Rajasthan Political Crisis: किरोड़ी लाल मीणा ने कहा-चार दिन दिल्ली में रहे सचिन पायलट ने किए 50 बार फोन पर राहुल व प्रियंका ने नहीं किए रिसीव

Rajasthan Political Crisis किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट दिल्ली में चार-पांच दिन रहकर आए। उन्होंने कई फोन किए लेकिन न तो कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने फोन उठाया और न ही प्रियंका गांधी ने उनसे बात की।

Sachin Kumar MishraThu, 24 Jun 2021 08:53 PM (IST)
किरोड़ी लाल मीणा ने कहा-सचिन पायलट ने 40-50 फोन किए, लेकिन राहुल और प्रियंका ने नहीं उठाए। फाइल फोटो

जयपुर, जागरण संवाददाता। भाजपा के राज्यसभा सदस्य डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा राजस्थान कांग्रेस के आंतरिक विवाद में कूद गए हैं। उन्होंने एक बयान में कहा कि पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट दिल्ली में चार-पांच दिन रहकर आए। उन्होंने कई फोन किए, लेकिन न तो कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने फोन उठाया और न ही प्रियंका गांधी ने उनसे बात की। उन्होंने कहा कि सचिन पायलट ने दोनों को 40-50 फोन किए, लेकिन दोनों ने ही उन्हें प्राथमिकता नहीं दी। उन्होंने कहा कि अशोक गहलोत सरकार आम लोगों को राहत पहुंचाने में नाकाम साबित हुई है। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में राजस्थान में भाजपा की सरकार बनेगी। 

गौरतलब है कि राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के खेमों में बंटी कांग्रेस में एकजुट होने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। करीब 10 माह पुराने वादे को पूरा करने को लेकर आलाकमान पर दबाव बनाने की रणनीति के तहत दिल्ली पहुंचे पायलट की पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी व महासचिव प्रियंका गांधी से मुलाकात नहीं हो सकी। उधर, पिछले साल जब पायलट ने बगावत की थी, उस दौरान जो विधायक उनके साथ थे, वह अब गहलोत के गुणगान करते नजर आ रहे हैं। बसपा से कांग्रेस में आए विधायक तो पायलट व उनके खेमे के विधायकों को गद्दार बता रहे हैं। हालांकि, इस पर पायलट खेमे ने पलटवार कर उनको आईना दिखाया है।

कुछ दिनों पहले जितिन प्रसाद के पार्टी छोड़कर भाजपा में जाने के बाद सचिन पायलट खेमा फिर सक्रिय हो गया था। दबाव बनाने के लिए पायलट दिल्ली पहुंच गए थे। रणनीति के तहत उनकी पार्टी आलाकमान से मिलने की तैयारी थी, लेकिन उनकी राहुल व प्रियंका दोनों से मुलाकात नहीं हो सकी। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने समय नहीं दिया या फिर कोई और वजह से मुलाकात नहीं हो सकी, इसको लेकर जानकारी नहीं हो सकी। हालांकि, इस बीच राजस्थान में तेजी से घटनाक्रम बदला। पहले दबाव में नजर आ रहे गहलोत ने पायलट खेमे के कुछ विधायकों को अपने पाले में लिया है।

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