शहीद के भाई को न मिली नौकरी, न बना स्टेडियम व न ही घर तक पहुंची पक्की सड़क

गलवान घाटी में गत वर्ष शहीद हुए चीमा के नजदीकी गांव तोलावाल के शहीद गुरबिदर सिंह के नाम पर सरकार द्वारा किए गए वादे एक वर्ष बाद भी पूरे नहीं हुए।

JagranTue, 15 Jun 2021 06:18 PM (IST)
शहीद के भाई को न मिली नौकरी, न बना स्टेडियम व न ही घर तक पहुंची पक्की सड़क

महेंद्र पाल/मनदीप कुमार, चीमा (संगरूर) :गलवान घाटी में गत वर्ष शहीद हुए चीमा के नजदीकी गांव तोलावाल के शहीद गुरबिदर सिंह के नाम पर सरकार द्वारा किए गए वादे एक वर्ष बाद भी पूरे नहीं हुए। बुधवार (16 जून) को तोलावाल गांव में शहीद की पहली बरसी पर श्री अखंड पाठ साहिब के भोग डाले जाएंगे।

उल्लेखनीय है कि लेह लद्दाख की गलवान घाटी पर गत वर्ष शहीद हुए गुरबिदर सिंह की 16 जून को गांव तोलावाल में पहली बरसी मनाई जाएगी। शहीद के नाम पर गत वर्ष हुए वादों को अभी तक पूरा न किए जाने के कारण शहीद के परिवार में सरकार के प्रति रोष पाया जा रहा है। शहीद के भाई गुरप्रीत सिंह को सरकारी नौकरी देने का वादा किया गया था, लेकिन उसे अभी तक नौकरी नहीं मिल पाई है। गत वर्ष उसे नौकरी देने के लिए दस्तावेज इकट्ठे किए गए व फाइल तैयार की गई, लेकिन नौकरी नहीं दी गई। सरकार ने इलाके के स्कूल का नाम शहीद के नाम पर अवश्य तबदील कर दिया है।

जमीन न मिलने पर नहीं बना स्टेडियम : शहीद की शहादत के दौरान गांव में डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से स्टेडियम बनाया जाना था, लेकिन इस स्टेडियम के लिए अभी तक पंचायत द्वारा चार एकड़ जमीन नहीं दी गई है। जमीन न मिलने के कारण स्टेडियम का निर्माण नहीं हो पाया। वहीं पंचायत ने 20 लाख रुपये की लागत से मनरेगा अधीन छोटे स्टेडियम का निर्माण अलग तौर पर करवाया है, जिसका निर्माण अभी अधूरा है। बेशक डेढ़ करोड़ की राशि भी सरकार द्वारा जारी की जा चुकी है, लेकिन फिर भी स्टेडियम न बनना सरकार व प्रशासन का उदासीनता का नतीजा है।

--------------------- पिछले वर्ष यह किए थे वादे पिछले वर्ष शहीद के संस्कार के दौरान पंजाब सरकार ने गांव में शहीद की याद में बुत स्थापित करने, शहीद के नाम पर स्टेडियम बनाने, गांव की मुख्य सड़क से घर तक पक्की सड़क बनाने, शहीद के भाई को सरकारी नौकरी देने सहित भतीजी की आर्मी स्कूल में पढ़ाई करवाने का वादा किया था लेकिन अफसोस एक वर्ष का समय गुजर जाने के बाद भी शहीद के परिवार से किए वादे वफा नहीं हुए। शहीद के परिवार ने भी दुख जताया कि सरकार शहीदों के नाम पर सियासी रोटियां सेकने में जुटी है। -------------------

परिवार ने खुद के खर्चे पर बुत लगाया

अफसोस की बात यह भी है कि शहीद के परिवार ने खुद अपने खर्च पर शहीद गुरबिदर सिंह का बुत खेत में स्थापित किया है, जबकि सरकार द्वारा स्थापित किए जाने वाले बुत का अभी तक कोई अतापता नहीं है। -----------------------

नहीं बन पाई शहीद के घर तक पक्की सड़क

शहीद के नाम पर गांव के मुख्य रोड से घर तक पक्की सड़क बनाने का वादा किया गया था, लेकिन अभी तक सड़क भी नहीं बन पाई, क्योंकि 11 फीट के इस मार्ग को 20 फीट किया जाना है। इसके लिए दोनों तरफ से कुल नौ फीट अतिरिक्त जगह की जरूरत है, लेकिन सड़क के दोनों तरफ से ग्रामीणों द्वारा जगह नहीं दी गई है, जिस कारण सड़क नहीं बनी। पंचायत का दावा है कि लोग जगह के एवज में रकम की मांग कर रहे हैं।

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सेना में भर्ती होना चाहती थी भतीजी, सपना अधूरा शहीद के पिता लाभ सिंह, माता चरणजीत कौर का कहना है कि गुरबिदर सिंह की भतीजी जसमीन कौर अपने चाचा गुरबिदर सिंह की तरह ही सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना चाहती है। इसलिए सरकार ने वादा किया कि लड़की को आर्मी स्कूल में दाखिल किया जाएगा। कितु अफसोस की लड़की की पढ़ाई पर सरकार ने आगे कोई ध्यान नहीं दिया। लिहाजा जसमीन कौर चीमा के एक प्राइवेट स्कूल में अपनी पढ़ाई कर रही है।

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लाइब्रेरी के नाम पर केवल कमरा शहीद के नाम पर गांव में लाइब्रेरी बनाई जानी थी, लेकिन अलग तौर पर लाइब्रेरी बनाने की बजाए, केवल सरकारी स्कूल में एक कमरे को ही लाइब्रेरी बनाया गया है जिस पर शहीद के नाम पर लाइब्रेरी का बोर्ड भी लगा दिया गया है।

--------------------- शहीद के नाम पर किए गए वादे पूरे किए जा रहे हैं। सड़क के लिए जमीन जल्द मिल जाएगी। मनरेगा के तहत स्टेडियम का निर्माण अंतिम चरण पर है। --मेवा सिंह, सरपंच

------------------- सरकार द्वारा किए वादों को जल्द पूरा किया जाएगा। कोरोना काल के कारण कुछ समस्याएं पेश आ गई थी, जिस कारण कुछ देरी हुई है। --दामन बाजवा, हलका इंचार्ज

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