कृषि सुधार कानूनः रूपनगर में मालगाड़ियों के लिए किसानों ने पटरी को खाली किया

धरने के दौरान रेलवे स्टेशन पर बैठे किसान।
Publish Date:Fri, 23 Oct 2020 01:31 AM (IST) Author:

रूपनगर, जेएनएन। खेती सुधार कानूनों को रद करवाने की मांग को लेकर मोदी सरकार के खिलाफ रेल रोको आंदोलन के 22वें दिन किसानों ने रेल पटरी को माल गाड़ियों के आने के लिए खोल दिया है। लेकिन टोल प्लाजा, मल्टीनेशनल कंपनी के पेट्रोल पंप और स्टोरों का किसानों द्वारा बहिष्कार जारी रखा गया। वीरवार को किसानों ने रेल पटरी नंगल चौक-रूपनगर से धरना हटा रेलवे स्टेशन पर चादर बिछाकर शुरू कर दिया है। 21 दिन में रेलवे को होने वाला नुकसान करोड़ों रुपये में है। क्योंकि एक मालगाड़ी का भाड़ा ही 20 से 25 लाख के बीच होता है। सायं तक नौ मालगाड़ियां रूपनगर रेलवे स्टेशन से गुजरी। इनमें छह गाड़ियां नंगल की तरफ रवाना हुई जबकि तीन अंबुजा सीमेंट फैक्ट्री से गई।

किसानों ने एलान किया कि रेलवे स्टेशन पर किसान दिन रात धरने पर बैठेंगे और सवारी रेल गाड़ियों को आने से रोकेंगे। किसानों ने शिव सेना पंजाब के प्रधान संजीव घनौली द्वारा बीते दिन एक पत्रकार के साथ बातचीत करते हुए किसानों को धरनों के लिए वेहले (निट्ठले) कहने से गुस्से में आकर संजीव घनौली का पुतला फूंका और केंद्र सरकार से संजीव घनौली की सुरक्षा वापस लेने की मांग की। भारतीय किसान यूनियन कादियां के जिला प्रधान गुरनाम सिंह जस्सड़ा, प्रगट सिंह रोलूमाजरा, रुपिंदर सिंह रूपा, गुरिंदर सिंह रुड़की ने कहा कि बीते दिन एक पत्रकार के साथ बातचीत करते शिव सेना पंजाब के प्रधान संजीव घनौली द्वारा किसानों को धरने लगाने के लिए वेहले (निट्ठले) कहा गया है। जिसकी वह सख्त शब्दों में निंदा करते हैं। उन्होंने कहा कि संजीव घनौली हिंदू और सिखों को लड़वाने के लिए ऐसे गलत ब्यान दे रहे हैं और माहौल खराब करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि संजीव घनौली को आरएसएस की सरपरस्ती हासिल है और मोदी सरकार के इशारे पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि संजीव घनौली ने यदि भविष्य में ऐसा गलत ब्यान दिया तो उसके खिलाफ संघर्ष तेज किया जाएगा। किसान नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा बिजली बिल 2020 की भी तैयारी की जा रही है। इसके साथ किसानों और गरीब वर्ग को बिजली के बिल लगाए जाएंगे। जिससे किसानों पर और आर्थिक बोझ डाला जाएगा। उन्होंने कहा कि रेल सेवा बंद होने से हो रहे नुक्सान के लिए मोदी सरकार खुद जिम्मेदार है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अपने चहेती कंपनियों के पास किसानों की जमीनों का कब्जा करवाना चाहती है। जिसको किसान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे।

टोल प्लाजा सोलखियां पर 13 वें दिन नहीं वसूलने दिया टोल दूसरी तरफ, टोल प्लाजा सोलखियां पर 13 वें दिन धरना जारी रहा और वाहनों को बिना पर्ची से निकाला गया। टोल प्लाजा को प्रतिदिन 13 लाख का नुकसान हुआ। अंदाजन 2 करोड़ 86 हजार का नुकसान हो चुका है। यही नहीं, प्रत्येक माह टोल प्लाजा के कर्मचारियों का 20 लाख के आसपास का वेतन का खर्च अलग से है।

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