हां, उस शख्स का नाम अजय भट्ट है। 1990 के दशक में भट्ट और उनकी टीम ने डिवाइस पर जब काम शुरू किया तो उस दशक के आख़िर तक कंप्यूटर कनेक्टिविटी के लिए यह सबसे अहम फीचर बन गया था. भारत में जन्मे अजय भट्ट को इस मामले में सार्वजनिक तौर पर पहचान तब मिली जब 2009 में इंटेल के लिए एक टेलीविजन विज्ञापन आया. इसके बाद ग़ैर-यूरोपियन श्रेणी में 2013 में भट्ट को यूरोपियन इन्वेंटर अवॉर्ड से नवाजा गया। भट्ट ने अपने इस आविष्कार के लिए कोई पैसा नही लिया।  

Written By - Saurabh Verma 

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