हुनर, परंपराएं व व्यवसायिक कौशल एक साथ दिखा

करवा चौथ व्रत का उल्लास वीरवार को शहर के एसडी कालेज फार वूमेन में दिखा। कालेज के कामर्स विभाग की ओर से आयोजित करवा मेले में मनमोहक ढंग से सजे मिट्टी के करवे मेहंदी कास्टेमेटिक आइटम ब्यूटीपार्लर के स्टाल बने हुए थे।

JagranThu, 21 Oct 2021 05:17 PM (IST)
हुनर, परंपराएं व व्यवसायिक कौशल एक साथ दिखा

नेहा शर्मा, मोगा : करवा चौथ व्रत का उल्लास वीरवार को शहर के एसडी कालेज फार वूमेन में दिखा। कालेज के कामर्स विभाग की ओर से आयोजित करवा मेले में मनमोहक ढंग से सजे मिट्टी के करवे, मेहंदी, कास्मेटिक आइटम, ब्यूटीपार्लर के स्टाल बने हुए थे। कालेज के कास्मेटोलाजी व फैशन डिजायनिग विभाग की ओर से लगाए गए इन स्टाल पर छात्राएं ही नहीं, बल्कि अध्यापिकाएं खरीददारी भी कर रही थीं। कुल मिलाकर मेले में बच्चों का हुनर, परंपराएं व व्यवसायिक कौशल एक साथ दिखा। यहां पर सरकार की योजना 'अर्न व्हाइल यू लर्न' का सिद्धांत लागू होता दिख रहा था।

प्रिसिपल डा.नीना अनेजा ने मेले का फीता काटकर उद्घाटन किया तो मेले की आयोजक छात्राओं ने करवा चौथ व्रत की परंपरा का निर्वहन करते हुए सरगी का सामान भेंट किया। इसमें सुहाग का सामान, फेनियां, फ्रूट, ड्राईफ्रूट, नारियल, व छात्राओं के हुनर को प्रदर्शित करते मिट्टी का मोहक करवा भी शामिल था। इस मौके पर प्रिसिपल डा.नीना अनेजा ने बताया कि सरकार की योजना कि पढ़ने के साथ ही कमाना सीखो, इसी थीम पर करवा चौथ का मेला कालेज कैंपस में आयोजित किया गया है। कामर्स की छात्राएं इस मेले का आयोजन कर उद्यमिता सीख रही हैं। वह सीख रही हैं कि किस प्रकार से व्यवसायिक मेलों का आयोजन कर जीविकोपार्जन किया जा सकता है?

कॉस्मेटोलॉजी का स्टाल फैशन डिजाइनर विभाग की प्रमुख मनदीप शर्मा, हेमा रानी, ज्योति के निर्देशन में छात्राओं ने स्टाल लगाया था। इस स्टाल पर कास्मेटोलाजी का हर प्रकार का सामान उपलब्ध था, खास बात ये थी कि स्टालों पर कास्टेमेटोलाजी के अलावा छात्राओं द्वारा खुद तैयार की गईं ज्वेलरी यहां खरीदीदारी करने वाली छात्राओं व अध्यापिकाओं की पहली पसंद बनी हुई थी। छात्रा मुस्कान, अंजलि, जसप्रीत, राजवीर, परमिदर, कोमलप्रीत, अर्शदीप ने स्टाल लगाई। रश्मि व गुलशन ने प्रिसिपल के हाथों में मेहंदी रचाई। मेहंदी के माध्यम से प्रिसिपल के हाथों में उकेरी कला से प्रभावित प्रिसिपल डा.नीना अनेजा की प्रतिक्रिया थी, ये मेहंदी उनके जीवन के लिए अनमोल तोहफा है। क्योंकि ये मेहंदी खुद उन्हीं छात्राओं ने उनके हाथों में लगाई जिन्हें शिक्षा देने की जिम्मेदारी है। छात्राओं को उन्होंने कैंपस में जो कुछ दिया, उन्होंने उसे बेहतर ढंग से उन्हें लौटाया है। एक अध्यापक के लिए उनके विद्यार्थी ही गर्व की वजह हो सकते हैं। अपने हाथों की मेहंदी को देख वे खुद पर गर्व कर सकती हैं। कुल मिलाकर ये मेला एक नई सोच का प्रतिबिबित कर रहा था।

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