Vakratund Sankashti Ganesh Chaturthi 2021: जानिए, वक्रतुंड संकष्टी गणेश चतुर्थी की पूजन विधि और मनोकामनापूर्ति के मंत्र

Vakratund Sankashti Ganesh Chaturthi 2021 कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस साल ये 24 अक्टूबर दिन रविवार को पड़ रही है। आइए जानते हैं इस दिन भगवान गणेश के पूजन की विधि और मंत्रों के बारे में....

Jeetesh KumarThu, 21 Oct 2021 12:52 PM (IST)
जानिए, वक्रतुंड संकष्टी गणेश चतुर्थी की पूजन विधि और मनोकामनापूर्ति के मंत्र

Vakratund Sankashti Ganesh Chaturthi 2021: हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देव माना जाता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता माना जाता है। गणेश भगवान का पूजन करने से सभी प्रकार के विघ्न और संकट दूर हो जाते हैं और शुभ-लाभ की प्राप्ति होती है। मान्यता अनुसार प्रत्येक माह की चतुर्थी तिथि भगवान गणेश के पूजन को विशेष रूप से समर्पित है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस साल ये 24 अक्टूबर, दिन रविवार को पड़ रही है। आइए जानते हैं इस दिन भगवान गणेश के पूजन की विधि और मंत्रों के बारे में....

भगवान गणेश के पूजन की विधि

वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी का पूजन कार्तिक मास की संकष्टी चतुर्थी के दिन किया जाता है। इस दिन सबस पहले स्नान आदि से निवृत्त हो कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद एक चौकी पर लाल या पीले रंग का आसन बिछा कर, भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करिए। इसके बाद धूप, दीप, रोली और अक्षत अर्पित कर भगवान गणेश का आवाहन करें। फिर गणेश जी को फूल,फल, नैवेद्य में मोदक या लड्डू चढ़ाएं। गणेश जी को पूजन में दूर्वा जरूर चढ़ाएं, लेकिन गणेश जी को भूल कर भी तुलसी नहीं चढ़ाई जाती है। इसके बाद गणेश जी के मंत्रों का जाप करना चाहिए और पूजन का अंत गणेश आरती गा कर की जाती है।

भगवान गणेश के मंत्र

वक्रतुड़ संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के इन मंत्रों का जाप करने से आपके जीवन के सभी संकटों और कष्टों का निवारण होगा और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होगी।

1. जीवन में खुशहाली का मंत्र - 'ॐ गं गणपतये नमः’

2. विघ्न निवारण मंत्र - 'ॐ वक्रतुंडाय हुं'

3. मंत्र आर्थिक लाभ का मंत्र - 'ॐ श्रीं गं सौभ्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा'

4. आलस्य, निराशा, कलह और संकट दूर करने का मंत्र - 'ॐ हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा'

5. गणेश गायत्री मंत्र - ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात।।

डिस्क्लेमर

''इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना में निहित सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्म ग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारी आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना के तहत ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।''

 

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