Vivah Panchami 2021: आज विवाह पंचमी के दिन करें इन मंत्रों से पूजन

Vivah Panchami 2021 विवाह-पंचमी के दिन सच्ची श्रद्धाभाव से माता सीता और भगवान श्रीराम की पूजा उपासना करने से व्रती की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। विवाहितों के सौभाग्य में वृद्धि होती है और अविवाहितों को मनचाहा जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।

Umanath SinghWed, 08 Dec 2021 10:49 AM (IST)
Vivah Panchami 2021: आज विवाह पंचमी के दिन करें इन मंत्रों से पूजन

Vivah Panchami 2021: आज विवाह पंचमी है। यह हर वर्ष मार्गशीर्ष महीने में शुक्ल पक्ष की पंचमी को विवाह पंचमी मनाई जाती है। आज के दिन सीता स्वंयवर और मर्यादा पुरषोत्तम भगवान श्रीराम का विवाह हुआ था। अतः हर वर्ष मार्गशीर्ष महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी को शादी सालगिरह मनाया जाता है। विवाह-पंचमी के दिन सच्ची श्रद्धाभाव से माता सीता और भगवान श्रीराम की पूजा उपासना करने से व्रती की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। विवाहितों के सौभाग्य में वृद्धि होती है और अविवाहितों को मनचाहा जीवनसाथी की प्राप्ति होती है। साथ ही इन मंत्रों का जाप जरूर करें-

प्रभु के स्मरण हेतु-

|| श्री राम जय राम जय जय राम ||

मनोकामना पूर्ति हेतु-

|| श्री रामचन्द्राय नमः ||

विपत्ति में रक्षा हेतु-

|| राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे।

सहस्त्र नाम तत्तुन्यं राम नाम वरानने ||

मुक्ति और प्रभु प्रेम हेतु-

|| नाम पाहरु दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट ||

|| लोचन निजपद जंत्रित जाहि प्राण केहि बाट|

सर्वार्थसिद्धि श्री राम ध्यान मंत्र-

ॐ आपदामप हर्तारम दातारं सर्व सम्पदाम,

लोकाभिरामं श्री रामं भूयो भूयो नामाम्यहम !

श्री रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय

वेधसे रघुनाथाय नाथाय सीताया पतये नमः!

संकट में सहायता हेतु-

लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्।

कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये॥

आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्।

लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम्।।

ग्रह क्लेश निवारण और सुख संपत्ति दायक-

हे रामा पुरुषोत्तमा नरहरे नारायणा केशवा।

गोविन्दा गरुड़ध्वजा गुणनिधे दामोदरा माधवा॥

हे कृष्ण कमलापते यदुपते सीतापते श्रीपते।

बैकुण्ठाधिपते चराचरपते लक्ष्मीपते पाहिमाम्॥

सफलता के लिए-

" ॐ राम ॐ राम ॐ राम

ह्रीं राम ह्रीं राम श्रीं राम श्रीं राम-क्लीं राम क्लीं राम।

फ़ट् राम फ़ट् रामाय नमः।

श्री जानकी स्तुति:

जानकि त्वां नमस्यामि सर्वपापप्रणाशिनीम्।

जानकि त्वां नमस्यामि सर्वपापप्रणाशिनीम्।।

दारिद्र्यरणसंहर्त्रीं भक्तानाभिष्टदायिनीम्।

विदेहराजतनयां राघवानन्दकारिणीम्।।

भूमेर्दुहितरं विद्यां नमामि प्रकृतिं शिवाम्।

पौलस्त्यैश्वर्यसंहत्रीं भक्ताभीष्टां सरस्वतीम्।।

पतिव्रताधुरीणां त्वां नमामि जनकात्मजाम्।

अनुग्रहपरामृद्धिमनघां हरिवल्लभाम्।।

आत्मविद्यां त्रयीरूपामुमारूपां नमाम्यहम्।

प्रसादाभिमुखीं लक्ष्मीं क्षीराब्धितनयां शुभाम्।।

नमामि चन्द्रभगिनीं सीतां सर्वाङ्गसुन्दरीम्।

नमामि धर्मनिलयां करुणां वेदमातरम्।।

पद्मालयां पद्महस्तां विष्णुवक्ष:स्थलालयाम्।

नमामि चन्द्रनिलयां सीतां चन्द्रनिभाननाम्।।

आह्लादरूपिणीं सिद्धिं शिवां शिवकरीं सतीम्।

नमामि विश्वजननीं रामचन्द्रेष्टवल्लभाम्।

सीतां सर्वानवद्याङ्गीं भजामि सततं हृदा।।

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