आठ वर्ष बाद जिला तरनतारन ग्रीन सेफ घोषित

आठ वर्ष बाद जिला तरनतारन ग्रीन सेफ घोषित

सड़क हादसों पर नियंत्रण पाने के लिए लंबे समय से चल रहे अभियान का फायदा मिला।

JagranThu, 13 May 2021 12:05 AM (IST)

धर्मबीर सिंह मल्हार, तरनतारन : सड़क हादसों पर नियंत्रण पाने के लिए लंबे समय से चल रहे अभियान के तहत आठ वर्ष बाद जिला ग्रीन सेफ घोषित किया गया। जिले में गत वर्ष के मुकाबले 50 फीसद सड़क हादसों में कमी आई है।

पुलिस ने अपना ध्यान पहले उन प्वाइंटों पर केंद्रित किया जहां पर अक्सर हादसे होते रहते थे। एसपी (ट्रैफिक) बलजीत सिंह ढिल्लों की अगुआई में जिले भर में ट्रैफिक जागरूकता को लेकर 86 सेमिनार करवाए गए, जिनमें 1955 लोगों ने भाग लिया। सर्दी में धुंध के कारण होने वाले हादसे रोकने के लिए ट्रक, आटो, रिक्शा व अन्य वाहनों पर रिफ्लेक्टर लगाए गए व चालकों को जागरूक करने के साथ-साथ उनकी आखों की जान गई। रोड सेफ्टी इंजीनियर आदित्य मंगोत्रा की अगुआई में डाइवर्जन व जेब्रा क्रासिंग का स्थान निर्धारित किया गया। साथ ही ओवर स्पीड को कम करने के लिए राष्ट्रीय मार्ग व स्टेट मार्ग पर स्पीड रडार लगाए गए। एसएसपी ध्रुमन एच निबाले ने बताया कि बेसहारा पशुओं से हादसे न हों, इसके लिए उनके गले में रिफ्लेक्टर लगाने की मुहिम चलाई गई। सड़कों पर बैरिकेडिंग की गई। एसएसपी ने बताया कि गत वर्ष 2019-20 में जिले में 184 सड़क हादसे हुए थे। जबकि 169 लोगों की मौत व 102 लोग घायल हो गए थे। ट्रैफिक पुलिस की ओर से जागरूकता अभियान के तहत जिले में सड़क हादसों में कमी रिकार्ड की गई। एक अगस्त 2020 से लेकर (2019-20 के मुकाबले) इस बार जिले में 89 सड़क हादसे हुए है। जिनमें 66 लोगों की मौत हुई, जबकि 64 लोग घायल हुए। एसएसपी निंबाले ने बताया कि आठ वर्ष बाद जिला तरनतारन राज्य भर में ग्रीन सेफ घोषित हुआ है। उन्होंने बताया कि 10 लाख की आबादी के पीछे जिस जिले में 75 के करीब मौतें होती हैं, वह जिला ग्रीन जिले में आता है। एसएसपी ने बताया कि 2019-20 में पूरे देश में सड़क हादसों में 1 लाख, 51 हजार, 113 लोगों की मौत हुई थी। लोगों के जागरूक होने से सड़क हादसे अब कम होने लगे है।

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