पशुपालन विभाग की डिस्पेंसरियों में स्टाफ न होने के कारण लोगों को पशुओं के इलाज के लिए जाना पड़ता है हिमाचल प्रदेश

कई लोगों ने कर्ज लेकर कार्य शुरू किया है। वहीं बीते दो बर्ष से पशु डिस्पेंसरी में फार्मासिस्ट एवं अन्य स्टाफ की कमी के कारण लोग सरकार से नाराज हैं।

JagranPublish:Fri, 03 Dec 2021 03:20 AM (IST) Updated:Fri, 03 Dec 2021 03:20 AM (IST)
पशुपालन विभाग की डिस्पेंसरियों में स्टाफ न होने के कारण लोगों को पशुओं के इलाज के लिए जाना पड़ता है हिमाचल प्रदेश
पशुपालन विभाग की डिस्पेंसरियों में स्टाफ न होने के कारण लोगों को पशुओं के इलाज के लिए जाना पड़ता है हिमाचल प्रदेश

संवाद सहयोगी, दुनेरा: धार कलां तहसील के विभिन्न गांवों के पशुपालन कार्य से जुड़े लोग पशुपालन विभाग की डिस्पेंसरियों में स्टाफ न होने को लेकर परेशान हैं। बता दें कि आय के साधन के रूप में विभिन्न गांवों के लोगों ने दुधारू पशुओं का पालन करते हैं। कई लोगों ने कर्ज लेकर कार्य शुरू किया है। वहीं बीते दो बर्ष से पशु डिस्पेंसरी में फार्मासिस्ट एवं अन्य स्टाफ की कमी के कारण लोग सरकार से नाराज हैं।

प्रहलाद सिंह पठानिया ने बताया कि स्टाफ न होने के कारण पशुपालकों को निजी चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ रहा है, जो कि आर्थिक रूप से महंगे साबित हो रहें हैं। कई बार चिकित्सक के ना मिलने के कारण पशुपालकों को अपने पशुओं को बीमारी के चलते हिमाचल प्रदेश के निकटवर्ती स्थान सुलयाली या नुरपूर तक दस से बारह किलोमीटर पैदल सफर तय कर चिकित्सा सहायता लेनी पड़ती है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि क्षेत्र की पशु डिस्पेंसरियों में स्टाफ का प्रबंध किया जाए। दो साल से पशु डिस्पेंसरी में नहीं है स्टाफ: सरपंच पूरन धीमान

गांव लैहरुन के सरपंच पूरन धीमान ने कहा कि गांव की पशु डिस्पेंसरी बीते दो साल से स्टाफ न होने के कारण बंद पड़ी है। गांव के पशुपालन से जुड़े लोग परेशान हैं। गाय, भैंस के गर्भधारण के इंजेक्शन लगवाने के लोगों को अधिक पैसे खर्च करने पड़ते हैं। पशुपालन विभाग एवं जिलाधीश पठानकोट से मांग है कि क्षेत्र की खाली पड़ी पशु डिस्पेंसरियो में स्टाफ का प्रबंध कर के क्षेत्र के पशुपालन से जुड़े लोगों को राहत पहुंचाई जाए। बार-बार समस्या बताने के बावजूद विभाग नहीं निकाल रहा हल

गांव भगुंडी की सरपंच वीना मन्हास ने बताया कि क्षेत्र के गांवों में बनीं पशु डिस्पेंसरियों में स्टाफ न होने से पशु पालकों को परेशानियां का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्र के लोग अपनी समस्या को लेकर सरपंच के पास आते हैं परंतु बार-बार इस संबंध में संबंधित विभाग से बात करने के बाद भी समस्या का हल नहीं निकला है। इस कारण क्षेत्र के पशुपालकों में अब सरकार के खिलाफ रोष बढ़ रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन एवं संबंधित विभाग के जिला अधिकारियों से इस समस्या के समाधान की अपील की है।