निदा करनी है तो खुद की करें, दूसरों की नहीं : महासाध्वी

जैन स्थानक में धर्म सभा को संबोधित करते महासाध्वी समर्थ श्री महाराज ने प्रदर्शन किया।

JagranWed, 04 Aug 2021 03:49 PM (IST)
निदा करनी है तो खुद की करें, दूसरों की नहीं : महासाध्वी

जागरण संवाददाता, संगरूर : जैन स्थानक में धर्म सभा को संबोधित करते महासाध्वी समर्थ श्री महाराज ने फरमाया कि अगर निदा करनी है तो खुद की करनी चाहिए, क्योंकि मन के पीछे लगकर मनुष्य दूसरों की निदा करता रहता है। उनमें कमियां निकालता है और खुद को सही साबित करने की कोशिश करता है, जिससे उसके अच्छे गुण समाप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि उंगली किसी पर न उठाएं, खुद को साफ बनाएं। कौन किसकी निदा करता है, कौन निदा के काबिल है। इसके बारे में हमें अधिक सोचना नहीं चाहिए। दूसरे को बुरा कहने व साबित करने का हक मनुष्य को नहीं है क्योंकि जो मनुष्य किसी को बुरा साबित करने की कोशिश करता है, उसको भी कोई तीसरा गलत साबित करने में लगता है। इस प्रकार प्रत्येक मनुष्य एक दूसरे को नीचा दिखाने में लगा है। साध्वी ने कहा कि निदा कर हम कान, आंख व जुबान के जरिए किसी दूसरे का कचरा अपने मन रूपी घर में धारण कर लेते हैं। इससे मन की शांति भंग होती है। मनुष्य का कर्म केवल संसार पर आकर भगवान का नाम जपना है, संतों की सेवा करना है। जिस प्रकार भगत कबीर जी ने किया। महासाध्वी एमूध महाराज ने कहा कि स्वभाव को ठंडे जल की भांति शीतल रखें। जल के महत्व पर प्रकाश डालते कहा कि जल की मानव जीवन में अहम भूमिका है, लेकिन आजकल लोग इसे बेअर्थ कपड़े धोने, कार वाश करने, फर्श धोने इत्यादि कार्यों में जाया कर रहे हैं, जो सही नहीं है। इसलिए पानी नष्ट करने से बचें। इस अवसर पर अखंड जाप करवाया गया।

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