13,330 हाथों से बना 225.55 मीटर उंचा भाखड़ा बांध पैदा कर रहा 2882.73 मेगावाट बिजली, बाढ़ आपदा से राहत और पानी का भी दे रहा तोहफा

सुभाष शर्मा, नंगल : भाखड़ा बांध को 1963 में देश के प्रथम प्रधानमंत्री स्व. पं. जवाहर लाल नेहरू ने राष्ट्र को समर्पित करके हरित क्रांति का सपना साकार किया था। भाखड़ा बांध के 9340 मीलियन घन मीटर क्षमता वाले जलाशय का नाम सिखों के दसवें गुरु 'श्री गुरु गोबिंद सिंह' के नाम पर 'गोबिंद सागर' रखा गया है। भाखड़ा बांध सहित बीबीएमबी के ब्यास बांध परियोजना, ब्यास सतलुज लिंक परियोजना के माध्यम से ही आज न केवल विभिन्न प्रांतों को बाढ़ जैसी आपदा से बचा कर रखा गया है बल्कि बोर्ड के भागीदार प्रांतों पंजाब, हरियाणा व राजस्थान की मरू भूमि को हरा-भरा बनाने के साथ-साथ परियोजनाओं की विद्युत उत्पादन क्षमता 2882.73 मेगावाट के माध्यम से मात्र 27 पैसे प्रति यूनिट की लागत से बिजली दे रहा है। गर्मियों के मौसम में मानसरोवर झील एवं रास्ते की बर्फ का पिघला हुआ पानी तथा वर्षा काल में कैचमेंट एरिया से आने वाला पानी बांध में एकत्रित किया जाता है। इस बांध में 50 से 60 प्रतिशत पानी बर्फ के पिघलने से आता है व शेष वर्षा से। झील में 1680 फीट तक 93400 लाख घनमीटर पानी एकत्रित किया जाता है। बरसात के दिनों में जमा किए जाने वाले पानी के परिणामस्वरूप ही पंजाब, हरियाणा व अन्य प्रांतों जैसे इलाकों को बाढ़ से राहत मिलती है वहीं जलाश्य से उक्त प्रांतों में 26 लाख हैक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होता है। भाखड़ा बांध से पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी राजस्थान, चंडीगढ़ और दिल्ली के मुख्य शहरों के लिए पीने के पानी की आपूर्ति भी की जाती है। बिजली, पानी, आपदा से राहत, खेती के लिए पानी जैसी सुविधाएं भाखड़ा बांध द्वारा मिल रही हैं।

अंग्रेजों के राज में लेफ्टिनेंट गवर्नर ने संजोया था सपना

वर्ष 1908 में ब्रिटिश हुकूमत के लेफ्टिनेंट गवर्नर पंजाब सर लुइस डैन ने भाखड़ा क्षेत्र के भ्रमण समय ही यहां बांध बनाने का सपना संजोया था। पहली बार गोर्डन नामक इंजीनियर 1909 में बांध निर्माण के लिए इस स्थल को उपयुक्त करार दिया था। इसके बाद निर्माण की रूप रेखा तैयार हुई और वर्ष 1944 में अमेरिका के ब्यूरो आफ रिक्लेमेशन के चीफ इंजीनियर डॉ. जेएल साबेज ने इस स्थल का निरीक्षण करने के बाद 225.55 मीटर ऊंचा बांध निर्माण को हरी झंडी दिखाई। बेहद उपजाऊ भूमि वाले भाखड़ा गांव सहित कुल 371 गांव भाखड़ा बांध की गोबिंद सागर झील में जलमग्न हो गए थे। इन गांवों से विस्थापित हुए करीब 3600 परिवार इन दिनों हरियाणा प्रांत के जिला फतेहाबाद के इर्दगिर्द गांवों में बसे हुए हैं। 283.90 करोड़ की लागत से 1962 में बना था बांध

बांध की ऊंचाई देश की राजधानी दिल्ली में स्थित कुतुबमीनार की ऊंचाई के तीन गुना से भी अधिक है। 283.90 करोड़ की लागत से वर्ष 1962 में बन कर पूरा हुआ भाखड़ा बांध उस समय एशिया में सबसे ऊंचा व विश्व में ऊंचाई में दूसरे स्थान पर था। जल स्तर 1680 फीट तक पहुंचने पर भाखड़ा बांध 2 इंच तक झुकने की क्षमता रखता है। खास बात यह है कि जल स्तर कम होते ही डैम अपनी सामान्य स्थिति पर आ जाता है। भाखड़ा बांध के निर्माण में कुल एक लाख टन सरिये का इस्तेमाल होने के कारण यह इंजीनियरिंग में एक चमत्कारी परियोजना है। भाखड़ा बांध के निर्माण में उपयोग की गई सीमेंट, कंक्रीट की मात्रा धरती के भू-मध्य रेखा पर 2.44 मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण के लिए पर्याप्त है। 13,330 लोग जुटे रहे कार्य में

भाखड़ा बांध परियोजना एम.एच.सलोकम की तकनीकी देखरेख में संपन्न हुआ। इसमें 13000 कामगार, 300 अभियंता और 30 विदेशी विशेषज्ञ दिन-रात कार्यरत रहे। यह सिलसिला करीबन चौदह वर्षो तक चला। विदेशी विशेषज्ञों में अधिकांश रसियन थे। निर्माण के दौरान विभिन्न दुर्घटनाओं के तहत 151 लोगों को अपने प्राणों की आहुति देने पड़ी थी जिसके प्रति देश कृतज्ञ रहेगा। भाखड़ा बांध का तकनीकी विवरण

बांध की किस्म गुरुत्वाकर्षण पर आधारित कंक्रीट संरचना

बांध की नींव के निम्न स्तर से ऊंचाई 225.55 मीटर

बांध की नदी तल से ऊंचाई 167.64 मीटर

बांध की ऊपर की लंबाई 518.16

ऊपर से चौड़ाई 9.14 मीटर

तल पर लंबाई 99.00 मीटर

आधार तल की चौड़ाई 190.50 मीटर

बांध की समुद्र तल से ऊंचाई 518.16 मीटर

बिजली की लागत 27 पैसे प्रति यूनिट चेयरमैन इंजी. डीके शर्मा हैं संचालक

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भाखड़ा ब्यास प्रबंध बोर्ड के चेयरमैन पद पर तैनात इंजी. डीके शर्मा हैं जिन्हें राष्ट्र स्तर पर अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। राज भाषा के सर्वोच्च सम्मान कर कीर्ति पुरस्कार, 'हाइड्रो विद्युत क्षेत्र में सर्व श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली यूटीलिटी' तथा सर्वोत्तम अनुरक्षित परियोजना के अलावा ऊर्जा के संरक्षण के मकसद से आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में सर्वोत्तम राज्य नोडल अधिकारी श्रेणी व सर्वोत्तम यूटी स्तर नोडल अधिकारी श्रेणी आदि पुरस्कार प्राप्त करने के अलावा खेल कूद में भी सात खेलों में बीबीएमबी ने राष्ट्र स्तर पर जीत हासिल की है। आज मनाया जाएगा स्थापना दिवस

भाखड़ा बांध का 56वें समर्पण दिवस आज 22 अक्तूबर मंगलवार को मनाया जा रहा है। बांध के साथ शहीद स्मारक पर सुबह 10 बजे बीबीएमबी के वरिष्ठ अधिकारी व कर्मचारी श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे। भाखड़ा तक कर्मचारियों को पहुंचाने के लिए विशेष ट्रेन सुबह 9.10 बजे पर नंगल से रवाना होगी वहीं 9.40 बजे तक शहीद स्मारक तक बसें भी चलाई जाएंगी।

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