पाकिस्तानी टिड्डियों के आतंक के राजस्थान के किसान परेशान

जागरण संवाददाता, जयपुर। पाकिस्तान से सटे राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर, श्रीगंगानगर और बीकानेर जिलों में टिड्डी दलों के आने का सिलसिला जारी है। करीब ढ़ाई माह से जारी पाकिस्तानी टिड्डी दलों के आतंक से राजस्थान के चार जिलों की 30 हजार हेक्टेयर से अधिक जमीन प्रभावित हुई है। टिड्डी दलों के आतंक के चलते लगातार खराब हो रही फसल ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि राज्य सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए क्लोरापाइरिफॉस रसायन की खरीद पर 50 फीसद अनुदान देने का निर्णय लिया है।

अनुदान राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंचेगी। क्लोरापाइरिफॉस रसायन टिड्डियों को मारने के काम आता है। चारों जिलों में टिड्डी नियंत्रण कक्ष स्थापित करने के साथ ही उनमें अतिरिक्त स्टाफ तैनात किया गया है। उधर, किसान अपनी फसल को बर्बाद होने से बचाने के लिए बर्तन और लोहे के पीपे बजाकर टिड्डियों को भगा रहे हैं। हालात यह है कि किसानों ने अपनी फसल को बर्बाद होने से बचाने के लिए परिवार के एक सदस्य को बर्तन और लोहे के पीपे लेकर खेत में बिठा रखा है। ये लोग दिन-रात लकड़ी के डंडे से बर्तन और पीपों को बजाते रहते हैं, ताकि आवाज सुनकर टिड्डी दल नहीं आ सके। हालांकि उनके इस प्रयास का असर कम ही होता है।

कृषि मंत्री बोले, नियंत्रण के सभी उपाय किए जा रहे 

पाक सीमा के बिल्कुल निकट सटे जैसलमेर और बाड़मेर जिलों में टिड्डियों ने काफी फसल खराब की है। बीकानेर और श्रीगंगानगर में भी इनका असर नजर आ रहा है। बीकानेर जिले में बज्जू के तहसीलदार हरि सिंह ने बताया कि टिड्डियों के आतंक से किसान परेशान हैं। प्रशासन अपने उपाय कर रहा है, लेकिन इस बार किसानों ने बर्तन बजाकर टिड्डी भगाने का नया तरीका अपनाया है। उन्होंने बताया कि नियंत्रण कक्ष में 24 घंटे कर्मचारियों को तैनात किया गया है।

कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने बताया कि चार जिलों में टिड्डी नियंत्रण के लिए एक लाख 40 हजार हेक्टेयर जमीन पर अब तक करीब एक लाख लीटर दवा छिड़की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि 100 लोगों की टीम दिन-रात निगरानी कर रही है। सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए कीटनाशक 50 फीसद छूट पर दिया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि टिड्डी एक छोटा कीट है, जो झुंड बनाकर उड़ता है। यह फसलों को निशाना बनाता है। वयस्क टिड्डी 150 किलोमीटर की गति से हवा की दिशा में उड़ते ही। इन्हें प्रतिदिन ताजा भोजन पंसद है। कृषि विभाग के अनुमान के अनुसार, एक छोटा टिड्डी दल भी प्रतिदिन 35 हजार लोगों जितना भोजन चट कर जाता है। 

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