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परमात्मा के नाम में हैं अद्भुत शक्ति : प्रदीप रश्मि

संवाद सूत्र, मलोट (श्री मुक्तसर साहिब)

भगवान के नाम में अद्भुत शक्ति होती है। इसके लिए सिर्फ श्रद्धा, भक्ति, आस्था व विश्वास की जरूरत होती है। श्रद्धा से ही परमात्मा की शक्ति को ग्रहण किया जाता है।

श्रद्धा जब मजबूत होती है तो पत्थर से भी भगवान प्रगट हो जाया करते हैं। श्रद्धा का मतलब होता है पूर्ण समर्पण। अपने मन वचन काय व सोच को अपने आराध्य के चरणों में पूर्ण समर्पित कर देना ही सच्चा समर्पण कहलाता है। जिसने भी पाया है समर्पण से ही पाया है। बिना समर्पण कभी किसी को कुछ नहीं मिला है। पाने का मार्ग है समर्पण। बिना समर्पण न प्रेम मिलता है न धन मिलता है न प्रगति मिलती है। जब तक अपने कार्य के प्रति समर्पित नहीं होते तब तक उस कार्य में सफलता प्राप्त नहीं होती है। वही लोग अपने कार्य में सफल होते हैं जो अपने कार्य के प्रति पूर्ण समर्पित होते हैं। उन्हीं लोगों ने भगवान को पाया है जिनमें अछ्वुत समर्पण रहा है। मीरा चंदनबाला सेठ सुदर्शन व प्रह्लाद का समर्पण जग विख्यात है। यह विचार पंजाब सिंहनी प्रदीप रश्मि जी महाराज ने एसएस जैन सभा के प्रांगण में श्रद्धालुओं से कहे।

उन्होंने कहा जैन धर्म के 23 वें तीर्थकर भगवान पारसनाथ के नाम में अद्भुत ऊर्जा है। इसलिए भगवान पारसनाथ का नाम चितामणि कामधेनु कल्पवृक्ष के रूप में लिया जाता है। भगवान पारसनाथ का नाम सभी प्रकार के उपसर्गों का हरण करने वाला है। आचार्य भद्रबाहु द्वारा रचित उवसग्हरं स्तोत्र सब प्रकार के संकट को दूर कर मंगल प्रदान करता है। संकट की घड़ी में 27 दिन तक 27 बार उसका स्मरण करने से बड़े से बड़ा संकट भी समाप्त हो जाता है। संकट की घड़ियों में भगवान पा‌र्श्वनाथ का नाम संजीवनी की तरह काम करता है।

एसएस जैन सभा के प्रधान प्रवीण जैन ने बताया कि आज कोरोना महामारी की इस त्रासदी में रक्षा व सुरक्षा के लिए महाराज साहब ने उवसग्हरं स्तोत्र का पाठ व हीलिग करवाई। विश्व शांति कें लिए भी प्रार्थना की गई।

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