VIDEO: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- भारत के अंदर किसी भी चुनौती का सामना करने की क्षमता है

राजनाथ सिंह ने वायु सेना का जिक्र करते हुए कहा कि यह वर्ष 1971 के युद्ध का स्वर्णिम वर्ष है वही भारत आजादी का अमृत महोत्सव भी मना रहा है ऐसे में इस इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप इस बात का प्रमाण है की भारत सभी क्षेत्र में प्रगति कर रहा है।

Priti JhaThu, 09 Sep 2021 12:43 PM (IST)
राजस्थान की सड़कों पर उतरे वायुसेना के लड़ाकू विमान,देश की पहली एमरजेंसी लैंडिंग फील्ड का रक्षा मंत्री ने किया उद्घाटन

जोधपुर, जागरण संवाददाता। देश की सुरक्षा में आज एक अध्याय और जुड़ गया। राष्ट्रीय राज्यमार्ग पर देश की पहली इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश समर्पित किया है। राजस्थान के बाड़मेर जालौर की सीमा पर 3 किलोमीटर बनी आपातकालीन लर्निंग स्टेप का आज रक्षा मंत्री ने उद्घाटन कर देश को समर्पित किया है।राजस्थान के बाड़मेर के दक्षिण में गांधव-बाखासर सेक्शन (राष्ट्रीय राजमार्ग-925) पर एमरजेंसी लैंडिंग फील्ड पर पहले राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी हरक्यूलिस विमान के जरिए पहुंचे उसके बाद सुखोई जगुआर सभी खेल लड़ाकू विमानों ने इस आपातकालीन पर लैंडिंग की और टच एंड गो आपरेशन को अंजाम भी दिया। 

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा सेना की आपरेशनल क्षमता को बढ़ाने के लिए देश में कई स्थानों पर इस प्रकार की इमर्जेंसी लैंडिंग फील्ड का निर्माण किया जा रहा है। इससे प्राकृतिक आपदा की घड़ी में जनता को जल्द से जल्द राहत पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।

#WATCH | Having an emergency landing field so close to the international border shows that India is always prepared to defend its unity, integrity, & sovereignty. It shows that India is capable to deal with any challenge: Defence Minister Rajnath Singh in Jalore, Rajasthan pic.twitter.com/HUUjNR89MW

— ANI (@ANI) September 9, 2021

इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वायु सेना का जिक्र करते हुए कहा कि यह वर्ष 1971 के युद्ध का स्वर्णिम वर्ष है वही भारत आजादी का अमृत महोत्सव भी मना रहा है ऐसे में अंतररष्ट्रीय बार्डर से महज कुछ दूरी पर बना इस इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप इस बात का प्रमाण है की भारत सभी क्षेत्र में प्रगति कर रहा है। सामरिक जरूरतों के हिसाब से यह प्रयोग मील का पत्थर साबित होगा।

उन्होंने कहा कि एयरफोर्स की यह पहल मन में उत्साह और रोमांच तो पैदा करती ही है सुरक्षा का विश्वास भी पैदा करती है। केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इस पल को ऐतिहासिक क्षण बताया उन्होंने कहा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सड़क और परिवहन मंत्रालय ने भी तीन विश्व रिकार्ड बनाए हैं और ऐसे में विमानों की सड़कों पर और हाईवे पर लैंडिंग होना गौरव की बात है और निकट भविष्य में ऐसे और प्रोजेक्ट को अंजाम दिया जाएगा। यह पहली बार है जब किसी राष्ट्रीय राजमार्ग का उपयोग भारतीय वायुसेना के विमानों की एमरजेंसी लैंडिंग के लिये किया जायेगा।

शूरवीरों की धरती है राजस्थान

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लैंडिंग स्ट्रिप के उद्घाटन के समय राजस्थान से इसकी शुरुआत होने पर खुशी जाहिर की उन्होंने कहा कि राजस्थान वीरों की धरती है ऐसे में इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की शुरुआत राजस्थान से होना भी गौरवपूर्ण है राजस्थान की धरती शूरवीरों के लिए जानी जाती है ऐसे में राजस्थान से देश की पहली हाईवे पर बनी हवाई पट्टी का उद्घाटन करना गौरव का विषय है।

कार्यक्रम मैं पहले सुपर हरकुलिस विमान में सवार होकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी पहुंचे उसके बाद सुखोई थर्टी और जगुआर जैसे लड़ाकू विमानों ने भी टच एंड गो आपरेशन को अंजाम दिया। वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने एनएच 925 पर लैंडिंग की पार्किंग की और रिफिलिंग को भी अंजाम दिया। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राष्ट्रीय राजमार्ग-925ए पर सत्ता-गांधव के 41/430 किमी से 44/430 किमी के तीन किलोमीटर लंबे हिस्से को भारतीय वायु सेना के लिये एमरजेंसी लैंडिंग फील्ड (ईएलएफ) के रूप में तैयार किया है। लैंडिंग सुविधा, अभी हाल में विकसित खंड़जे से बने ऊंचे किनारे वाले (फुटपाथ के रूप में) दो लेन के गगरिया-भाखासर तथा सत्ता-गांधव सेक्शन का हिस्सा है। इसकी कुल लंबाई 196.97 किमी है और इसकी लागत 765.52 करोड़ रुपये है। इसे भारतमाला परियोजना के तहत निर्मित किया गया है। इस परियोजना से बाड़मेर और जालौर जिले के सीमावर्ती गांवों के बीच संपर्कता में सुधार होगा। यह हिस्सा पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित है और इससे भारतीय सेना की सतर्कता बढ़ेगी और देश की अधोसंरचना भी मजबूत होगी।

इस एमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप के अलावा वायुसेना/भारतीय सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुये कुंदनपुरा, सिंघानिया और भाखासर गांवों में 100X30 मीटर आकार के तीन हेलीपैड भी बनाये गये हैं। इस निर्माण से भारतीय सेना तथा देश की पश्चिमी अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा तंत्र को मजबूती मिलेगी।

19 महीनों के भीतर हुआ निर्माण

ईएलएफ का निर्माण 19 महीनों के भीतर हुआ है। ईएलएफ के लिये निर्माण कार्य की शुरूआत जुलाई 2019 में हुई थी और उसे जनवरी 2921 में पूरा कर लिया गया। भारतीय वायुसेना और एनएचएआई की देखरेख में यह निर्माण कार्य मेसर्स जीएचवी इंडिया प्रा.लि. ने किया था। सामान्य दिनों में ईएलएफ का इस्तेमाल निर्बाध यातायात के लिये किया जायेगा, लेकिन जब वायुसेना को अपनी गतिविधियों के लिये इस ईएलएफ की जरूरत होगी, तो सर्विस रोड को यातायात के लिये इस्तेमाल किया जायेगा। सर्विस रोड से भी आराम से यातायात चल सकता है। ईएलएफ की लंबाई 3.5 किलोमीटर है। इस लैंडिंग स्ट्रिप पर भारतीय वायुसेना के हर प्रकार के विमान उतर सकेंगे।

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