छह महीने में 116, त्योहारी सीजन अक्टूबर में खाद्य पदार्थों के लिए भरे 23 सैंपल

। छह महीने में फूड सेफ्टी विभाग ने जिले में खाद्य पदार्थों के 116 सैंपल लिए। त्योहारी सीजन आते ही अक्टूबर में अब तक 23 सैंपल लिए जा चुके हैं सभी की रिपोर्ट लंबित है।

JagranTue, 26 Oct 2021 10:23 PM (IST)
छह महीने में 116, त्योहारी सीजन अक्टूबर में खाद्य पदार्थों के लिए भरे 23 सैंपल

राज कुमार राजू,मोगा

छह महीने में फूड सेफ्टी विभाग ने जिले में खाद्य पदार्थों के 116 सैंपल लिए। त्योहारी सीजन आते ही अक्टूबर में अब तक 23 सैंपल लिए जा चुके हैं, सभी की रिपोर्ट लंबित है।

सहायक खाद्य आयुक्त मनजिदर सिंह ढिल्लों का कहना है कि सैंपलों की रिपोर्ट आने में 15-16 दिन लग जाते हैं, इससे साफ है कि दीवाली से पहले जिन खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए जा रहे हैं, उनकी रिपोर्ट दीवाली के बाद आएगी। अगर शहर में घटिया खाद्य पदार्थ या मिठाई बेची जा रही है तो जब तक रिपोर्ट आएगी, तब तक मिठाई लोगों के पेट में जा चुकी होगी।

विभाग की ओर से खाद्य पदार्थ बनाने वालों को उनके प्रतिष्ठानों पर जाकर कभी जागरूक नहीं किया जाता है, न ही उन्हें अच्छे माहौल में खाद्य पदार्थ तैयार करने के लिए प्रेरित किया जाता है। बस त्योहारी सीजन पास आते ही सैंपल भरने की होड़ मच जाती है। ये स्थिति तब है जब हाल ही में मिर्च पाउडर के लिए सैंपल में शहर में घातक रासायनिक रंग मिला। एक जगह से सैंपल लेकर विभाग ने अपनी ड्यूटी पूरी कर दी, इस प्रकार का मिर्च पाउडर शहर में कितनी जगह मिल रहा है, इसकी जांच करने की विभाग ने कोशिश ही नहीं की। मिलावटी चीजें खाने से होता है नुकसान: डा.संदीप

डा.संदीप गर्ग के अनुसार पाउडर और वनस्पति तेल मिलाकर बनाया गया दूध अथवा मावा प्राकृतिक नहीं है। इसके सेवन से नुकसान तो होगा ही। इससे पेट, हृदय एवं हार्ट से संबंधित रोग होने की आशंका बढ़ जाती है ।

अच्छे कारोबारियों से खरीदें मिठाईया

बिगबैन होटल के एमडी बिदू सूद, इंपीरियल बेकरी के पवन शर्मा तथा शर्मा स्वीटस से बलवंत राय शर्मा ने बताया कि जिले में त्योहारों के सीजन में कुछ लोग लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने से गुरेज नहीं करते। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा है कि साफ-सुथरी मिठाई बेचने वाले दुकानदारों से ही मिठाई खरीदें। शहर में बहुत से ऐसे मिठाई विक्रेता भी हैं,जो क्वालिटी से समझौता नहीं करते। उन्होंने मिठाई के कारोबार से जुड़े सभी लोगों से अपील की है कि लोगों की सेहत से खिलवाड़ न करें। छह महीने की रिपोर्ट

-कुल सैंपल भरे 116

- नौ सैंपल घटिया क्वालिटी के निकले

ब्रांड का गलत प्रयोग करने का एक सैंपल निकला

न खाने योग्य पदार्थ का एक

एडीसी की अदालत में कुल आठ केस किए दायर

-जुर्माना किया 55000, वसूली 35000

-अक्टूबर में लिए सैंपल की कुल संख्या 23 (सभी की रिपोर्ट पेडिग)

---- कैसे हो रही है गड़बड़ी

हलवाई एसोसिएशन के प्रधान बलवंत राय शर्मा का कहना है कि पांच किलो दूध से एक किलो पनीर बनता है। दूध की कीमत ही 250 रुपये है। पनीर बनाने में अन्य खर्चे मिलाकर 300 रुपये प्रति किलो लागत ही बनती है। जबकि पनीर बाजार में 200 रुपये किलो में बिक रहा है, इससे साफ है कि 200 किलो वाला पनीर कैसे मिल सकता है, ये पनीर राजस्थान से बड़े पैमाने पर हर रोज शहर में आ रहा है। अच्छी गुणवत्ता का पनीर प्रति किलो 350 रुपये से कम नहीं मिल सकता है। कैसे हो समस्या का समाधान

दूध में सूजी डालकर कुछ कारीगर मिल्क केक बना रहे हैं, इस प्रकार का मिल्क केक बड़े पैमाने पर लुधियाना से शहर में आ रहा है। ये मिल्क केक 220 रुपये प्रति किलो में मिल रहा है, जबकि सही क्वालिटी का मिल्क केस साढ़े तीन से कम नहीं मिल सकता है, लागत ही 300 रुपये प्रति किलो से ज्यादा आ रही है। सरकार द्वारा मंजूरशुदा रंग जो चमचम में मिलाया जाता है, आठ हजार रुपये प्रति किलो के हिसाब से आ रहा है, जबकि आम तौर पर जो रंग प्रयोग हो रहा है वह 300-400 रुपये किलो वाला है। जब तक बाहर से बड़े पैमाने पर आ रहे घटिया क्वालिटी के खाद्य पदार्थों पर रोक नहीं लगेगी, लोगों को गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थ नहीं मिलेंगे।

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