नीट में फर्जीवाड़े के लिए राजस्थान की गैंग के तार यूपी और हरियाणा से जुड़े, यूपी का युवक फर्जी फोटो तैयार करता था

पुलिस की अब तक की जांच में सामने आया कि परीक्षा में 10 लाख रुपए का लालच देकर डमी फर्जी अभ्यर्थियों से परीक्षा दिलवाई जाती थी। इसके लिए उन्हे आधा पैसा परीक्षा से पहले और आधा परीक्षा के बाद दिया जाता था।

Priti JhaWed, 15 Sep 2021 12:36 PM (IST)
नीट में फर्जीवाड़े के लिए राजस्थान की गैंग के तार यूपी और हरियाणा से जुड़े

जागरण संवाददाता, जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट)का पेपर लीक होने के साथ ही मूल परीक्षार्थियों के स्थान पर डमी अभ्यर्थियों से परीक्षा दिलाने वाले गिरोह को लेकर हर दिन नया खुलासा हो रहा है। गिरोह के सदस्यों से पुलिस द्वारा की जा रही पूछताछ में सामने आया कि इनके तार उत्तरप्रदेश और हरियाणा से जुड़े हुए हैं। हालांकि अभी तक इस बात का खुलासा नहीं हो सका कि इन दोनों राज्यों के किस शहर में कौन-कौन व्यक्ति गिरोह के संपर्क में है।

इस बारे में पुलिस को गुप्‍त सूचना मिली है। पुलिस की अब तक की जांच में सामने आया कि परीक्षा में 10 लाख रुपए का लालच देकर डमी फर्जी अभ्यर्थियों से परीक्षा दिलवाई जाती थी। इसके लिए उन्हे आधा पैसा परीक्षा से पहले और आधा परीक्षा के बाद दिया जाता था।

मेडिकल कालेज में प्रवेश के लिए नीट की परीक्षा में आवेदन करने वालों से गिरोह के सदस्य पासपोर्ट साइज फोटो लेते थे और फिर उनसे मिलते-जुलते चेहरे के युवक को परीक्षा में बिठाते थे। कई बार मूल परीक्षार्थी के साथ ही डमी अभ्यर्थी की भी फोटो लेते थे और फिर दोनों फोटो को मिलाकर तकनीक से फर्जी फोटो तैयार करते थे। यह फोटो परीक्षा का फार्म भरने से पहले ही तैयार कर ली जाती थी, उसकी एक कापी फार्म पर लगाई जाती थी। फोटो के संबंध में तकनीकी काम उत्तरप्रदेश का एक युवक देखता था। इस युवक का पता लगाने के लिए पुलिस गिरफ्तार हुए 4 लोगों से पूछताछ कर रही है। यह युवक इस तरह से फोटो तैयार करता था कि जिससे किसी को संदेह नहीं हो। इसके बदले उसे आनलाइन भुगतान किया जाता था ।

सीकर से हरियाणा पहुंचा पेपर

डमी अभ्यर्थियों से परीक्षा दिलाने वाले गिरोह के सरगना डा. राकेश राजगुरु के निर्देश में फार्म भरने से लेकर परीक्षा संपन्न होने तक का काम होता था। उसका सहयोग तंजील और महेन्द्र करते थे। यह तीनों आर्थिक रूप से संपन्न परिवारों के पढ़ाई में ऐसे कमजोर बच्चों से संपर्क करते थे जो डाक्टर बनना चाहते थे । कुछ के परिजनों से भी संपर्क करते थे। प्रत्येक स्टूडेंट्स के परिजन से 25 से 30 लाख तक लेते थे।

वहीं नीट की परीक्षा में अच्छे नंबर लाने वाले युवाओं अथवा डाक्टरों से संपर्क करते थे और उन्हे 10 लाख रुपए का लालच देकर डमी अभ्यर्थी के रूप में परीक्षा देने के लिए तैयार करते थे। अजमेर के पुलिस महानरीक्षक एस.सेंगथिर के निर्देशन में नीट की परीक्षा में फर्जीवाड़ा करने वाली गैंग के बारे में जांच की जा रही है।

उधर पुलिस की जांच में सामने आया कि जयपुर के एक परीक्षा केंद्र से लीक हुआ पेपर व्हाट्सएप के जरिए सीकर के एक शिक्षक के पास पहुंचा था। उस शिक्षक ने आधा पेपर हल किया था। आधा पेपर वह हल नहीं कर सका तो व्हाट्सएप के जरिए हरियाणा भेजा गया। वहां से आधा हिस्सा हल होकर आया और फिर परीक्षार्थी तक पहुंचाया गया। इस मामले में अब तक पकड़े गए 9 लोगों से पूछताछ की जा रही है। अब तक हरियाणा के युवके बारे में पूरी जानकारी नहीं मिल सकी है। इस मामले की जांच सहायक पुलिस उपायुक्त रिचा तोमर कर रही है। 

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