Navratri 2020: इस नवरात्रि घोड़े पर सवार होकर आ रही हैं मां दुर्गा, जानें उसका अर्थ

नवरात्रि में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होती है।
Publish Date:Mon, 28 Sep 2020 06:49 AM (IST) Author: Kartikey Tiwari

Navratri 2020: आज से शारदीय नवरात्रि आरंभ हो रही है। शनिवार के दिन नवरात्रि का पहला दिन होने के कारण इस दिन मां दुर्गा घोड़े की सवारी करते हुए पृथ्वी पर आएंगी। देवी भागवत पुराण के अनुसार, जब माता दुर्गा नवरात्रि पर घोड़े की सवारी करते हुए आती हैं, तब पड़ोसी से युद्ध, गृह युद्ध, आंधी-तूफान और सत्ता में उथल-पुथल जैसी गतिविधियां बढ़ने की आशंकाएं रहती हैं। ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि इस समय अधिक मास चल रहा है। अधिकमास लगने के कारण इस साल शारदीय नवरात्रि एक महीने की देरी से शुरू होगी। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष पितृपक्ष की समाप्ति के बाद अगले दिन से ही शारदीय नवरात्रि शुरू होनी चाहिए, लेकिन इस बार अधिक मास होने के कारण पितरों की विदाई के बाद नवरात्रि का त्योहार शुरू नहीं हो सकेगा।

घट स्थापना के साथ नवरात्रि का प्रारंभ

हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा आराधना की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना के साथ ही नवरात्रि शुरू हो जाती हैं। साथ ही विभिन्न पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर मां शक्ति की आराधना की जाती है। नवरात्रि पर मां दुर्गा के धरती पर आगमन का विशेष महत्व होता है।

माता के आगमन और प्रस्थान की सवारी

देवी भागवत पुराण के अनुसार, नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा का आगमन भविष्य में होने वाली घटनाओं के संकेत के रूप में भी देखा जाता है। हर वर्ष नवरात्रि में देवी दुर्गा का आगमन अलग-अलग वाहनों में सवार होकर आती हैं और उसका अलग-अलग महत्व होता है। शारदीय नवरात्रि अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक मनायी जाती है। शरद ऋतु में आगमन के कारण ही इसे शारदीय नवरात्रि कहा जाता है। ऐसे में इस बार नवरात्र 2020 का आरंभ 17 अक्टूबर से होने जा रहा है। इस बार मां दुर्गा का आगमन अश्व यानि घोड़े पर होगा जबकि देवी मां प्रस्थान हाथी पर करेंगी।

इस वर्ष देवी अश्व पर आ रही हैं। इसका अर्थ है कि जिन लोगों पर देवी की विशेष कृपा होगी, उनके अपने जीवन में अश्व की गति के सामान ही सफलता की प्राप्ति हो सकती है। नवरात्रि के दौरान पूरे मन से देवी की आराधना करें, व्रत करें एवं मां को प्रसन्न करने की हर संभव कोशिश करें।

डिसक्लेमर

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