शून्य से शिखर पर पहुंचे संजीव सैनी की निजी जिदगी किसी उत्सव से कम नहीं

। करीब 42 साल पहले पिता की पानी के जहाज व हवाई जहाज की टिकट का शहर में छोटा का बुकिग सेंटर था।

JagranSun, 24 Oct 2021 08:01 AM (IST)
शून्य से शिखर पर पहुंचे संजीव सैनी की निजी जिदगी किसी उत्सव से कम नहीं

सत्येन ओझा.मोगा

करीब 42 साल पहले पिता की पानी के जहाज व हवाई जहाज की टिकट का शहर में छोटा का बुकिग सेंटर था। उसी के साथ शहर के प्रमुख समाजसेवी एवं पंजाब के बढ़े उद्यमियों में शुमार बीबीएस ग्रुप के चेयरमैन संजीव कुमार सैनी ने आज खुद की मेहनत के बल पर एक हजार करोड़ रुपये सालाना टर्न ओवर का कारोबार खड़ा किया है। प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से आज वह करीब पांच हजार से ज्यादा परिवारों को रोजगार दे रहे हैं।

हर दिन अपने व्यवसाय को संजीव सैनी 12 घंटे से ज्यादा का समय देते हैं। इसके बाद भी घर में अगर कोई मेहमान डिनर पर आ जाए तो वह आधी रात के बाद दो बजे से पहले लौट जाए, ये संभव नहीं है। वह दिलो जान से उनका स्वागत करते हैं।

दैनिक जागरण की टीम ने एक दिन संजीव सैनी के साथ डिनर किया। हम उनके निवास पर शाम आठ बजे पहुंचे। फ्रेश जूस, ड्राईफ्रूट्स के साथ मेहमाननवाजी शुरू हुई। रात सवा दो बजे उनके घर में ही बने होम थियेटर में बनारस-ए मिस्टिक लव स्टोरी जैसी आध्यात्मिक फिल्म देखकर वापस लौटे। आठ बजे से लेकर रात सवा दो बजे तक कभी होम थियेटर, कभी डिनर टेबल तो कभी लाइब्रेरी में व्यंजन खत्म ही नहीं हुए। उसी के साथ उनके जीवन की व्यक्तिगत बातें जानने का मौका मिला। हमने जाना कि सैनी सिर्फ व्यवसायी नहीं हैं। उन्हें अपने देश, दुनिया व समाज ही नहीं बल्कि आसपास के इतिहास की जो जानकारी है, वे जान कर कोई भी दंग रह जाएगा। लगा ही नहीं कि किसी व्यवसायी के साथ बैठे हैं। होम थियेटर में पांच सौ से ज्यादा पुरानी, आध्यात्मिक व धार्मिक फिल्मों का भंडार उनके पास है। इन फिल्मों को वे परिवार के साथ बैठकर देखते हैं।

व्यवसायी संजीव सैनी की लाइब्रेरी में पहुंचे तो बात भारत-पाकिस्तान के बंटवारे की छिड़ गई। सैनी ने बताया कि पाकिस्तान के जनक मोहम्मद अली जिन्ना अपनी जिदगी के अंतिम पलों को जी रहे थे, तब बहुत पछता रहे थे कि उन्होंने पाकिस्तान क्यों बनवा दिया। अंतिम सांसें गिन रहे जिन्ना ने अपने गुजराती डाक्टर से कहा था कि उनका बस चले तो नेहरू जी के पास जाकर कहें गलती हो गई, आओ फिर से अखंड भारत में रहें। प्रमाण के तौर पर सैनी ने जिन्ना की बहन फातिमा की लिखी पुस्तक के कुछ पन्ने अपनी ई-लाइब्रेरी से निकालकर हमारे सामने पेश कर दिए।

ऐसा रहा जिदगी का सफर

पिता सोहनलाल सैनी आज से करीब 45 साल पहले मोगा शहर में ही पानी व हवाई जहाज का बुकिग सेंटर चलाते थे, साथ ही हलवाई की दुकान थी। पुश्तैनी व्यवसाय के रूप में यही सब कुछ सैनी को मिला था। इसी व्यवसाय को सैनी आगे बढ़ाते गए। सोच सकारात्मक रखी, कुछ अच्छे साथी मिलते गए। आज वे समराला ग्रुप के सीईओ हैं। ये ग्रुप पंजाब में कई बड़ी औद्योगिक इकाइयों से जुड़ा हुआ है। मोगा में सैनी का बीबीएस ग्रुप है, जिसके तहत तीन स्कूल, एक इमीग्रेशन सेंटर संचालित करते हैं। कारोबार का बड़ा साम्राज्य खड़ा करने वाले संजीव सैनी तमाम व्यस्तताओं के बावजूद परिवार को पूरा समय देते हैं। पत्नी कमल सैनी, तीनों बेटियां जैसिका, नेहा व नताशा के साथ दुनिया के तमाम देश घूम चुके हैं, लेकिन मन भारत में आकर ही लगता है। खासकर दक्षिण भारत के कुछ शहर बेटियों को ही नहीं, बल्कि खुद संजीव सैनी को भी बहुत पसंद हैं। व्यवसाय में जब संघर्ष कर रहे थे, तब पत्नी कमल सैनी ने बेटियों के लिए पिता की भी भूमिका निभाई थी। उन्हें घर की चिता नहीं होने दी। आज जब सफल उद्यमी हैं तो परिवार को हर दिन समय देते हैं। जब बाहर होते हैं तब मोबाइल पर लंबी बातचीत होती है।

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