दस लाख का जुर्माना रद कर कोर्ट ने मिलर के पक्ष में दिया फैसला

। सिविल जज सीनियर डिवीजन अमनदीप कौर चाहल की अदालत ने तीन दिन तक चली लंबी बहस के बाद गर्ग राइस मिल निहाल सिंह वाला के मामले में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआइ) के 1055016 रुपये के जुर्माने के नोटिस को रद करते हुए फैसला राइस मिलर के पक्ष में दिया है।

JagranTue, 28 Sep 2021 08:04 AM (IST)
दस लाख का जुर्माना रद कर कोर्ट ने मिलर के पक्ष में दिया फैसला

सत्येन ओझा, मोगा

सिविल जज सीनियर डिवीजन अमनदीप कौर चाहल की अदालत ने तीन दिन तक चली लंबी बहस के बाद गर्ग राइस मिल निहाल सिंह वाला के मामले में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआइ) के 10,55,016 रुपये के जुर्माने के नोटिस को रद करते हुए फैसला राइस मिलर के पक्ष में दिया है।

यह मामला साल 2004-05 में स्टोर किए गए चावलों से जुड़ा है। उस साल पंजाब भर की राइस मिलों ने स्टोर किए गए चावल को महाराष्ट्र व ओडिशा आदि राज्यों को भेजा था। इसके बाद पंजाब भर में तीन सौ से ज्यादा मिलर्स का चावल खराब बताकर साल 2007 में करीब 800 करोड़ रुपये से ज्यादा का जुर्माना लगाया गया था। इसको लेकर कई मामले अदालत में चल रहे हैं, लेकिन मिलर के पक्ष में यह पहला फैसला आया है। यह पूरे पंजाब के लिए नजीर बन सकता है।

यह है मामला

निहाल सिंह वाला नगर कौंसिल के पूर्व अध्यक्ष इन्द्रजीत गर्ग को एफसीआइ ने 20 मार्च, 2008, 21 मई, 2008, 13 जनवरी, 2009 एवं नौ मई, 2011 को नोटिस जारी कर उनके द्वारा एफसीआइ के गोदाम में जमा कराया धान खराब बताया था। नोटिस में 10,55,016 रुपये का जुर्माना लगाया गया था। नोटिस में कहा गया था कि एफसीआइ के गोदाम में जमा कराया 1,499 मीट्रिक टन चावल बियांड रिजेक्शन लिमिट में था, जबकि 553 मीट्रिक टन चावल खाने योग्य नहीं था। वर्ष 2005 में जमा चावल जब मैसूर, महाराष्ट्र, नांदेड़, ओडिशा, अगरतला, त्रिपुरा व गुवाहाटी आदि स्थानों पर भेजा गया तो वह खराब पाया गया था। गर्ग राइस मिल को 2008 से लेकर 2011 तक चार नोटिस दिए गए।

यह हैं स्टोरेज के नियम

एफसीआइ में चावल स्टोर होने से पहले तीन स्तरों पर चावल की गुणवत्ता की एफसीआइ जांच करती है। बाद में कुल माल के 25 प्रतिशत चावल की क्वालिटी की जांच असिस्टेंट क्वालिटी कंट्रोल के स्तर पर होती है। तीस प्रतिशत चावल की क्वालिटी की जांच डिप्टी मैनेजर क्वालिटी कंट्रोल करते हैं। दो प्रतिशत चावल की जांच जिला मैनेजर एफसीआइ करते हैं। हर महीने तीन डिपो की जांच रीजनल आफिस के जूनियर मैनेजर क्वालिटी कंट्रोल करते हैं। हर महीने चार डिपो की जांच खुद सीनियर रीजनल मैनेजर (एसआरएम) जांच करते हैं। गुणवत्ता जांच की इतनी लंबी प्रक्रिया के बावजूद चावल घटिया लगा। जुर्माना मिलर्स पर लगा दिया गया।

इन नियमों का मिला लाभ

मिलर्स की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट वरदान गर्ग ने एफसीआइ का क्वालिटी कंट्रोल मैन्युअल अदालत में पेश किया। इसमें स्पष्ट था कि चावल खराब होने वाला खाद्यान्न है, जिसका ठीक से रखरखाव नहीं किया गया तो यह जल्द खराब हो सकता है। साल 2004-05 में एफसीआइ के तत्कालीन सीनियर रीजनल मैनेजर वरिष्ठ आइएएस टीसी गुप्ता की 17 अगस्त 2005 की रिपोर्ट अदालत में पेश की गई। गुप्ता ने अपनी रिपोर्ट में मोगा के एफसीआइ के स्टोरेज की हालत को बहुत ही खराब बताया था। साथ ही, रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लिखा था कि चावल का ठीक से रखरखाव नहीं किया जा रहा है। इससे बड़े पैमाने पर चावल खराब हो सकता है।

हाई कोर्ट के खराब चावल के एक फैसले को भी एडवोकेट वरदान गर्ग ने अदालत में पेश किया, जिसमें जज ने एफसीआइ को दलील दी थी कि मिलर्स ने उन्हें चावल दिया है। ग्रेनाइट के पत्थर नहीं, जो वर्षों तक बिना रखरखाव के भी ठीक रहेंगे।

एडवोकेट वरदान गर्ग ने यह भी दलील दी कि शिफ्टिंग के दौरान चावल जब खराब मिला, तब विभाग ने संबंधित मिलर को बुलाया क्यों नहीं। वर्ष 2005 के खराब चावल का नोटिस 2008 में भेजना पूरी तरह अन्यायपूर्ण था।

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