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Google और Apple के ऐप स्टोर से बैन हुए 59 ऐप्स कैसे हटे?

हर्षित हर्ष। बीते 29 जून को TikTok समेत 59 ऐप्स को केन्द्र सरकार ने बैन कर दिया है। इनमें से ज्यादातर ऐप्स की ऑरिजिन कंट्री चीन है और ये ऐप्स भारत में काफी लोकप्रिय थे। इन ऐप्स को बैन करने की एडवाइजरी जारी होने के बाद इन्हें Google Play Store और Apple App Store से भी हटा लिया गया। भारत सरकार ने इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट के सेक्शन 69A के तहत इन ऐप्स को बैन करने का आदेश जारी किया था।

इन 59 ऐप्स में से चीनी शॉर्ट वीडियो मेकिंग ऐप TikTok को सबसे पहले Google Play Store से हटाया गया। इसके बाद Google Play Store ने इन ऐप्स के डेवलपर्स को नोटिफाइड करके इनके एक्सेस को ब्लॉक कर दिया, जिसकी वजह से ये ऐप्स प्ले स्टोर से रिमूव हो गए और यूजर्स को सर्च करने के बाद नहीं दिख रहे हैं। Apple App Store पर भी इन ऐप्स को पूरी तरह से रिमूव कर लिया गया। Apple ने भी इन ऐप्स के एक्सेस को रिमूव कर दिया जिसकी वजह से ये ऐप्स भारत में दिखने बंद हो गए।

Google Play Store हो या Apple Store, हर ऐप स्टोर रीजन स्पेसिफिक काम करते हैं। अगर, कोई ऐप भारत में बैन होता है तो यूजर्स केवल उसी रीजन में ऐप स्टोर पर ये ऐप्स नहीं दिखेंगे। हालांकि, इसके लिए ऐप स्टोर को इन ऐप्स को अपने प्लेटफॉर्म से रिमूव करना होता है। पहले भी TikTok को भारत में कुछ समय के लिए बैन किया गया था, जिसके बाद इसे ऐप स्टोर से रिमूव कर लिया गया था, लेकिन जैसे ही ऐप पर से बैन हटा तो फिर से ये ऐप स्टोर पर दिखने लगा। ऐसा ही कुछ PUBG के साथ हुआ है। पिछले साल PUBG को मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के बाद बैन कर दिया गया था। बैन होने के बाद इसके सर्वर भारत में ऐप स्टोर से रिमूव कर लिया गया था, जिसे बाद में बैन हटने के बाद दोबारा से वापस लिस्ट किया गया था।

किस तरह काम करते हैं ऐप्स?

अब आप सोच रहे होंगे कि Google Play Store या Apple App Store पर किसी भी ऐप को हटाना और फिर से वापस लाने की प्रक्रिया कैसे पूरी होती होगी? आपको बता दें कि Android हो या iOS, कोई भी ऑपरेटिंग सिस्टम ऐप डेवलपर्स को API (एप्लीकेशन प्रोग्राम इंटरफेस) प्रदान करता है। जिसका इस्तेमाल करके डेवलपर्स अपने ऐप को उस ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए तैयार करता है। Android या iOS का हर साल नया वर्जन आता है। आपरेटिंग सिस्टम के नए वर्जन को रोल आउट करने से पहले इसके बीटा बिल्ड API को ऐप डेवलपर्स के लिए रोल आउट किया जाता है। ऐप डेवलपर्स नए ऑपरेटिंग सिस्टम के API को ध्यान में रखकर अपने ऐप में बदलाव लाते हैं, ताकि नए ऑपरेटिंग सिस्टम को स्मार्टफोन्स के लिए रोल आउट करने के बाद भी ऐप्स सही से काम कर सके।

क्या है API?

API एक प्रोग्राम इंटरफेस होता है जो कि GUI (ग्राफिकल यूजर इंटरफेस) कंपोनेंट का इस्तेमाल करता है। Google और Apple का API काफी अच्छा है, जिसकी वजह से ऐप डेवलपर्स को इन ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए ऐप डेवलप करने में आसानी होती है। ऐप डेवलपर्स किसी भी प्लेटफॉर्म के लिए ऐप डेवलप करने के लिए API के हिसाब से ब्लॉक्स को बिल्ड करते हैं, जिसके लिए हर ब्लॉक्स को एक साथ लाया जाता है। साधारण भाषा में किसी भी ऐप को डेवलप करने के लिए API एक बेस होता है।

बिना API एक्सेस के ऐप नहीं करते हैं काम

Google Play Store या Apple App Store पर अगर कोई ऐप लिस्ट होता है तो उसके लिए ऐप डेवलपर्स इनके API को एक्सेस करते हैं। जब किसी ऐप को किसी रीजन (क्षेत्र या देश) में बैन किया जाता है तो ऐप स्टोर उस ऐप के API के जरिए दिए जाने वाले एक्सेस को उस नियत रीजन में ब्लॉक कर देते हैं, जिसके बाद वह ऐप उस रीजन में काम नहीं करता है। अगर किसी यूजर के फोन में वो ऐप इंस्टॉल होगा तब भी वो काम नहीं करेगा, क्योंकि ऐप को उस रीजन में API के जरिए दिए जाने वाले एक्सेस को ब्लॉक कर दिया जाता है।

ऐप स्टोर पर जितने ऐप्स उपलब्ध होते हैं, उसकी लिस्ट उस ऐप स्टोर के पास रीजन के हिसाब से मौजूद होती है। जैसे ही किसी ऐप पर किसी रीजन (क्षेत्र या देश) में बैन लगता है तो उस रीजन की लिस्ट में से उस ऐप को हटा लिया जाता है। जिसकी वजह से ऐप उस रीजन में ऐप स्टोर पर अनलिस्टेड हो जाती है। वहीं, जिस रीजन में वो ऐप अनलिस्टेड नहीं है वहां पर उस ऐप को यूजर्स डाउनलोड, इंस्टॉल और इस्तेमाल कर सकते हैं, क्योंकि उस रीजन में ऐप को API के जरिए मिलने वाली जरूरी एक्सेस जारी रहती है। ठीक उसी तरह बैन हटने के बाद ऐप को API का एक्सेस उस नियत क्षेत्र या देश में मिल जाता है। जिसके बाद वह ऐप उस क्षेत्र या देश में दोबारा काम करने लगता है।

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