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Varuthini Ekadashi Vrat Katha: आज वरुथिनी एकादशी के दिन पढ़ें ​यह व्रत कथा, मिलेगा पुण्य लाभ

Varuthini Ekadashi Vrat Katha: वरुथिनी एकादशी के दिन पढ़ें ​यह व्रत कथा, मिलेगा पुण्य लाभ

Varuthini Ekadashi Vrat Katha वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को वरुथिनी एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और वरुथिनी एकादशी व्रत की कथा का श्रवण किया जाता है।

Kartikey TiwariWed, 05 May 2021 10:30 AM (IST)

Varuthini Ekadashi Vrat Katha: वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को वरुथिनी एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस वर्ष वरुथिनी एकादशी का व्रत 07 मई दिन शुक्रवार को है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और वरुथिनी एकादशी व्रत की कथा का श्रवण किया जाता है। व्रत करने के साथ कथा का श्रवण करने से व्यक्ति को पूण्य लाभ मिलता है। जागरण अध्यात्म में आज हम जानते हैं वरुथिनी एकादशी के व्रत की कथा के बारे में।

वरुथिनी एकादशी व्रत की कथा

एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान ​श्रीकृष्ण से कहा कि आप वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी के महत्व के बारे में बताएं और इस व्रत की कथा क्या है, इसके बारे में भी सुनाएं। तब भगवान श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर को वरुथिनी एकादशी व्रत की कथा के बारे में बताया।

प्राचीन काल में मान्धाता नाम का एक राजा था, जो नर्मदा नदी के तट पर राज्य करता था। वह एक तपस्वी तथा दानशील राजा था। एक दिन वह जंगल में तपस्या करने के लिए चला गया। वह जंगल में एक स्थान पर तपस्या करने लगा, तभी वहां एक भालू आया। वह राजा मान्धाता के पैर को चबाने लगा, लेकिन राजा तपस्या में लीन रहा। भालू राजा को घसीटने लगा और जंगल के अंदर लेकर चला गया।

भालू के इस व्यवहार से राजा बहुत डर गया था। उसने मन ही मन भगवान विष्णु से रक्षा की प्रार्थना की। भक्त की पुकार सुनकर भगवान विष्णु वहां प्रकट हुए और भालू को मारकर राजा के प्राण बचाए। भालू ने राजा का पैर खा लिया था, इससे राजा बहुत दुखी था। तब भगवान विष्णु ने उससे कहा कि तुम दुखी मत हो। इसका एक उपाय है। तुम मथुरा में वरूथिनी एकादशी का व्रत करो, वहां पर मेरी वराह अवतार मूर्ति की आराधना करो। उस व्रत के प्रभाव से तुम ठीक हो जाओगे। तुम्हारे पुराने जन्म के पाप कर्म के कारण ही भालू ने तुम्हारा पैर खा लिया। तुम बताए गए उपाय को करो।

प्रभु की बातें सुनकर राजा ने वरूथिनी एकादशी का व्रत मथुरा में किया। वहां पर उसने वराह अवतार मूर्ति की विधि विधान से पूजा की। फलाहार करते हुए व्रत किया। वरूथिनी एकादशी व्रत के प्रभाव से राजा फिर से सुंदर शरीर वाला हो गया। मृत्यु के पश्चात उसे स्वर्ग की प्राप्ति हुई। इस प्रकार से जो भी वरूथिनी एकादशी व्रत रखता है, उसके पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष मिलता है।

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