धुंध में धुंधलाई सड़कें : सावधान 17 ब्लैक स्पॉट स्वागत के लिए हैं तैयार

राज चौधरी, पठानकोट : ट्रैफिक के नियमों की ज्यादातर लोग पालना नहीं करते और प्रशासन भी अपनी कमियों को लोगों की आड़ में छुपा लेता है। नतीजा होता है सड़क हादसा। कोई हादसा काल का ग्रास बन जाता है तो कोई जीवन भर के लिए जख्म दे जाता है तो किसी में चोट तो कम लगती है लेकिन मन में दहशत बनी रहती है। जिले में पठानकोट-जालंधर, पठानकोट-अमृतसर तथा पठानकोट-जम्मू नेशनल हाईवे पर 17 से अधिक ऐसे ब्लैक स्पॉट हैं जहां सबसे ज्यादा हादसे होते हैं। सर्दियों में धुंध पड़नी जैसे ही शुरू होगी, इन हादसों की संख्या और बढ़ने लगेगी। ट्रैफिक लाइटें, साइन बोर्ड, ट्रैफिक पुलिस की कमी, नियमों को न मानना धुंध में धुंधलाई सड़कों को लाल कर देगा और प्रशासन अनियमितताओं को जानकर भी कोई योजना अमल में नहीं ला रहा। हालांकि हादसों को रोकने के लिए हाईवे को फोन-लेन और सिक्स लेन में बदला जा चुका है लेकिन कुछ कमियां हैं जिनका समाधान धुंध पड़ने से पहले जरूरी है। लोग खुद भी संजीदा नहीं

कई लोग ऐसे हैं जो ट्रैफिक नियमों को मानना जरूरी नहीं समझते, वहीं कुछ ऐसे लोग भी हैं जो चालान कटने के डर से मजबूरी में कुछ नियम मान लेते हैं लेकिन इन्हें गंभीरता से नहीं लेते। हेलमेट न पहनना, शराब पीकर गाड़ी चलाना, सीट बेल्ट न लगाना, दोपहिया वाहन पर तीन लोगों का बैठना, जल्दबाजी के चक्कर में तेज वाहन चलाना और धुंध में डिप्पर का प्रयोग न करने जैसे नियमों की अनदेखी सबसे ज्यादा होती है जो बेशकीमती जानें लील लेती हैं।

प्रशासन की कमियां, ट्रैफिक पुलिस की अनदेखी

नेशनल हाईवे पर अधिकतर स्थलों पर न तो सूचना बोर्ड लगाए गए हैं और न ही लोगों को पैदल रास्ता पार करने के लिए कोई जेब्रा क्रॉसिंग है। चौराहों या मोड़ पर कोई सिग्नल या बोर्ड नहीं है। जिन जगहों पर ट्रैफिक सिग्नल लाइटें हैं उनमें से अधिकतर खराब पड़ी हैं। चौक वाला खूह सड़क हादसों के कारण पूर्व समय में सुर्खियों में रहा है। जहां अभी तक ट्रैफिक लाइटे तक नहीं लगाई गई। वहीं इसी मार्ग के कुछ ही दूरी पर स्थित पंगोली चौक में जिला प्रशासन की ओर से लाइटें तो लगा दी गई परंतु एक बार खराब होने के बाद इनकी सुध तक नहीं ली गई। प्रशासन की कमियों के साथ ट्रैफिक पुलिस की अनदेखी भी हादसों की वजह बनती है। नेशनल हाईवे पर भी कई बस चालक व अन्य वाहन चालक सवारियों को बिठाते हैं। हाईवे और चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस की कमी रहती है जबकि हाईवे पर हर समय पुलिस का कम से कम एक मुलाजिम 24 घंटे अवश्य ही तैनात होना चाहिए। जिले में हैं 17 ब्लैक स्पॉट

-थाना डिवीजन नंबर-1 के अधीन काठ द पुल, कोर्ट कॉम्प्लेक्स चौक तथा टाइगर चौक

-थाना डिवीजन नंबर-2 के अधीन ट्रक यूनियन मोड़, गुरु रविदास चौक तथा धीरा पुल

-थाना नंगल भूर में कौंतलपुर चौक

-थाना मामून के अधीन जंडवाल तथा छतवाल मार्ग

-थाना धारकलां के अधीन धारकलां चौक

-थाना शाहपुरकंडी के अधीन पंगोली चौक, चौक वाला खूह, तवी कॉलेज मार्ग

-थाना सुजानपुर के अधीन पुल नम्बर-4 तथा पुल नम्बर-5

थाना सदर के अधीन-नरोट वाली पुली

-थाना नरोट जैमल सिंह के अधीन पड़ते कोलियां में सबसे ज्यादा सड़क हादसे होते हैं।

साढ़े 10 माह में 82 हादसों के मामले दर्ज

पठानकोट में जनवरी-2019 से लेकर 15 नवम्बर-2019 तक साढ़े 10 माह में जिले भर में कुल 82 सड़क हादसों के मामले दर्ज हुए। इनसे से कुल 57 लोगों की मौत हो गई जबकि 44 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। ये आंकड़े सिर्फ इस साल का है। लगभग हर साल इतनी ही संख्या में लोग चौपहिया तथा दोपहिया वाहनों की चपेट में आकर मौत का ग्रास बनते हैं। इसके इलावा ऐसे 30 से ज्यादा सड़क हादसे भी है जिनमें लोगों की ओर से हादसे के बाद प्राइवेट अस्पतालों में जाकर अपना इलाज करवा लिया गया तथा पुलिस को शिकायत दर्ज नहीं करवाई गई।

22 को जिला स्तर पर बनेगी योजना : ट्रैफिक इंचार्ज

ट्रैफिक प्रभारी पठानकोट के इंचार्ज एसआइ सुरेंद्र कुमार ने बताया कि सड़क हादसों को लेकर एसएसपी दीपक हिलोरी विशेष रूप से योजना पर काम कर रहे हैं। जिला प्रशासनिक अधिकारियों को साथ लेकर जिला स्तर पर 22 नवंबर को मीटिग आयोजित की जाएगी जिसमें ब्लैक स्पॉट बन चुके स्थलों पर हादसों को रोकने के लिए विशेष नीति पर काम होगा। इसमें देखा जाएगा कि किन-किन जगहों पर अवैध कब्जों को हटाना, साइनिग बोर्ड लगाना, पुलिस कर्मचारियों की तैनात तथा अन्य पहलुओं पर खास तौर पर काम होगा।

चंडीगढ़ के एक्सपर्ट करेंगे सर्वेक्षण : डीसी

डीसी रामवीर ने कहा कि शहर की ट्रैफिक समस्या के निदान तथा हादसों को रोकने के लिए चंडीगढ़ से एक्सपर्ट की टीम बुलाई गई है। उनके साथ जिला प्रशासन तथा पुलिस विभाग के पदाधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी तथा शहर का सर्वेक्षण किया जाएगा। इस सर्वे के बाद नई नीति बनाई जाएगी।

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