Anant Sutra: जानिए, अनंत चतुर्दशी पर अनंत सूत्र बांधने की विधि और इसका महात्म

Anant Sutra अनंत चतुर्दशी 19 सितंबर दिन रविवार को पड़ रही है। अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप का पूजन किया जाता है। इस दिन पूजन के बाद अनंत सूत्र बांधने का विधान है। आइए जानते हैं अनंत सूत्र को बांधने की विधि और इसका महात्म...

Jeetesh KumarSat, 18 Sep 2021 02:00 PM (IST)
जानिए, अनंत चतुर्दशी पर अनंत सूत्र बांधने की विधि और इसका महात्म

Anant Sutra: हिंदी पंचांग के अनुसार साल में चतुर्दशी की तिथि चौबीस बार आती है। इसमें से कृष्ण चतुर्दशी, नरक चतुर्दशी एवं अनंत चतुर्दशी का विशेष महत्व है। अनंत चतुर्दशी का पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस साल अनंत चतुर्दशी 19 सितंबर, दिन रविवार को पड़ रही है। अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप का पूजन किया जाता है। भगवान विष्णु के शेष अंश, शेषनाग को अनंत भी कहा जाता है। इस दिन अनंत नाग के पूजन के बाद अनंत सूत्र हाथ में बांधने का विधान है। आइए जानते हैं अनंत सूत्र को बांधने की विधि और इसका महात्म...

अनंत सूत्र को बांधने की विधि

अनंत चतुर्दशी के दिन विधि पूर्वक भगवान विष्णु के अनंत रूप का पूजन करने के बाद अनंत सूत्र बांधने का विधान है। अनंत सूत्र या अनंता सूत या रेशम की डोरी से बनाया जाता है। इसे हल्दी या केसर से रंग कर, इसमें चौदह गांठ लगाई जाती है। प्रत्येक गांठ लगाने पर भगवान विष्णु के इन नामों का स्मरण करना चाहिए। पहले में अनंत,उसके बाद ऋषिकेश, पद्मनाभ, माधव, बैकुण्ठ, श्रीधर, त्रिविक्रम, मधुसूदन, वामन, केशव, नारायण, दामोदर और गोविन्द। अनंत सूत्र की चौदह गांठे श्री हरि द्वारा बनाये गए चौदह लोकों का प्रतीक हैं। अनंत सूत्र को पूजन के बाद कच्चे दूध में डुबो कर हाथ पर बांधा जाता है। पुरूषों को इसे दांये हाथ पर व महिलाओं को बांए हाथ पर बांधना चाहिए। अनंत सूत्र बांधते समय ऊँ अनंताय नम: मंत्र का जाप करना चाहिए।

अनंत सूत्र का महात्म

अनंत चतुर्दशी और इस दिन अनंत सूत्र बांधने के महात्म का वर्णन अग्नि पुराण और महाभारत में मिलता है। अनंत सूत्र को अनंत जीवन का प्रतीक माना जाता है, मान्यता है कि इसको बांधने से दीर्ध आयु, निरोगी काया की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही अनंता को जीवन के समस्त दुखों और पापों का नाश करने वाला माना जाता है। महाभारत में स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने पांडवों को जुए में हारा हुआ राजपाट पुनः प्राप्त करने के लिए अनंत चतुर्दशी का व्रत रखने को कहा था। अनंत सूत्र बांधने के बाद चौदह दिनों तक तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। ऐसा करने से श्री हरि की अनंत कृपा की प्राप्ति होती है।

डिसक्लेमर

'इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।'

 

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