युग प्रवर्तक थे श्री गुरु नानक देव जी

संवाद सूत्र, मलोट (श्री मुक्तसर साहिब)

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से पुरानी सब्जी मंडी आश्रम में श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश उत्सव से संबंधित कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य स्वामी नीरजानंद जी ने कहा कि श्री गुरु नानक देव जी युगांतकारी महापुरूष हैं। उन्होंने अपने जीवन काल में घूम-घूमकर चातुर्दिक उदासियां की।

उन्होंने रूढि़यों, हठधर्मिता और दुराग्रहों पर प्रभावशाली प्रहार किया। देश में एक अद्वितीय क्रांति की शुरुआत की। युद्धजन्य या रक्रंजित क्रान्ति की नहीं बल्कि पूर्णतया श्वेत और अहिसामय क्रांति की। रक्त का एक कतरा भी नहीं गिरा और मानव समाज ज्योतिष्मान पथ का अनुगामी बन गया। कर्मकांडों की अंधी गलियों से निकलकर शाश्वत ज्ञान-भक्ति के आलोक मय मार्ग की ओर उन्मुख किया। सादगीपूर्ण लेकिन मर्मभेदी उपदेश और ब्रह्मज्ञान यही श्री गुरु नानक देव जी के अस्त्र रहे। नेत्रहीन मानव- जाति को ब्रह्मज्ञान के माध्यम से दिव्य ²ष्टि प्रदान की और अंतरजोत का बोध कराकर मानव को सत्य के साथ मिलाया। गुरु नानक देव जी के आर्दशों अनुसार एक पूर्ण गुरु के माध्यम से ही मानव शाश्वत ज्ञान प्राप्त कर आपनी आत्मा का कल्यान कर सकता हैं। इस समागम में साध्वी कुलदेवी भारती जी ओर साध्वी दिवेशा भारती जी ने गुरबाणी कीर्तन से संगत को अन्दित किया।

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