खतरनाक राहें, मौत की मंजिल, 11 माह में 48 की गई जान

जागरण संवाददाता,नवांशहर : हर साल जिले की सड़कों पर हो रहे हादसों के कारण सैकड़ों लोगों की मौत हो जाती है और सैंकड़ों लोग घायल हो जाते हैं। ज्यादातर हादसे कुछ खास स्थानों पर ही होते हैं, जिन्हें ब्लैक स्पॉट कहा जाता है। नवांशहर में बंगा से लेकर आंसरों तक कई ब्लैक स्पाट थे। मोहाली से लेकर फगवाड़ा तक के ब्लैक स्पॉट तो खत्म हो गए हैं, लेकिन अभी भी आंसरों से लेकर काठगढ़ तक के क्षेत्र में दुर्घटनाओं की संख्या में कोई कमी नही आई है। बलाचौर से नवांशहर के बीच सबसे बड़ा ब्लैक स्पॉट भूलेखा चौक और गुरुद्वारा ठेहरी साहिब वाला मोड़ था, जहां पर अकसर दुर्घटनाएं होती रहती थी, लेकिन हाईवे बनने पर सड़क खुली हो गई और और दुर्घटनाए होना रुक चुकी हैं। अगर आसंरों से लेकर मेहली तक के सबसे बड़े ब्लैक स्पॉट की बात की जाए तो सबसे बड़ा ब्लैक स्पॉट है इस हाईवे पर गांव सुज्जोवाल का मोड़। यहां लगातार पिछले कई दशकों से दुर्घटनाएं होती रही हैं। एक हजार से ज्यादा लोग इस ब्लैक स्पॉट में अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके बाद भी कभी इस मोड़ पर न तो दिशा सूचक लाइटों वाले बोर्ड लगे न ही धीरे चलो के बोर्ड प्रशासन ने लगवाए हैं। इस मोड़ के के तहत करीब 15 गांव हैं।अब जबकि इस सड़क को हाईवे अथॉरिटी बना रही है फिर भी गांव को जाने के लिए पासिग नही दी गई है। मोड़ से बिलकुल सामने गांव गहूण का मोड़ है जो सीधे बलाचौर जाता है। 15 गांवों के लोग अकसर इसी रास्ते से तहसील बलाचौर आते-जाते हैं। हाईवे ने गांवों के लोगों की सुविधा को देखते हुए उन्हें तो पासिग नहीं दी बल्कि आगे कई सौ मीटर की दूरी पर स्थित दो होटलों को पासिग दे दी। गांवों के लोगों ने विधायक,सांसद व एसडीएम बलाचौर हाईवे को पत्र लिखा है कि पासिग दी जाए,क्योंकि पासिग न होने से हादसे और बढ़ गए हैं। लोग रात में कई सौ मीटर दूर जाकर मुड़ते हैं और लाइटों व दिशा सूचक बोर्डो के न होने से वे दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।

वाहनों पर भी नहीं लगवाए रिफ्लेक्टर

सड़क पर चलने वाले वाहन भी धड़ल्ले से बिना रिफ्लेक्टर लगाए दौड़ रहे हैं। अब गहरी धुंध व कोहरे का मौसम भी आने वाला है।शुगर मिल भी अब शुरू हो गई है और अब गन्ने की ट्रालियां भी सड़कों पर आम देखी जा सकती हैं। यदि गन्ने की ट्रालियों के पीछे रिफ्लेक्टर न लगा हो तो पीछे से आ रहे वाहन को धुंध व कोहरे के कारण कुछ भी दिखाई नहीं देता। पीछे जा रहे वाहन चालकों को नहीं दिखाई देता कि उनके आगे क्या जा रहा है इसी कारण बड़े हादसे हो जाते हैं।

ओवरलोड वाहन दे रहे दुर्घटनाओं को न्यौता

सड़कों पर दौड़ते भार वाहक वाहन व गन्ने से ओवर लोडेड ट्रक ट्रालियां भी हादसों का कारण बनती है। सबसे ज्यादा गन्ने से ओवरलोड ट्रालियां हादसों का कारण बनती है। हम अक्सर देखते हैं कि सर्दियों में धूंध के दौरान अक्सर गन्ने से ओवर लोड ट्रालियां सड़कों पर पलटी रहती हैं।

धुंध के कारण वाहन नहीं दिखाई देते

सर्दियों में ज्यादातर हादसे कोहरे और धुंध के कारण होते हैं। लाइट वाले दिशा सूचकों व वाहनों के पीछे रिफ्लेक्टर न होने से दुर्घटनाएं होती रहती हैं। जिसका खामियाजा कुछ वाहन चालकों को ही भुगतना पड़ता है क्योंकि कोहरे में बिना रिफ्लेक्टर के वाहन नजर नहीं आते और जब नजर आता है तब बहुत ही नजदीक से नजर आता है। फिर इमरजेंसी ब्रेक लगाने के बाद भी वाहन पर कंट्रोल नहीं होता जिस कारण दुर्घटना घट जाती है।

सेमिनार लगाकर लोगों को करते हैं जागरूक

ट्रैफिक इंचार्ज रतन सिंह का कहना है कि सर्दियों और धूंध के मौसम में पीछे से आ रहे वाहन चालक को आगे जा रहा वाहन नहीं दिखाई देता। यही कारण है कि सर्दियों में ज्यादा दुर्घटनाए होती है। ट्रैफिक पुलिस, कालेजों और सार्वजनिक स्थानों पर सेमिनार लगाकर लोगों को जागरूक करेगी। ऐसा करने के लिए समाजिक संगठनों का सहयोग भी लिया जाएगा हर वाहन के पीछे रिफ्लेक्टर लगाने के लिए जल्द ही लोगों में जागरुकता लाई जाएगी ताकि सड़कों पर दौड़ते वक्त किसी की अनमोल जिदगी को नुकसान न पहुंच सके।

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