सांझा मोर्चा अध्यापक यूनियन ने पंजाब सरकार का फूंका पुतला

सांझा मोर्चा अध्यापक यूनियन ने पंजाब सरकार का फूंका पुतला

नवांशहर प्रदेश सरकार के शिक्षा विभाग की नीतियों के खिलाफ सांझा मोर्चा अध्यापक यूनियन ने अध्यापकों को लेकर सरकार की गलत नीतियों के विरोध में सोमवार को डीसी कार्यालय के समक्ष प्रदेश सरकार का पुतला फूंका।

JagranMon, 17 May 2021 11:07 PM (IST)

जागरण संवाददाता, नवांशहर

प्रदेश सरकार के शिक्षा विभाग की नीतियों के खिलाफ सांझा मोर्चा अध्यापक यूनियन ने अध्यापकों को लेकर सरकार की गलत नीतियों के विरोध में सोमवार को डीसी कार्यालय के समक्ष प्रदेश सरकार का पुतला फूंका।

इस अवसर पर अध्यापक नेताओं कुलदीप सिंह दौड़का, मुल्क राज शर्मा, देश राज नौरद, पससफ के जिला प्रधान करनैल सिंह राहों ने कहा कि पंजाब सरकार के शिक्षा सचिव द्वारा लगातार अध्यापकों के पद खत्म करके सार्वजनिक शिक्षा को बर्बाद कर रहे हैं। शिक्षा सचिव द्वारा लाकडाउन के बावजूद अध्यापकों को दाखिले बढ़ाने के लिए लोगों के घरों में जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। पंजाब सरकार की 50 फीसद स्टाफ की उपस्थिति के उलट सभी अध्यापकों को स्कूलों में उपस्थित रहने की हिदायत है। परसोनल विभाग की तरफ से जारी पत्र अनुसार शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को क्वारंटाइन छुट्टी न देने के विरोध तथा अध्यापकों के साथ गुलाम जैसा व्यवहार करने के विरोध में प्रदेश सरकार का पुतला फूंका है।

उन्होंने बताया कि प्राथमिक शिक्षा तंत्र को खत्म करन के निशाने के अंतर्गत प्री-प्राथमिक और प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों का दाखिला सीनियर सेकंडरी स्कूलों में करने के आदेश जारी किए जा रहे हैं। इसी प्रकार माध्यमिक स्कूलों में मौजूद छह पदों में से पहले आर्ट एंड क्राफ्ट और पीटीआइ के पद खत्म कर दिए गए। फिर 228 पीटीआइ को जबरन बीईपीओ कार्यालय में शिफ्ट कर दिया गया और अब माध्यमिक स्कूलों के पदों को सीनियर सेकंडरी स्कूलों में शिफ्ट करके माध्यमिक स्कूलों को खत्म किया जा रहा है। उनहोंने कहा कि पंजाब सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत प्राथमिक शिक्षा तंत्र व माध्यमिक स्कूलों को खत्म करने जा रही है।

इससे आम लोगों के बच्चों के लिए सार्वजनिक शिक्षा खत्म होगी। उसके साथ ही महंगे पाठ्यक्रम करने बाद टीचर एलिजीबिलिटी टेस्ट पास कर चुकी बेरोजगार नई पीढ़ी के लिए रो•ागार के मौके भी खत्म हो जाएंगे। जबकि पंजाब कांग्रेस ने अपने चुनाव घोषणापत्र में अध्यापकों को पक्के करने, अध्यापकों की मुश्किलों को हल करने सहित सार्वजनिक शिक्षा के विकास और वृद्धि के लिए राज्य के कुल घरेलू उत्पादन का छह फीसद खर्च करने का वादा किया था। मगर, सरकार ने सत्ता में आते ही शिक्षा के विरोध में काम करना शुरू कर दिया है।

इस मौके पर गुरदयाल सिंह, जसविंदर सिंह, कुलविंदर लाल, निर्मलजीत, रेशम लाल, बलवीर सिंह रक्कड़, अमरजीत सिंह, बलवीर सिंह भुल्लर, विनायक लक्खनपाल, रेशम लाल आदि मौजूद थे।

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