राजस्थान में सरिस्का से गांवों के विस्थापित नहीं होने के कारण टाइगर के स्वभाव पर हो रहा असर

सरिस्का से गांवों के विस्थापित नहीं होने के कारण टाइगर के स्वभाव पर हो रहा असर

टाइगर अब सरिस्का में वन्यजीवों का शिकार करने के बजाय पेट भरने के लिए पशुधन पर आश्रित हो रहा है। सरिस्का वनक्षेत्र और आसपास के गांवों के हालात यह है कि यहां रहने वाले लोगों की अपेक्षा पशुधन ज्यादा है।

Priti JhaTue, 13 Apr 2021 12:10 PM (IST)

जयपुर, जागरण संवाददाता। राजस्थान में अलवर जिले के सरिस्का टाइगर रिजर्व में बढ़ती मानविय हलचल से वन्यजीवों विशेषकर टाइगर के स्वभाव पर असर हो रहा है। बार-बार समय सीमा तय करने के बावजूद सरिस्का के आसपास बसे गांवों का विस्थापन नहीं हो पा रहा है। यही कारण है कि टाइगर अब सरिस्का में वन्यजीवों का शिकार करने के बजाय पेट भरने के लिए पशुधन पर आश्रित हो रहा है। सरिस्का वनक्षेत्र और आसपास के गांवों के हालात यह है कि यहां रहने वाले लोगों की अपेक्षा पशुधन ज्यादा है। रणथंभौर और मुकुंदरा टाइगर रिजर्व की तुलना में सरिस्का में पशुधन का घनत्व ज्यादा है।

सरिस्का रिजर्व की सीमा और इसके आसपास 175 गांव है। इनमें से 26 गांव तो वे हैं जिन्हे क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट एरिया में माना गया है। बाकी 146 गांव वनक्षेत्र से बाहर लेकिन सीमा के बिल्कुल निकट बसे हुए हैं ।इन गांवों में आबादी कुल 6 हजार हैं,लेकिन पशुधन करीब 20 हजार है। वहीं क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट एरिया में बसे गांवों में आबादी 2 हजार से कम,लेकिन पशुधन 10 हजार के करीब है । पशुओं में भैंस,गाय,बकरी,भेड़ शामिल है।सरिस्का में पूर्व में काम कर चुके राजस्थान वन सेवा के अधिकारी जी.एस.भारद्वाज ने अध्ध्यन कर के एक रिपोर्ट तैयार की थी । इसके अनुसार साल,2011 में टाइगर के शिकार में पशुओं की प्राथमिकता करीब 19.4 प्रतिशत थी । बाद में यह बढ़कर 77 फीसदी को पार कर गई ।

टाइगर ने सबसे अधिक भैंस और गायों का शिकार किया । इसके बाद बकरी का नंबर आया । इसका प्रमुख कारण ग्रामीणों द्वारा पशुओं को चराई के लिए टाइगर रिजर्व की तरफ ले जाना या फिर टाइगर का बाहर निकल कर गांवों की तरफ आना है । रिजर्व में मानव हलचल बढ़ी तो टाइगर जंगल से बाहर निकल कर गांवों के आने लगा और पशुओं को अपना शिकार बनाया । इस अध्ययन में माना गया कि टाइगर की ओर से शिकार का चयन विभिन्न बिन्दुओं पर निर्भर करता है । प्राकृतिक जंगलाें में सांभर के शरीर और एकांत प्रवृति के कारण सबसे पसंदीदा शिकार प्रजातियों में माना जाता है। लेकिन सरिस्का में टाइगर सांभर के बजाय पशुओं का शिकार करना पसंद करता है ।

 

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