Laxmi Ji Ka Vaas: कैसे लोगों के घर में निवास करती हैं माता लक्ष्मी? इस कथा से जानें

Laxmi Ji Ka Vaas आज शरद पूर्णिमा का दिन है। आज शरद पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। आज हम आपको बता रहे हैं कि माता लक्ष्मी किस प्रकार के घर में निवास करती हैं। इसका जवाब जानने के लिए पढ़ें यह ​कथा।

Kartikey TiwariPublish:Fri, 30 Oct 2020 12:18 PM (IST) Updated:Fri, 30 Oct 2020 12:21 PM (IST)
Laxmi Ji Ka Vaas: कैसे लोगों के घर में निवास करती हैं माता लक्ष्मी? इस कथा से जानें
Laxmi Ji Ka Vaas: कैसे लोगों के घर में निवास करती हैं माता लक्ष्मी? इस कथा से जानें

Laxmi Ji Ka Vaas: आज शरद पूर्णिमा का दिन है। आज शरद पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा के दिन ही माता लक्ष्मी का अवतरण हुआ था। शरद पूर्णिमा आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को होता है। आज शरद पूर्णिमा के दिन रात्रि में ही कोई माता लक्ष्मी को अपनी भक्ति से प्रसन्न कर लेना चाहता है ताकि उसके जीवन में सुख, समृद्धि तथा प्रेम की कमी न रहे। ऐसे में आज हम आपको बता रहे हैं कि माता लक्ष्मी किस प्रकार के घर में निवास करती हैं। इसका जवाब जानने के लिए पढ़ें यह ​कथा।

एक समय की बात है। एक नगर में एक सेठ अपने पूरे परिवार के साथ निवास करता था। एक रात उसके स्वप्न में माता लक्ष्मी जी प्रकट हुईं। उन्होंने सेठ से कहा कि तुमने जो भी पुण्य कर्म किए थे, उसका प्रभाव अब खत्म होने वाला है। ऐसे में अब वह तुम्हारे घर से जल्द ही चली जाएंगी। यदि तुम कुछ मांगना चाहते हो, तो मांग लो। सेठ ने लक्ष्मी माता से कहा कि वह सुबह में घरवालों से बात करेगा, फिर आपको अपनी इच्छा के बारे में बता दूंगा।

थोड़े देर बाद सेठ की नींद खुली, तो सवेरा हो चुका था। उसने अपने स्वप्न के बारे में घर के सभी सदस्यों को बताया। किसी ने माता लक्ष्मी से हीरे, मोती, सोना, चांदी मांगने को कहा, तो किसी ने सुख तथा समृद्धि। सबसे अंत में सेठ की छोटी बहू ने कहा कि पिता जी, जब माता लक्ष्मी जी को चले ही जाना है, तो फिर उनकी दी हुई वस्तुएं कितने दिनों तक रह पाएंगी। यह वस्तुएं एक न एक दिन तो खत्म हो जाएंगी।

बहू ने सेठ को सुझाव दिया कि आप माता लक्ष्मी से यह कहें कि आप भले ही जाएं, लेकिन परिवार में प्रेम रहे। सबमें आपसी सौहार्द बना रहे। संकट कै समय में भी सब एक दूसरे का साथ दें, ताकि वह समय आसानी से बीत जाए। सेठ जी ​को यह सलाह अच्छी लगी।

अगले दिन रात्रि में माता लक्ष्मी फिर से सेठ जी के सपने में आईं। उन्होंने फिर सेठ से उसकी इच्छा पूछी। तब सेठ ने कहा कि माता! आप जाना चाहती हैं, तो आपको कौन रोक सकता है, लेकिन उसके परिवार में सदा ही प्रेम और आपसी सौहार्द बना रहे। एक दूसरे की मदद की भावना रहे। संकट में सभी साथ रहें और वह पल भी आसानी से कट जाए।

माता लक्ष्मी सेठ की बात सुनकर प्रसन्न हुईं। उन्होंने कहा कि सेठ! तुम्हारी बातों ने मुझे बांध लिया है। जिस घर या परिवार के सदस्यों में आपसी प्रेम तथा भाईचारा रहेगा, उस स्थान से वह कैसे जा सकती हैं। इस प्रकार माता लक्ष्मी ने संदेश दिया कि जिन परिवारों में आपसी प्रेम, प्रसन्नता, भाईचारा बना रहता है, संकट में सब साथ होते हैं, वहीं पर वह वास करती हैं।