मंत्रीपद बचाने में कामयाब रहे ब्रह्म महिंदरा, समर्थक बोले-सौगंध के बाद ही बांटेंगे मिठाई

स्थानीय निकाय मंत्री ब्रह्म महिदरा की मंत्रीपद से छुट्टी होने की चर्चा के बाद शनिवार को उनको फिर से मौका देने की बात पर भी उनके समर्थक शांत रहे।

JagranSun, 26 Sep 2021 12:12 AM (IST)
मंत्रीपद बचाने में कामयाब रहे ब्रह्म महिंदरा, समर्थक बोले-सौगंध के बाद ही बांटेंगे मिठाई

सुरेश कामरा, पटियाला : स्थानीय निकाय मंत्री ब्रह्म महिदरा की मंत्रीपद से छुट्टी होने की चर्चा के बाद शनिवार को उनको फिर से मौका देने की बात पर भी उनके समर्थक शांत रहे। उन्होंने न तो मिठाई बांटी और न ही किसी तरह की आतिशबाजी की। वहीं वरिष्ठ होने के कारण वे अपनी मंत्रीपद की कुर्सी बचाने में कामयाब रहे हैं। पिछले तीन दिनों से वे दिल्ली में डेरा जमाए रहे जिसके कारण उनको फिर से मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की सरकार में मंत्री बनने का मौका मिला है।

इससे पहले कैप्टन अमरिदर सिंह के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद उनकी मंत्री पद से छुट्टी तय मानी जा रही थी। लेकिन शनिवार को कैबिनेट मंत्रियों की नई सूची में उनको फिर से मौका देने की बात कही गई है। हालांकि उनके हलके सहित निवास पर किसी तरह की खुशी की गतिविधि नजर नहीं आई। इसका कारण यह भी है कि जब उनको डिप्टी सीएम बनाया जाने लगा था तो आधिकारिक तौर पर नाम अनाउंस होने से पहले शहर में बैनर लगने शुरू हो गए और समर्थकों ने आतिशबाजी चलाते हुए शहर कई स्थानों पर मिठाई बांटी थी। शनिवार को वे सभी समर्थक शांत रहे। उन्होंने कहा कि वे मिठाई बांटने का कार्यक्रम रविवार को ब्रह्म महिदरा के मंत्रीपद की सौैगंध खाने के बाद ही आयोजित करेंगे। जब उनसे पूछा कि आज नाम तो मंत्री पद के लिए सामने आ गया है तो जवाब मिला कि वे मंत्री तो पहले हैं ही, लेकिन फिर भी वे रविवार को ही मिठाई बांटेंगे। कहीं डिप्टी सीएम बनने जैसी हालत न हो जाएं। आठ बार लड़े, छह बार जीते दो बार हारे

वरिष्ठ मंत्री व राजनीतिज्ञ होने के कारण ही वे अपनी मंत्रीपद की कुर्सी बचाने में कामयाब रहे हैं। उन्होंने पटियाला टाउन, समाना, पटियाला-ग्रामीण हलके में आठ बार चुनाव लड़े हैं और छह बार जीते हैं जबकि दो बार उनको हार का सामना करना पड़ा। वे 1980, 1985, 1992 में तीन बार जीते, फिर 1997 में व 2002 में हारे हैं और 2007, 2012, व 2017 में फिर तीन बार चुनाव जीते हैं। उन्होंने 1980 में शंभू प्रसाद, 1985 में सरदारा सिंह कोहली, 1992 में कृष्ण कुमार, 2007 में सुरजीत सिंह रखड़ा, 2012 में कुलदीप कौर टोहड़ा व 2017 में कर्नबीर सिंह टिवाणा को हराया है। वे 1997 में सुरजीत सिंह कोहली व 2002 में सुरजीत सिंह रखड़ा से हारे हैं।

मंत्री साधू सिंह धर्मसोत की रिहायश पर पसरा सन्नाटा

नाभा से विधायक व कैबिनेट मंत्री साधू सिंह धर्मसोत के मंत्रीपद जाने की जानकारी आने के साथ ही उनके घर पर सन्नाटा छा गया। हालत यह है उनके घर की तरफ जाने वाली सड़क भी वीरान नजर आई। पुलिस बैरिकेड लगे हुए हैं लेकिन कोई सुरक्षा कर्मी व आने जाने वाला कोई नजर नहीं आया।

पंजाब में कैप्टन अमरिदर सिंह की सरकार के जाते ही उनके करीबियों पर भी गाज गिरनी शुरू हो गई है। उनमें साधू सिंह धर्मसोत भी शामिल हैं। वे इस समय वन विभाग के मंत्री हैं और वे स्कालरशिप घोटाले के आरोप में फंसे हुए हैं। पंजाब के पांच कैबिनेट मंत्रियों को अपनी मंत्री पद की कुर्सी से हाथ धोना पड़ रहा है। उनमें साधू सिंह धर्मसोत भी शामिल हैं। पांच बार विधायक बने हैं धर्मसोत

वे पांचवीं बार विधायक बने हैं, तीन बार वह अमलोह हलके से विधायक रहे हैं, जबकि 2012 व 2017 से नाभा हलके को आरक्षित सीट होने के कारण वे नाभा से विधायक बने। वह साल 1992, 2002 व 2007 को हलका अमलोह व 2012 व 2017 में हलका नाभा से चुनाव जीतकर विधायक बने। 1992 में खेल राज्य मंत्री रहे, 2002 में संसदीय सचिव रहे तथा 2017 में वन, स्टेशनरी, सामाजिक न्याय विभाग, अधिकारिता और अल्पसंख्यक विभाग के मंत्री हैं। उन्हें मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की सरकार में जगह नहीं मिली। वे पत्रकारों, स्कूल प्रिसिपल समेत कई समारोह में अपने बयानों के कारण विपक्ष के निशाने पर भी रहे हैं। नहीं दिखा कोई समर्थक

शनिवार को उनकी नाभा स्थित रिहायश पर सनाटा दिखाई दिया। आवास पर उनके पीए चरनजीत बातिश के अलावा कोई भी मिलने जुलने वाला वाला अथवा उनका समर्थक नहीं दिखाई दिया। उनका घर नाभा-पटियाला बाईपास पर शहर से थोड़ा दूर है जहां रोड पर भी आज सन्नाटा पसरा दिखाई दिया।

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