बुधवार को करें ये 10 उपाय, भक्तों पर बनी रहती है गणपति बप्पा की कृपा

बुधवार को करें ये 10 उपाय, भक्तों पर बनी रहती है गणपति बप्पा की कृपा

जिस तरह से हर भगवान को कोई न कोई दिन समर्पित है ठीक उसी तरह गणेश जी को बुधवार का दिन समर्पित है। बुधवार के दिन गणेश जी की पूजा करने से व्यक्ति को कुछ लाभों की प्राप्ति होती है। तो आइए जानते हैं इन 10 लाभों के बारे में।

Shilpa SrivastavaWed, 28 Apr 2021 10:00 AM (IST)

जिस तरह से हर भगवान को कोई न कोई दिन समर्पित है ठीक उसी तरह गणेश जी को बुधवार का दिन समर्पित है। बुधवार को गणपति बप्पा की पूरे विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है। आज के दिन इनकी पूजा करने से भगवान की कृपा व्यक्ति पर बनी रहती है। बुधवार के दिन गणेश जी की पूजा करने से व्यक्ति को कुछ लाभों की प्राप्ति होती है। तो आइए जानते हैं इन 10 लाभों के बारे में।

1. बुधवार का दिन बुद्धि प्राप्ति का दिन माना जाता है। ऐसे में इस दिन अगर कमजोर मष्तिक वाले व्यक्ति उपवास करते हैं तो उन्हें बुद्धि की प्राप्ति होती है।

2. इस दिन अगर गणपति बप्पा की पूजा की जाए तो शनि समेत सभी ग्रहदोष दूर हो जाते हैं।

3. अगर हर बुधवार गणेश जी की पूजा की जाए तो व्यक्ति का सुख-सौभाग्य बढ़ता है। साथ ही जीवन की रुकावटें भी दूर हो जाती हैं।

4. इस दिन अगर सफेद रंग के गणपति बप्पा की स्थापना की जाए तो हर तरह की तंत्र शक्ति का निवारण होता है।

5. गृह कलेश के निवारण के लिए बुधवार के दिन दूर्वा के गणेशजी की प्रतिकात्मक प्रतिमा बनाएं और इसे घर के पूजा स्थल पर स्थापित करें। साथ ही इसकी पूजा भी करें।

6. श्री गणेश को घी और गुड़ का भोग लगाएं। फिर इसी घी और गुड़ को गाय को खिला दें। ऐसा करने से आर्थिक समस्याएं दूर हो जाती हैं।

7. गणेश जी या दुर्गा मां के मंदिर के बाहर अगर कोई लड़की बैठी है तो उसे साबुत बादाम देना चाहिए। ऐसा करने से घर की बीमारियां दूर हो जाती हैं।

8. बुधवार के दिन धन का लेन-देन नहीं किया जाना चाहिए। इस दिन जमा किए गए धन में बरकत रहती है।

9. अगर आपका कोई काम बन नहीं रहा है तो निम्न मंत्र का जाप न्यूनतम 21 बार करें-

त्रयीमयायाखिलबुद्धिदात्रे बुद्धिप्रदीपाय सुराधिपाय।

नित्याय सत्याय च नित्यबुद्धि नित्यं निरीहाय नमोस्तु नित्यम्।

10. ग्रह दोष और शत्रुओं से बचाव के लिए निम्न मंत्र का जाप न्यूनतम 11 बार करना चाहिए।

गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:।

नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक:।।

धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:।

गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम्।।

डिसक्लेमर

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