पंचमी और शहीदी दिवस पर संगत ने गुरु घर में शीश नवाया

गुरुद्वारा श्री दुखनिवारण साहिब में बड़ी संख्या में भक्तों ने पंचमी व शहीदी दिवस पर गुरु को नमन किया।

JagranWed, 08 Dec 2021 07:14 PM (IST)
पंचमी और शहीदी दिवस पर संगत ने गुरु घर में शीश नवाया

जासं. पटियाला : गुरुद्वारा श्री दुखनिवारण साहिब में बड़ी संख्या में भक्तों ने पंचमी व शहीदी दिवस पर गुरु को नमन किया। शहीदी जोड़ मेल को समर्पित श्री अखंड पाठ साहिब के भोग डाले गए। प्रधान ग्रंथी भाई प्रीतपाल सिंह ने सरबत के कल्याण के लिए अरदास की और वर्तमान रागी कीर्तन भाई जसविदर सिंह के रागी जत्थे ने संगत को कीर्तन सुनाया। इस अवसर पर संगत ने पवित्र सरोवर में स्नान किया और पंगत-संगत करते हुए गुरु दरबार में संगत को शबद गुरु का सहयोग मिला।

गुरुद्वारा साहिब के दीवान हाल में आयोजित धार्मिक समारोह के दौरान ढाडी व कीर्तन समूहों खजान सिंह प्रेमी, गुरपीर सिंह जौहर, सीतल सिंह, रविदर सिंह पिलखानी, मलकीत सिंह, बलदेव सिंह लौंगोवाल, सुखजिदर सिंह चंगियारा, गरप्रीत सिंह सनौर ने प्रस्तुति दी। लखविदर सिंह पारस ने नौवें पातशाह की शहादत की वर्षगांठ के संबंध में संगत को इतिहास से जोड़ा और उन्हें धर्म में परिपक्वता के लिए प्रोत्साहित किया।

धार्मिक समारोह के दौरान शिरोमणि कमेटी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. किरपाल सिंह बडूंगर और शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने संगत को शहीद पर्व से संबंधित इतिहास से जोड़ते हुए कहा कि गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शहादत के बारे जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आज तक कहा जाता है कि अगर गुरु तेग बहादुर जी ने हिदू धर्म की रक्षा के लिए अपना बलिदान नहीं किया होता तो हिदू धर्म उतना गौरवशाली नहीं होता, जितना आज भारत या दुनिया में है। उन्होंने कहा कि गुरु जी दुनिया के एकमात्र ऐसे नेता थे जिन्होंने दूसरे धर्म को बचाने के लिए अपनी शहादत दी थी। इस अवसर पर प्रबंधक करनैल सिंह नाभा, डिप्टी प्रबंधक करनैल सिंह, भाई अजमेर सिंह, वरिदर सिंह गोल्डी, प्रचारक परविदर सिंह बराड़ा, गुरदीप सिंह शेखूपुरा, सुखबीर सिंह के अलावा शिरोमणि कमेटी के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे। कवि दरबार का आयोजन किया गया

गुरुद्वारा साहिब के दीवान हाल में कवि दरबार का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित पंजाबी कवियों में भाई बलबीर सिंह बल, भाई हरनेक सिंह वडाली, भाई अवतार सिंह तारी, भाई बलबीर सिंह कोमल, भाई अजीत सिंह रतन, भाई कुलदीप सिंह, भाई गुरदीप सिंह भैनी जस्सा, बीबी मंजीत कौर और बीबी परविदर कौर पटियाला, भाई हरमिदरपाल सिंह आदि ने गुरु तेग बहादुर साहिब की शहादत के दौरान संगत को धर्म और इतिहास से जोड़ने वाली कविताओं से संगत को निहाल किया।

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