Bilvastakam in Sawan 2021: सावन माह में करें बिल्वाष्टकं का पाठ, भगवान शिव हर लेंगे तीन जन्मों के पाप

Bilvastakam in Sawan 2021 सावन के महीने में नियमित रूप जो शिवलिंग पर जल की धार के साथ बेल पत्र अर्पित करता और बिल्वाष्टकं का पाठ करता है। भगवान शिव उसके तीन जन्मों के पाप हर लेते हैं और मृत्यु के बाद शिवलोक का आनंद प्राप्त करता है।

Jeetesh KumarThu, 29 Jul 2021 05:45 PM (IST)
सावन माह में करें बिल्वाष्टकं का पाठ, भगवान शिव हर लेंगे तीन जन्मों के पाप

Bilvastakam in Sawan 2021: बेल पत्र या बिल्व पत्र भगवान शंकर को अत्यंत प्रिय है। पौराणिक कथा के अनुसार बेल के पेड़ की उत्पत्ति माता पार्वती के पसीने बूंदों से हुई थी इसलिए ये भगवान शिव को अधिक प्रिय है। मान्यता है कि सावन के महीने में बेल का पेड़ लगाने और उसका दर्शन करने से व्यक्ति के सभी पापों का शमन हो जाता है। भगवान शिव को तीन पत्तों वाली बेल पत्र अर्पित करना सबसे शुभ माना जाता है। मान्यता है कि बेल पक्ष के तीन पत्ते त्रिनेत्रधारी भगवान शिव का रूप होते हैं। ये त्रिगुणों के प्रतीक हैं जिनसे सृष्टि का निर्माण हुआ है। बेल पत्र के मध्य भाग में सभी तीर्थ विराजमान होते हैं, भगवान शिव को बेल पत्र अर्पित करने से सारे तीर्थों की यात्रा का फल मिलता है।

बेल पत्र में संसार के समस्त दैहिक, दैविक और भौतिक तापों को हरने की क्षमता होती है। मान्यता है कि सावन के महीने में नियमित रूप जो शिवलिंग पर जल की धार के साथ बेल पत्र अर्पित करता और बिल्वाष्टकं का पाठ करता है। भगवान शिव उसके तीन जन्मों के पाप हर लेते हैं और मृत्यु के बाद वो व्यक्ति शिवगणों के साथ शिवलोक का आनंद प्राप्त करता है।

बिल्वाष्टकं ।।

त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रयायुधम् ।

त्रिजन्मपाप-संहारमेकबिल्वं शिवार्पणम्।।1।।

त्रिशाखैर्बिल्वपत्रैश्च ह्यच्छिद्रै: कोमलै: शुभै: ।

शिवपूजां करिष्यामि ह्येकबिल्वं शिवार्पणम्।।2।।

अखण्डबिल्वपत्रेण पूजिते नन्दिकेश्वरे ।

शुद्धयन्ति सर्वपापेभ्यो ह्येकबिल्वं शिवार्पणम्।।3।।

शालिग्रामशिलामेकां विप्राणां जातु अर्पयेत्।

सोमयज्ञ-महापुण्यमेकबिल्वं शिवार्पणम्।।4।।

दन्तिकोटिसहस्त्राणि वाजपेयशतानि च ।

कोटिकन्या-महादानमेकबिल्वं शिवार्पणम्।।5।।

लक्ष्म्या: स्तनत उत्पन्नं महादेवस्य च प्रियम्।

बिल्ववृक्षं प्रयच्छामि ह्येकबिल्वं शिवार्पणम्।।6।।

दर्शनं बिल्ववृक्षस्य स्पर्शनं पापनाशनम्।

अघोरपापसंहारमेकबिल्वं शिवार्पणम्।।7।।

काशीक्षेत्र निवासं च कालभैरव दर्शनम्।

प्रयागमाधवं दृष्ट्वा एक बिल्वं शिवार्पणम्।।8।।

मूलतो ब्रह्मरूपाय मध्यतो विष्णुरूपिणे ।

अग्रत: शिवरूपाय ह्येकबिल्वं शिवार्पणम्।।9।।

बिल्वाष्टकमिदं पुण्यं य: पठेच्छिवसन्निधौ।

सर्वपापविनिर्मुक्त: शिवलोकमवाप्नुयात्।।10।।

इति बिल्वाष्टकं सम्पूर्णम्।।

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