Rajasthan: राजस्थान के शिक्षामंत्री ने नियमों को दरकिनार कर कराई समधी की पद्दोन्नति

Rajasthan प्रदेश कांग्रेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा अपने समधी व चूरू जिला शिक्षा अधिकारी रमेशचंद पूनिया पर इतने मेहरबान प्रतीत हो रहे हैं कि उन्होंने अपने पद और प्रभाव में आरपीएससी जैसी संवैधानिक संस्था को भी पायदान बना दिया।

Sachin Kumar MishraWed, 28 Jul 2021 06:35 PM (IST)
समधी पर मेहरबान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के लिए आरपीएससी बनी पायदान। फाइल फोटो

जयपुर/अजमेर, जागरण टीम। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और अशोक गहलोत सरकार में शिक्षामंत्री गोविंद सिंह डोटासरा अब एक नए विवाद में घिर गए हैं। शिक्षक संगठनों ने आरोप लगाया है कि डोटासरा ने खुद के प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी पद पर कार्यरत अपने समधी को गलत तरह से पद्दोन्नत करवाया है। शिक्षकों का आरोप है कि डोटासरा ने अपने समधी रमेश चंद्र पूनिया को उप निदेशक पद पर पद्दोन्नत करवाने के लिए शिक्षा विभाग की डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी (डीपीसी) की बैठक दो दिन पहले ही करवा दिया। शिक्षामंत्री के प्रभाव के कारण शिक्षा विभाग ने 28 और 29 जुलाई को होने वाली डीपीसी की बैठक की तारीख दो दिन पहले 26 जुलाई को करने का प्रस्ताव राज्य लोकसेवा आयोग में भेजा । आयोग ने भी दो दिन पहले का समय देते हुए पूनिया को पद्दोन्नत करने की प्रक्रिया पूरी करवा दी।

शिक्षक संगठन अरस्तु के अध्यक्ष रामकृष्ण अग्रवाल का आरोप है कि पूनिया 30 सितंबर को सेवानिवृत होने वाले हैं। नियमों के अनुसार इस साल की डीपीसी में पूनिया का नंबर नहीं आ रहा था। अपने समधी को पदोन्नत करने के लिए डोटासरा ने अजमेर इंटिग्रेटेड चाइल्ड डवलपमेंट प्रोग्राम अधिकारी और बीकानेर जिला शिक्षा अधिकारी के पदों को उप निदेशक के पद में बदलवा दिया। इसके बाद डीपीसी करवा दी, िजससे पूनिया उप निदेशक बन गए। अगर एक ही पद होता तो पूनिया उप निदेशक नहीं बन सकते थे, क्योंकि उनसे वरिष्ठ एक अधिकारी को यह पद मिलता आरएएस में रिश्तेदारों का चयन कराने का भी आरोपपिछले सप्ताह डोटासरा पर अपने दो रिश्तेदारों का राज्य प्रशासनिक सेवा (आरएएस) में चयन करवाने को लेकर आरोप लगे थे। प्रशासनिक सेवा का परीक्षा परिणाम पिछले दिनों आया तो उनकी पुत्रवधू के भाई गौरव पूनिया और बहन प्रभा पूनिया का चयन हो गया। दोनों के साक्षात्कार में 80-80 नंबर आए, जबकि दोनों के लिखित परीक्षा में 50 प्रतिशत से भी कम नंबर आए थे।

साक्षात्कार में दोनों के समान नंबर आने पर भाजपा और परीक्षा देने वाले अन्य युवाओं ने विरोध दर्ज करवाया था । भाजपा के पार्षद देवेंद्र सिंह शेखावत ने इस मामले में अजमेर जिला अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-3 में इस्तगासा पेश किया था । इस पर कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई करते हुए जांच के लिए पुलिस को भेज दिया । अब इस मामले में 31 जुलाई को सुनवाई होगी। युवा मोर्चा ने डोटासरा का पुतला जलायाभाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने साक्षात्कार में कथित अनियमितता का आरोप लगाते हुए बुधवार को राज्य के विभिन्न जिलों में प्रदर्शन किया। जयपुर के सिविल लाइंस फाटक पर युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर डोटासरा का पुतला जलाया । उदयपुर में पुतला जलाने के साथ ही राज्यपाल कलराज मिश्र के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा । ज्ञापन में डोटासरा को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग की गई है। दौसा,सीकर और अलवर में भी प्रदर्शन किया गया।

समधी पर मेहरबान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के लिए आरपीएससी बनी पायदान
अजमेर, संवाद सूत्र। राजस्थान में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष और स्कूली शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा अपने समधी व चूरू जिला शिक्षा अधिकारी रमेशचंद पूनिया पर इतने मेहरबान प्रतीत हो रहे हैं कि उन्होंने अपने पद और प्रभाव में आरपीएससी जैसी संवैधानिक संस्था को भी पायदान बना दिया। अभी डोटासरा समधी के बच्चों को अपने पद और प्रभाव में आरएएस परीक्षा साक्षात्कार में 80 प्रतिशत अंक दिलवाने के आरोपों से बाहर नहीं आए कि आगामी 30 सितंबर को सेवानिवृत्त हो रहे अपने समधी को रिटायरमेंट से पहले पदोन्नत कर उपनिदेशक बनाए जाने के तमाम जतन जुगाड़ किए जाने के आरोप भी उन पर लगने गले है।

पिछले दिनों ही आरएएस के परिणाम में समधी रमेश चंद पूनिया के बेटे गौरव और बेटी प्रभा सफल घोषित हुए हैं। डोटासरा का पुत्र और पुत्रवधू का चयन आरएएस में पहले ही हो चुका है। समधी को उपनिदेशक बनवाने के लिए डोटासरा ने अजमेर स्थित इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोग्राम और बीकानेर स्थित राधा कृष्ण उच्च अध्ययन संस्थान के जिला शिक्षा अधिकारी के पद को रातों रात उपनिदेशक के स्तर का कर दिया। चूंकि डोटासरा स्कूली शिक्षा मंत्री हैं, इसलिए अपने विभाग के पद को पदोन्नत करने में कोई परेशानी नहीं हुई।

जानकार सूत्रों के अनुसार, शिक्षा विभाग में पदोन्नति के लिए राजस्थान लोक सेवा आयोग ने डीपीसी की बैठक 28 व 29 जुलाई को निर्धारित कर रखी थी, लेकिन इस बीच राज्य मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चा हुई तो डोटासरा ने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए आयोग में डीपीसी की तारीख बदलवा दी, जो बैठक 28 व 29 जुलाई को होनी थी, उसे 26 जुलाई को ही करवा दिया गया। इस बैठक के बाद समधी रमेश चंद पूनिया की पदोन्नति का रास्ता साफ हो गया है।

सूत्रों के अनुसार, डोटासरा यदि शिक्षा अधिकारी के दो पदों को पदोन्नत नहीं करते तो उनके समधी रिटायर होने से पहले उपनिदेशक नहीं बन सकते थे। अब चूंकि पदोन्नति हो रही है, इसलिए पूनिया जल्द ही उपनिदेशक बन जाएंगे। पूनिया के बेटे और बेटी का आरएएस में चयन का मामला अभी भी विवाद में है। आरएएस के इंटरव्यू के दौरान ही एसीबी ने आयोग के जूनियर अकाउंटेंट सज्जन सिंह गुर्जर को 23 लाख रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा था। गुर्जर का कहना रहा कि यह राशि आयोग की सदस्य राजकुमारी गुर्जर से इंटरव्यू में अच्छे अंक दिलवाने के लिए ली गई है। एसीबी की इतनी बड़ी कार्यवाही के बाद भी आयोग का कहना रहा कि इंटरव्यू की प्रक्रिया निष्पक्ष रही है। जब परिणाम घोषित हुआ तो एक बार फिर चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे।

डोटासरा के रिश्तेदारों के इंटरव्यू में 80 अंक प्राप्त होना कई सवाल खड़े करता है। डोटासरा के समधि की पदोन्नति के लिए डीपीसी की तारीख में बदलाव से भी प्रतीत होता है कि राजस्थान लोकसेवा आयोग के की प्रतिष्ठा अब राजनीतिक प्रभाव वाले लोगों के पास गिरवी हो चली है। जब चाहे मंत्री ओर नेता आरपीएससी को पायदान बना कर अपने रसुकात वालों को राजस्थान के भावी अफसर बना सकते हैं। डोटासरा के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद ही आयोग में पांच सदस्यों की नियुक्ति हुई। 28 जुलाई को ही आरएएस के लिए इंटरव्यू में हुई गड़बड़ियों को लेकर युवा मोर्चे के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि आरएएस के परिणाम को रद करवाकर दोबार से इंटरव्यू की प्रक्रिया की जाए।

आरपीएससी चेयरमैन से मिला प्रतिनिधिमंडल 

राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित आरएएस 2018 भर्ती परीक्षा पर उठे सवालों के मद्देनजर इस परीक्षा की जांच कराने और आगामी भर्तियों में साक्षात्कार की अनिवार्यता को खत्म करने की मांग को लेकर बीकानेर के भाजपा नेता सुरेंद्र सिंह शेखावत ने अजमेर पहुंच कर अजमेर के डिप्टी मेयर नीरज जैन के साथ लोक सेवा आयोग के चेयरमैन भूपेंद्र सिंह यादव से मुलाकात की और मांगों का ज्ञापन सौंपा। शेखावत ने बताया कि आरएएस 2018 भर्ती परीक्षा में सत्ताधारी दल के प्रदेशाध्यक्ष और शिक्षा मंत्री के निजी रिश्तेदारों को परीक्षा में अवांछित लाभ के आरोप, साक्षात्कार के दौरान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की ट्रेप कार्रवाई, आरपीएससी भर्ती से संबंधित दलालों के वाट्सएप चैट सामने आने का मामला गंभीर है

नीरज जैन ने कहा कि मुख्य परीक्षा में शामिल हुए अभ्यर्थियों के कुछ विशेष सीरीज में से चयन का आंकड़ा आश्चर्यजनक रूप से बहुत अधिक होने से आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए हैं। राज्य सेवाओं के लिए निष्पक्ष और सर्वश्रेष्ठ चयन का जिम्मा संभालने वाले आयोग की साख पर संकट आना चिंताजनक है। इसलिए आरएएस 2018 भर्ती परीक्षा की जांच कराए जाने की मांग को लेकर आयोग अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपा। साथ ही, भविष्य में होने वाली परीक्षाओं के निष्पक्ष और पारदर्शी आयोजन के लिए साक्षात्कार की अनिवार्यता खत्म करने व परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था को ठीक करने बाबत सुझावों से भी आयोग अध्यक्ष को अवगत करवाया। अध्यक्ष से मिलने गए प्रतिनिधिमंडल में युवा नेता देवेंद्र सिंह शेखावत, सीकर के विकास भास्कर, विधि महाविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रचित कच्छावा, रोहित यादव शामिल रहे।

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