Rajasthan Assembly: पशुपालन मंत्री ने कहा, मुझे नहीं पता ऊंट को राज्य पशु का दर्जा क्यों दिया गया

Rajasthan Assembly पशुपालन मंत्री लालचंद कटारिया ने कहा कि ऊंट को राज्य पशु का दर्जा क्यों दिया गया और इसके क्या फायदे हैं इसकी मुझे जानकारी नहीं है। ऊंट को राज्य पशु का दर्जा देने की जब घोषणा हुई थी तब मैं सदन में मौजूद नहीं था।

Sachin Kumar MishraFri, 17 Sep 2021 09:30 PM (IST)
राजस्थान के राज्य पशु ऊंट की फाइल फोटो।

जागरण संवाददाता, जयपुर। राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को अध्यक्ष डा. सीपी जोशी द्वारा पूछे गए एक सवाल का जवाब सुनकर सदन में मौजूद सभी विधायक हैरान रह गए। प्रश्नकाल के दौरान पहला ही सवाल प्रदेश में ऊंटों की स्थिति को लेकर किया गया था। पशुपालन मंत्री लालचंद कटारिया सवाल का उत्तर दे रहे थे। इसी दौरान अध्यक्ष ने मंत्री से पूछा कि ऊंट को राज्य पशु का दर्जा मिलने के क्या फायदे हुए। इसे राज्य पशु का दर्जा क्यों दिया गया। इस पर मंत्री कटारिया ने जवाब देते हुए कहा कि ऊंट को राज्य पशु का दर्जा क्यों दिया गया और इसके क्या फायदे हैं, इसकी मुझे जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि ऊंट को राज्य पशु का दर्जा देने की जब घोषणा हुई थी, तब मैं सदन में मौजूद नहीं था। उन्होंने कहा कि साल, 2015 में ऊंट को राज्य पशु का दर्जा दिया गया था। उस समय की परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लिया होगा।

दरअसल, कांग्रेस विधायक अमिन खान ने प्रदेश में ऊंट को राज्य पशु के दर्जे से जुड़ा सवाल पूछा था। इस सवाल के जवाब में मंत्री ने ऊंटों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देश के 84 प्रतिशत ऊंट केवल राजस्थान में हैं। यांत्रिक संसाधनों के विकास के कारण ऊंटों की संख्या में लगातार कमी आ रही है। मंत्री का जवाब सुनकर सब हैरान रह गए। भाजपा विधायकों ने सदन के बाहर कहा कि पशुपालन मंत्री को ही इस बात की जानकारी नहीं होना कि ऊंट को राज्य पशु का दर्जा क्यों दिया गया। यह हैरान करने वाली बात है। 

गौरतलब है कि राजस्थान विधानसभा में बुधवार को पहले तो सत्तापक्ष कांग्रेस और भाजपा विधायकों के बीच तकरार हो गई थी। तकरार हंगामें में बदली। इन दोनों का हंगामा शांत हुआ था कि संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल और विधानसभा अध्यक्ष डा. सीपी जोशी के बीच तकरार हो गई। तकरार इतनी बढ़ी कि अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। दरअसल, रोडवेज से जुड़े एक विधेयक पर चर्चा के दौरान प्रतिपक्ष के नेता गुलाब चंद कटारिया और परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास के बीच हुए वाद-विवाद के बाद सदन में शांति हुई तो अध्यक्ष ने कहा कि पहले जो कुछ हुआ उसे भूलिए और आगे बढ़िए। विधेयक पारित होने के दौरान जिस तरह की बहस हुई, वह सही नहीं थी। बहस लंबी कर दी गई। आगे इस गलती को नहीं दोहराया जाए।

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