Land Jihad: राजस्थान विधानसभा में गूंजा जमीन जिहाद का मुद्दा

Land Jihad विधायक कन्हैयालाल ने कहा कि मालपुरा में जमीन जिहाद के कारण हालात खराब हो चुके हैं। समुदाय विशेष के लोग हिंदू परिवारों को प्रताड़ित कर रहे हैं। बहन-बेटियों की तरफ अश्लील इशारे करते हैं। हिंदुओं के घरों में हड्डियां फेंकी जाती हैं।

Sachin Kumar MishraFri, 17 Sep 2021 06:27 PM (IST)
राजस्थान विधानसभा में गूंजा जमीन जिहाद का मुद्दा। फाइल फोटो

जागरण संवाददाता, जयपुर। राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को शून्यकाल के दौरान भाजपा ने जमीन जिहाद का मुद्दा उठाया। भाजपा विधायकों ने कहा कि टोंक जिले का मालपुरा अति संवेदनशील कस्बा है। यहां 1950 से लेकर अब तक हुए सांप्रदायिक दंगों में 100 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। मालपुरा में समुदाय विशेष के लोगों ने जमीन जिहाद चला रखा है। इसके तहत हिंदुओं की जमीन महंगे दामों में खरीदी जाती है और फिर आसपास के लोगों को परेशान किया जाता है। विधायक कन्हैयालाल ने कहा कि मालपुरा में जमीन जिहाद के कारण हालात खराब हो चुके हैं। समुदाय विशेष के लोग हिंदू परिवारों को प्रताड़ित कर रहे हैं। बहन-बेटियों की तरफ अश्लील इशारे करते हैं। हिंदुओं के घरों में हड्डियां फेंकी जाती हैं। मालपुरा में अब तक 600 से ज्यादा हिंदू परिवारों का पलायन हो चुका है। पिछले दिनों प्रताड़ित हिंदुओं ने उपखंड अधिकारी को ज्ञापन देकर जमीन जिहाद रोकने की मांग की है। सरकार को इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए, नहीं तो वहां हालात विस्फोटक हो जाएंगे। उल्लेखनीय है कि मालपुरा में हिंदू परिवारों के पलायन का मुद्दा भाजपा पहले भी उठा चुकी है। स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया तो उसके बाद भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की एक टीम मालपुरा का दौरा कर के आई थी।

गौरतलब है कि राजस्थान विधानसभा में बुधवार को पहले तो सत्तापक्ष कांग्रेस और भाजपा विधायकों के बीच तकरार हो गई थी। तकरार हंगामें में बदली। इन दोनों का हंगामा शांत हुआ था कि संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल और विधानसभा अध्यक्ष डा. सीपी जोशी के बीच तकरार हो गई। तकरार इतनी बढ़ी कि अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। दरअसल, रोडवेज से जुड़े एक विधेयक पर चर्चा के दौरान प्रतिपक्ष के नेता गुलाब चंद कटारिया और परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास के बीच हुए वाद-विवाद के बाद सदन में शांति हुई तो अध्यक्ष ने कहा कि पहले जो कुछ हुआ उसे भूलिए और आगे बढ़िए। विधेयक पारित होने के दौरान जिस तरह की बहस हुई, वह सही नहीं थी। बहस लंबी कर दी गई। आगे इस गलती को नहीं दोहराया जाए।

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