Kundali Yog: कुंडली में इस योग से व्यक्ति बन सकता है टीचर, जानें और भी महत्वपूर्ण बातें

जन्म कुंडली में गुरु आपके विद्यावान होने के कारक ग्रह होते हैं।
Publish Date:Tue, 22 Sep 2020 01:30 PM (IST) Author: Kartikey Tiwari

Kundali Yog: जन्म कुंडली में गुरु आपके विद्यावान होने के कारक ग्रह होते हैं। बुध बुद्धि के दाता भी माने जाते हैं। कुंडली में इन दोनों ग्रहों की शुभ स्थिति तथा इनका लग्न, धन, विद्या, रोग, सेवा, कर्म, लाभ स्थान से किसी भी प्रकार युति, दृष्टि संबंध स्थापित होने पर व्यक्ति को अध्यापन के क्षेत्र में सफलता प्राप्त हो सकती है। आइए ज्योतिषाचार्या साक्षी शर्मा से जानते है ऐसे योगों के बारे में, जिनसे आपके अध्यापक बनने की संभावनाओं का पता चलता है।

1. यदि लग्न कुंडली के अतिरिक्त नवमांश, दशमांश, चतुर्विंशांश कुंडली में भी गुरु तथा बुध का युति तथा दृष्टि संबंध बने, तो व्यक्ति अध्यापन क्षेत्र में समृद्धि, संपत्ति अर्जित कर सकता है।

2. धन स्थान, सेवा स्थान, कर्म स्थान को अर्थ स्थान की संज्ञा दी गई है। इन स्थानों व इनके स्वामियों का संबंध गुरु से बनने पर व्यक्ति अध्यापन क्षेत्र द्वारा धन अर्जित करता है। यदि इस योग में गुरु का संबंध सूर्य से बने तो व्यक्ति सरकारी सेवा से लाभ अर्जित करता है।

3. गुरु तथा बुध के मध्य स्थान परिवर्तन योग बनने पर सफलता प्राप्त करने की संभावना होती है। यह योग धन, पंचम, दशम व लाभ भाव के मध्य बनने पर अच्छी सफलता प्राप्त होती है और व्यक्ति संपत्ति तथा समृद्धि अर्जित करता है।

4. गुरु व बुध की केंद्र में स्थिति, दोनों का एक दूसरे से युति व दृष्टि संबंध इस क्षेत्र में सफलता प्रदान कर सकता है।

5. लग्न तथा चंद्र कुंडली से लग्नेश, पंचमेश, दशमेश का संबंध गुरु तथा बुध से बनने पर अध्यापन क्षेत्र द्वारा जीविका अर्जन हो सकता है।

6. यदि दशमेश के नवमांश का अधिपति गुरु हो, तो व्यक्ति गुरु के क्षेत्र अध्यापन द्वारा जीविका प्राप्त कर सकता है।

7. यदि कुंडली में गजकेसरी योग उपस्थित हो तथा उसका संबंध धन, पंचम, दशम स्थान से बन रहा हो।

8. लग्न कुंडली, नवमांश कुंडली, दशमांश कुंडली में गुरु व बुध का दृष्टि व युति संबंध बनने पर अध्यापन क्षेत्र में अच्छी सफलता मिल सकती है।

9. सूर्य का धन स्थान, पंचम, सेवा, कर्म में गुरु व बुध से संबंध सरकारी सेवा प्राप्त करने में सफलता प्रदान कर सकता है।

डिस्क्लेमर-

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