हादसे के बाद सिविल अस्पताल के स्टाफ को दी आक्सीजन सिलेंडर बदलने की ट्रेनिग

। मथुरादास सिविल अस्पताल के गायनी वार्ड में बुधवार को आक्सीजन सिलेंडर लीक होने की घटना के बाद वीरवार को पूरे स्टाफ को आक्सीजन सिलेंडर बदलने की पूरी प्रक्रिया की ट्रेनिग दी गई।

JagranThu, 22 Jul 2021 10:47 PM (IST)
हादसे के बाद सिविल अस्पताल के स्टाफ को दी आक्सीजन सिलेंडर बदलने की ट्रेनिग

संवाद सहयोगी,मोगा

मथुरादास सिविल अस्पताल के गायनी वार्ड में बुधवार को आक्सीजन सिलेंडर लीक होने की घटना के बाद वीरवार को पूरे स्टाफ को आक्सीजन सिलेंडर बदलने की पूरी प्रक्रिया की ट्रेनिग दी गई।

इस दौरान सीएमओ डा.सुखप्रीत सिंह बराड़ ने स्पष्ट किया कि जिस महिला कर्मचारी ने सिलेंडर बदला था वह अनट्रेंड नहीं थी, नोजल की चूड़ियां स्लिप होने से जैसे ही गैस लीक हुई तो वह डर गई थी। भविष्य में ऐसा हादसे न हो, इसलिए स्टाफ को ट्रेनिग दी जा रही है। एसएमओ डा. बराड़ की अगुवाई में आक्सीजन सिलेंडर सप्लाई करने वाली कंपनी के कर्मचारियों के सहयोग से स्टाफ को आक्सीजन सिलेंडर का प्रयोग करने की जानकारी दी गई।

बुधवार को दोपहर गायनी वार्ड में आक्सीजन सिलेंडर की नोजल लीक होने के कारण जहां भगदड़ मच गई थी, जिससे गायनी वार्ड में भर्ती गर्भवती महिलाओं व नवजात शिशुओं को उनके स्वजन गोद में उठाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए भागना पड़ा था। पूरे गायनी वार्ड समेत अस्पताल में जहां अफरातफरी का माहौल बन गया था। वही एंबुलेंस 108 के चालक कमलजीत सिंह उर्फ टीटू ने हिम्मत दिखाकर एक बड़ा हादसा होने से टाल दिया था। वीरवार को विशेष तौर पर अॅक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी के कर्मचारियों को अस्पताल में बुलाकर पूरे स्टाफ को आक्सीजन सिलेंडर बदलने की ट्रेनिंग दी गई।

ऐसे करें आक्सीजन सिलेंडर का प्रयोग

आक्सीजन सिलेंडर सप्लाई करने वाली कंपनी के फोरमैन जगसीर सिंह ने बताया कि उन्होंने स्टाफ को आक्सीजन सिलेंडर को कनेक्ट व डिस्कनेक्ट करने की जानकारी दी है, ताकि कोई हादसा न हो। स्टाफ को अवगत करवाया कि आक्सीजन सिलेंडर के पास बिजली की सप्लाई का स्विच बोर्ड न हो। सिलेंडर की नोजल की जांच करें कि कहीं लीकेज तो नही है। आक्सीजन सिलेंडर प्लांट में बीड़ी , सिगरेट न ले जाई जाए, लीकेज होने की जानकारी मिलते ही तुरंत घुमावदार चूड़ी को बंद कर दिया जाए। अगर फिर भी आक्सीजन लीक हो रही है तो तुरंत मैकेनिक को सूचना दी जाए। लीकेज का पता लगाने के लिए शैंपू, पानी के घोल व एक ब्रश का प्रयोग करते हुए समय-समय पर आक्सीजन सिलेंडर की नोजल व वहां से जाने वाली सप्लाई लाइन पर लगाएं ताकि लीकेज का पता चल सके। जहां तक आक्सीजन की सप्लाई जाती है अगर चार आक्सीजन सिलेंडर लगे हैं तो एक साइड पर चार ही सिलेंडर जांच करके तैयार रखे जकं।

हमारा फर्ज है लोगों को बेहतर सेहत सेवाएं देना

एसएमओ डा सुखप्रीत सिंह बराड ने बताया कि उनके द्वारा सिविल अस्पताल में आने वाले लोगों को बेहतर सेवाएं प्रदान करवाने में अपना पूरा योगदान दिया जा रहा है। ऐसे में लोगों को भी चाहिए कि वह सेहत विभाग को सहयोग दें। उन्होंने बताया कि आक्सीजन सिलेंडर की लीकेज से बड़ा हादसा हो सकता था, एंबुलेंस 108 के चालक की सूझबूझ से हादसा टल गया ।

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