कोरोना से मरने वाले मरीजों के घर नहीं किए जा रहे सैनिटाइज, सैंपल देने भी परिजन खुद सेंटर पहुंच रहे

कोरोना से मरने वाले मरीजों के घर नहीं किए जा रहे सैनिटाइज, सैंपल देने भी परिजन खुद सेंटर पहुंच रहे

कोरोना के दूसरे चरण में नियम और दिशानिर्देश को भी वायरस लग गया है। आलम यह है कि महामारी के कारण जिन परिवारों में किसी की मौत हो रही हैं उनके स्वजनों को कोरोना टेस्ट के लिए खुद लाइनों में लगकर सैंपल देने पड़ रहे हैं।

JagranSun, 09 May 2021 10:05 PM (IST)

जागरण संवाददाता, पठानकोट : कोरोना के दूसरे चरण में नियम और दिशानिर्देश को भी वायरस लग गया है। आलम यह है कि महामारी के कारण जिन परिवारों में किसी की मौत हो रही हैं उनके स्वजनों को कोरोना टेस्ट के लिए खुद लाइनों में लगकर सैंपल देने पड़ रहे हैं। इसके अलावा न ही उनको फतेह किट मुहैया करवाई जा रही है और न ही उनके घर को सैनिटाइज किया जा रहा है। नतीजन इससे न केवल कोरोना को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि व्यवस्था पर भी सवालिया निशान लग रहा है।

सेहत विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में शनिवार तक कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या 264 थी। इस समय लगभग 2300 लोग विभिन्न आइसोलेशन केंद्रों में अपना इलाज करवा रहे हैं। दूसरी ओर 14 अप्रैल के बाद से संक्रमण में लगातार वृद्धि हो रही है। 23 अप्रैल तक पाजिटिव मरीजों की संख्या 200 से नीचे आ रही थी, जबकि इसके बाद अमूमन हर रोज 200 से अधिक पाजिटिव आ रहे हैं। पिछले तीन दिनों से लगातार 400 से ज्यादा पाजिटिव मरीज पाए जा रहे हैं। इसी प्रकार लगातार मृतकों की संख्या भी बढ़ रही है। तीन मई को तो सबसे ज्यादा 11 लोगों की कोरोना से मौत हो गई थी, वहीं शनिवार को भी 10 मरीजों ने दम तोड़ा है। इसके बावजूद प्रशासन की कथनी और करनी में काफी अंतर देखने को मिल रहा है। दैनिक जागरण की टीम ने मृतकों के परिजनों बातचीक की तो पता चला कि सेहत विभाग के अधिकारी इनकी सुध नहीं ले रहे हैं। केस -1

सुजानपुर में कुछ दिन पहले एक महिला की कोरोना से मौत हो गई थी। मृतक के परिजनों ने बताया कि पहले महिला को एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। चार दिन में ही 46 हजार से ज्यादा का बिल आ गया। अंतिम क्षण में कहा गया कि इसकी हालत गंभीर है उसे सिविल अस्पताल ले जाओ। सिविल में भर्ती करवाया गया, इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। कोरोना गाइडलाइन के तहत ही अंतिम संस्कार किया गया। इसके बाद न ही सेहत विभाग के अधिकारी आए और नहीं उनको किसी भी प्रकार की कोई सुविधा दी गई। उन्होंने बताया कि कोरोना टेस्ट भी वे लोग खुद सेंटर पर जाकर करवाकर आए हैं। उन्हें फतेह किट तक नहीं उपलब्ध करवाई गई है। घर को सैनिटाइज करने की बात ही छोड़ दें। केस-2

इसी प्रकार पठानकोट शहर के एक व्यक्ति ने बताया कि कुछ ही दिन पहले उनके घर के मुखिया की मौत हुई है। घर को सैनिटाइज करवाने के लिए पार्षद के पास जाना पड़ा। उनके दखल के बाद घर को सैनिटाइज किया गया। घर में अभी गमगीन माहौल है। महिलाओं को पता नहीं है, इसलिए वह बात नहीं कर सकते। सिविल सर्जन ने आरोपों को नकारा

इस संबंध में सिविल सर्जन डा. हरविद्र सिंह ने कहा कि जिन लोगों की कोरोना से मृत्यु हो रही है उनके संपर्क में पारिवारिक सदस्य व अन्य लोगों को ट्रेस कर सैंपलिग की जा रही है। जरूरत के अनुसार फतेह किट भी पाजिटिव लोगों को उपलब्ध करवाई जा रही है साथ ही घरों को भी सैनिटाइज करवाया जा रहा है।

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