मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पायलट की जिद के बीच अटका मंत्रिमंडल विस्तार, राजनीतिक नियुक्तियां भी नहीं हो सकी

गहलोत पायलट खेमे के आधा दर्जन नेताओं को विभिन्न बोर्ड एवं निगमों में चेयरमैन बनाने पर सहमत हैं। कुछ नेताओं को सदस्य के रूप में नियुक्त किया जाएगा। लेकिन सबसे महत्वूपर्ण मंत्रिमंडल विस्तार पर दोनों के बीच सहमति नहीं हो पा रही है ।

Priti JhaTue, 20 Jul 2021 12:51 PM (IST)
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट

जयपुर, नरेन्द्र शर्मा। राजस्थान में कांग्रेस का सियासी संग्राम पहले की अपेक्षा शांत तो होने लगा है, लेकिन मंत्रिमंडल विस्तार का काम मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की जिद के कारण अटका हुआ है । पायलट ने अपने खेमे के नाम सीएम को न देकर सीधे राष्ट्रीय महासचिव अजय माकन को सौंपे हैं। गहलोत पायलट खेमे के आधा दर्जन नेताओं को विभिन्न बोर्ड एवं निगमों में चेयरमैन बनाने पर सहमत हैं। कुछ नेताओं को सदस्य के रूप में नियुक्त किया जाएगा। लेकिन सबसे महत्वूपर्ण मंत्रिमंडल विस्तार पर दोनों के बीच सहमति नहीं हो पा रही है ।

पायलट अपने 4 से 6 समर्थकों को मंत्री बनवाना चाहते है । वहीं गहलोत 2 से 3 लोगों को ही मंत्री बनाने के पक्ष में हैं। वह पायलट खेमे के मंत्रियों को विभाग भी अपनी मर्जी से ही देने के पक्ष में है। लेकिन पायलट परिवहन, सार्वजनिक निर्माण और पंचायती राज व ग्रामीण विकास जैसे बड़े महकमें अपने समर्थकोें को दिलवाना चाहते हैं।

पायलट कोटे के मंत्रियों की संख्या तय नहीं करवा सके माकन माकन लंबे समय से राज्य का सियासी संग्राम कम खत्म करवाने में जुटे हैं। इसके लिए उन्होंने कई बार सीएम और पायलट से बात की। पिछले दिनों जयपुर आकर उन्होंने सीएम से दो दिन तक लगातार बात की । लेकिन वे पायलट कोटे के मंत्रियों की संख्या तय नहीं करवा सके। सूत्रों के अनुसार सीएम चाहते हैं कि बगावत के समय पायलट सहित हटाए गए 3 मंत्री सचिन खेमे के बनाए जाएं। उनके विभाग भी वह खुद तय करें। गहलोत के इस रूख से पायलट खेमा नाखुश है। पायलट की इच्छा है कि ढ़ाई साल पहले सत्ता में आते ही सरकार गठन के समय उनके कोटे से 6 मंत्री बनाए गए थे। इसी तरह अब 6 मंत्री बनाए जाएं।

दरअसल, बगावत के समय पायलट खेमे के तीन मंत्रियों उदयलाल आंजना, प्रताप सिंह खाचरियावास और प्रमोद जैन भाया ने उनका साथ छोड़ दिया था। तीनों गहलोत खेमे में चले गए। अब पायलट का कहना है कि तीनों को उनके खेमें में नहीं माना जाए,अगर माना भी जाता है तो वे उन्हे हटाने की सिफारिश करते हैं। इस तरह तीनों के स्थान पर नए मंत्री बनाए जाएं।

जिला अध्यक्षों के चयन की प्रक्रिया शुरूआलाकमान ने गहलोत व पायलट के बीच सहमति बनाने का प्रयास किया। मंत्रिमंडल विस्तार पर जब दोनों नेताओं के बीच सहमति नहीं बनी तो माकन ने 11 माह से खाली पड़े जिला अध्यक्षों की नियुक्तिों की प्रक्रिया शुरू कर दी । इसके तहत प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से बिना बात किए माकन ने सीधे जिला प्रभारियों से तीन-तीन नामों का पैनल मंगवा लिए । उन्होंने कई जिलों के विधायकों व नेताओं को दिल्ली बुलाकर बात की । इस माह के अंत तक जिला अध्यक्षों की नियुक्ति करने की बात माकन ने कही है। 

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