Main Gate Vastu: कहां और कैसा होना चाहिए घर का मेन गेट, इन 5 वास्तु टिप्स का रखें ख्याल

मुख्य द्वार के लिए चारों दिशाओं को 32 बराबर भागों में विभाजित किया गया है।
Publish Date:Tue, 20 Oct 2020 12:16 PM (IST) Author: Kartikey Tiwari

Main Gate Vastu: घर का मुख्य द्वार वो स्थान होता है, जहां से सिर्फ आप ही प्रवेश नहीं करते हैं, बल्कि यह स्थान प्राकृतिक ऊर्जा के लिए भी आपके घर में प्रवेश का प्रमुख स्थान होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस मुख्य द्वार की अवस्थिति, इसका आकार-प्रकार और इसके आसपास निर्मित व स्थित चीजें आपके जीवन के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को प्रभावित करती हैं। आपके घर में प्राकृतिक ऊर्जा का प्रवेश उचित स्थान से हो, इसके लिए आवश्यक है कि यहां बताई गई सभी बातों को वास्तु के नियमों और सिद्धांतों के अनुसार पालन किया जाएं। तो आइये जानते हैं वास्तुकार संजय कुड़ी से कि मुख्य द्वार के लिए वास्तु शास्त्र के नियम क्या कहते हैं-

मुख्य द्वार के लिए दिशाएं

मुख्य द्वार के निर्माण के लिए वास्तु में चारों दिशाओं को कुल 32 बराबर पदों या भागों में विभाजित किया गया है। यानी प्रत्येक दिशा में 8 संभावित भाग होते हैं, जहां पर मुख्य द्वार का निर्माण किया जा सकता है, लेकिन इनमें 8 पदों में से केवल कुछ ही ऐसे होते हैं जो शुभ परिणाम प्रदान करते हैं। जैसे कि उत्तर दिशा में तीसरे पद (मुख्य), चौथे पद (भल्लाट) या पांचवें पद (सोम) में बना मुख्य द्वार आर्थिक लाभ पहुंचाने के साथ ही एक बेहतर जीवन के लिए मार्ग प्रशस्त करता है। इसी प्रकार पूर्व, पश्चिम और दक्षिण दिशाओं में स्थित तीसरे और चौथे पद पर भी मुख्य द्वार बनाया जा सकता है|

ध्यान में रखने योग्य बातें:

1- मुख्य द्वार के ठीक सामने किसी प्रकार का अवरोध नहीं होना चाहिए। इसके बिलकुल सामने किसी वृक्ष की उपस्थिति, कोई गड्ढा, बिजली का खम्भा इत्यादि द्वार वेध का कारण बनते हैं, जो कि घर के निवासियों की प्रगति में बाधा डालते हैं।

2- द्वार की ऊंचाई जरुरत से अधिक न रखें। सामन्यतया इसकी ऊंचाई घर के कंपाउंड वॉल के बराबर या उससे कम होनी चाहिए।

3- इसकी चौड़ाई इतनी कम नहीं होनी चाहिए कि प्रवेश करते वक्त असुविधा महसूस हो। प्राकृतिक ऊर्जा के लिए यह घर में प्रवेश करने का स्थान है और अगर यही संकरा होता है तो इससे घर में ऊर्जा के प्रवाह पर नकारात्मक असर पड़ता है।

4- वास्तु शास्त्र के अनुसार, कुछ दिशाएं मुख्य प्रवेश द्वार के निर्माण के लिए बेहद प्रतिकूल होती हैं। इनमें प्रमुखतया दक्षिण-पश्चिम दिशा ऐसी है, जिसमे बनाया गया द्वार धन, स्वास्थ्य और आपके रिश्तों पर बेहद नकारात्मक प्रभाव डालता है। अतः इस दिशा में किसी भी स्थिति में मुख्य द्वार का निर्माण न करें।

5- जिस दिशा में मुख्य द्वार स्थित है, उसी दिशा के अनुसार इसका रंग भी निर्धारित किया जा सकता है। किसी प्रकार के अनिर्णय की स्थिति में आप इस पर ऑफ-वाइट या क्रीम कलर भी करवा सकते हैं।

डिसक्लेमर

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