जहरीली शराब केस: मृतकों के पारिवारिक सदस्यों को अब तक नहीं मिली सरकारी नौकरी

जहरीली शराब से मारे गए लोगों के परिवारों का दर्द आज भी ताजा ही है।

JagranSat, 31 Jul 2021 09:00 AM (IST)
जहरीली शराब केस: मृतकों के पारिवारिक सदस्यों को अब तक नहीं मिली सरकारी नौकरी

धर्मबीर सिंह मल्हार, तरनतारन : जहरीली शराब से मारे गए लोगों के परिवारों का दर्द आज भी ताजा ही है। पंजाब सरकार ने मृतकों के आश्रितों को सरकारी नौकरी देने का वादा किया था। इसे अभी तक पूरा नहीं किया गया। सरकार की ओर से इन परिवारों को पांच-पांच लाख की राशि बतौर मुआवजा दी गई थी। मगर उससे महज कर्ज भी उतर नहीं पाया। जहरीली शराब के कारण जिले भर के विभिन्न गांवों में 112 चिताएं जली थीं। हालांकि 15 लोगों की आंखों की रोशनी चली गई थी। इस हादसे को भले ही एक वर्ष का समय गुजर चुका है। परंतु पीड़ित परिवारों का दर्द आज भी पहले की तरह छलक रहा है। नौकरी नहीं मिली और बेटा कर रहा मजदूरी

गांव बचड़े निवासी सविदर सिंह ने अपने बेटे गुरजीत सिंह के साथ गांव पंडोरी गोला से शराब लाकर पी थी। गुरजीत की तो मौत हो गई थी जबकि सविदर सिंह (62) की दोनों आंखों की रोशनी चली गई। सविदर के बेटे जसपाल सिंह, बहु सिमरनजीत कौर ने बताया कि सरकार ने पांच लाख का मुआवजा तो दे दिया था। परंतु सरकारी नौकरी देने का वादा पूरा नहीं किया गया। जसपाल मजदूरी करके परिवार चला रहा है। पति का साया उठने के बाद करनी पड़ी नौकरी

पिता सविदर सिंह के साथ जहरीली शराब पीने से गुरजीत सिंह की विधवा सरबजीत कौर का कहना है कि पति का साया उठने के बाद पता चला कि बच्चों की परवरिश करनी कितनी मुश्किल है। सेंट मेरी अस्पताल में सफाई का काम करके महीने भर में छह हजार रुपये कमाने वाली सरबजीत कौर ने बताया कि सरकार की ओर से मिली पांच लाख की राशि से परिवार का कर्ज भी नहीं उतर पाया। सरकार को चाहिए कि वादे के मुताबिक नौकरी दी जाए। घोषित किए थे पांच लाख, मिले सिर्फ दो लाख

गांव बचड़े निवासी मध्यवर्गीय किसान हरदीप सिंह (52) आज भी उस घड़ी को कोस रहा है। जब वह पंडोरी गोला में शराब पीने लिए गया था। 20 रुपये में देसी शराब की ली गिलासी ने हरदीप सिंह के जीवन में अंधेरा ला दिया है। हरदीप ने बताया कि सरकार ने पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का एलान किया था। परंतु दो लाख ही दिए। पत्नी रुपिदर कौर भी सरकार को कोसती है। दिव्यांग हैं मां और बेटा, पक्का मकान नहीं मिला

गांव संघा निवासी रिक्शा चालक मनजीत सिंह की भी मौत हुई थी। मनजीत की पत्नी किदर कौर और बेटा सोना सिंह दिव्यांग है। कच्चे मकान में जिदगी व्यतीत करने वाले इस मां-बेटे पर तरस खाकर गांव के लोग खान-पान का सामान दे जाते हैं। सरकार से मिली पांच लाख की राशि रिश्तेदारों ने मां-बेटे के खाते में जमा करवा दी है। हलका विधायक ने वादा किया था कि मंदबुद्धि मां-बेटे को रहने के लिए पक्का मकान दिया जाएगा। परंतु वादा पूरा नहीं किया गया। मां करती है घरों में काम

मजदूरी करने वाले गांव संघा निवासी सरवन सिंह की पत्नी मनजीत कौर लोगों के घरों में काम करती है। बड़ी बेटी सिमरनजीत कौर बारहवीं पास है। छोटी बेटी हरमन कौर मैट्रिक की पढ़ाई करती है। मनजीत कौर के दो छोटे बेटे जर्मन सिंह व राणा सिंह भी मजदूरी करते हैं। सिमरनजीत ने बताया कि सरकार ने नौकरी देने का वादा किया था। पर पूरा नहीं किया। अगर नौकरी मिल जाए तो अपनी मां को लोगों के घरों में काम करने से रोक सकती हूं। पति के कर्ज में चुका दिए पैसे

मेहनत मजदूरी करके 30 जुलाई 2020 की रात को घर लौटते समय कुलदीप सिंह ने देसी शराब खरीदकर पी थी। घर लौटते ही कुलदीप ने प्राण त्याग दिए। पत्नी अमनदीप कौर ने बताया कि जहरीली शराब ने मेरा सुहाग उजाड़ दिया है। सरकार की ओर से जारी पांच लाख की राशि में से आधे पैसे मेरी सास के खाते में आए हैं। बाकी की राशि मैंने पति का कर्ज चुकाने में खर्च कर दी है। अब रोजी रोटी के लाले पड़े है। पहले गई आंखों की रोशनी, फिर निकले प्राण

31 जुलाई 2020 की रात को जहरीली शराब पीने से बेहोश हुए रेशम सिंह को अस्पताल ले जाया गया। वहां पर पता चला कि आंखों की रोशनी चले गई है। अगले दिन रेशम सिंह की मौत हो गई। पत्नी मनजिदर कौर ने बताया कि वह मैट्रिक पास है। दो बेटियों महकप्रीत कौर, मलका राणी व छोटे बेटे रोहित सिंह की पर्वरिश की चिता सता रही है। सरकार अगर वादे मुताबिक सरकारी नौकरी देती है तो बच्चों का भविष्य संवर सकता है।

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